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असम के डिटेंशन कैंपों में हो रही मौतों के खिलाफ सीपीआई (एमएल) ने किया देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन

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पटना में माले का विरोध-प्रदर्शन।

पटना/लखनऊ/प्रयागराज। असम के डिटेंशन कैंपों में हो रही मौतों के खिलाफ सीपीआईएमएल ने आज देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन किया। इसके तहत पटना, लखनऊ से लेकर कोलकाता तक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों में सरकार के मानव विरोधी क्रूरतापूर्ण रवैये की जमकर निंदा की गयी। गौरतलब है कि असम के इन कैंपों में अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है।

पार्टी ने इस मौके पर नागरिकता संशोधन बिल वापस करने की भी मांग की। उसका कहना था कि इस मुद्दे के जरिये बीजेपी न केवल असम में बल्कि देशभर में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश कर रही है। राजधानी पटना में कारगिल चौक पर माले कार्यकर्ताओं ने विरोध सभा का आयोजन किया। विरोध-प्रदर्शन के दौरान माले कार्यकर्ता डिटेंशन कैंप में हुई मौतों के जिम्मेवार मोदी-शाह जवाब दो, देश भर में एनआरसी को थोपना बंद करो, डिटेंशन कैंपों को बंद करो,  नागरिकता पर हमला नहीं सहेंगे आदि नारे लगा रहे थे।

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* असम के डि टेंशन कैम्पों में 27 लोगों की मौतों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह जबाब दो! * एन आर…

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इस मौके पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि असम के डिटेंशन कैंपों में अब तक 27 लोगों की मौत हो गई है। फाइनल सूची के पहले 25 लोग मारे गए और उसके बाद दो लोगों की मौत हुई है। इन दो लोगों में 70 वर्षीय फालू दास और 65 वर्षीय दुलाल चंद्र पाल शामिल हैं। दुलाल पाल और फालू दास के परिवार ने उनके शव लेने से इंकार कर दिया। उनके परिजनों का कहना था कि अगर वह बांग्लादेशी थे, तो बांग्लादेश में उनके परिवार को तलाशिये, और शव को बांग्लादेश भेजिए। नहीं, तो मानिये कि वे भारत के नागरिक थे जिनकी हत्या सरकार द्वारा डिटेंशन कैम्प में की गयी है। इन मौतों के लिए पूरी तरह से मोदी-शाह की जोड़ी जिम्मेवार है। नेताओं का कहना था कि भाजपा ने असम के लगभग 19 लाख लोगों की नागरिकता को खतरे में डाल दिया है। इन लोगों को डिटेंशन कैंपों में डाला जा रहा है जहां लोगों की लगातार मौतें हो रही हैं। 

नेताओं ने कहा कि आज भाजपा-आरएसएस के लोग पूरे देश में एनआरसी थोपना चाहते हैं। अमित शाह अब देश भर में एनआरसी लागू करवाने पर आमादा हैं, जिसमें हर किसी को कागजात के जरिए साबित करना होगा कि 1951 में उनके पूर्वज भारत में वोटर थे। हर राज्य में डिटेंशन कैम्प खुलवा रहे हैं- महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल में ऐसे कैम्प बन रहे हैं। गरीब तो बीपीएल की सूची, वोटर लिस्ट, आधार आदि से भी बाहर रह जाते हैं। वह 1951 के अपने पूर्वजों के कागजात कहाँ से लाएंगे? अगर न ला पाए तो उन्हें डिटेंशन कैम्प में डाल दिया जाएगा। मोदी-शाह पर एक बार फिर निशाना साधते हुए वक्ताओं ने कहा कि अगर आप मुसलमान हैं तो आपको देश से निकाल दिया जाएगा, पर अगर आप हिन्दू या गैर मुसलमान हैं, तो हम नागरिकता कानून में संशोधन करके आपको शरणार्थी मान लेंगे।

आज गांधी प्रतिमा, बालसन चौराहा इलाहाबाद मे एन आर सी और डीटेंशन कैम्प मे हो रही मौत के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हुआ,

Kamal Usri ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಬುಧವಾರ, ನವೆಂಬರ್ 6, 2019

इस तरह आज नागरिकों की नागरिकता पर भाजपा-आरएसएस ने खतरा पैदा कर दिया है। उन्हें या तो डिटेंशन कैम्प में मारा जाएगा, या नागरिक के बजाय शरणार्थी बना दिया जाएगा।

नेताओं ने कहा कि भाकपा-माले भाजपा-आरएसएस की इन कोशिशों को कभी कामयाब नहीं होने देगी। आने वाले दिनों में एनआरसी को वापस करने की मांगों पर और भी जोरदार आंदोलन किए जाएंगे। इस मौके पर भाकपा-माले के वरिष्ठ नेता कॉ. राजाराम, केंद्रीय कमेटी के सदस्य व पटना नगर के सचिव अभ्युदय, माले की राज्य स्थायी समिति के सदस्य आरएन ठाकुर, राज्य कमेटी के सदस्य रणविजय कुमार मौजूद थे।

इसी तरह से लखनऊ के जीपीओ और प्रयागराज के बालसन चौराहे पर भी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।

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