नहीं रहीं मन्नू भंडारी, 91 साल की उम्र में निधन

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अब से कुछ देर पहले हंस पत्रिका ने अपनी फेसबुक पेज पर ख़बर दी है कि वरिष्ठ कथाकार मन्नू भंडारी गुज़र गईं। उनका निधन गुड़गांव के एक अस्पताल में हुआ है। वो 91 साल की थी। मन्नू भंडारी साहित्यकार व हंस पत्रिका के संपादक मरहूम राजेन्द्र यादव की जीवनसंगिनी थी। मन्नू भंडारी का जन्म 3 अप्रैल 1931 को मध्य प्रदेश में मंदसौर जिले के भानपुरा गाँव में हुआ था। मन्नू का बचपन का नाम महेंद्र कुमारी था। साहित्य लेखन के लिए उन्होंने मन्नू नाम रख लिया था। एम ए तक शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने दिल्ली के मिरांडा हाउस में बतौर अध्यापिका अपनी सेवायें दी।

इसके अलावा मन्नू भंडारी विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में प्रेमचंद सृजनपीठ की अध्यक्षा भी रहीं। लेखन का संस्कार उन्हें विरासत में मिला। उनके पिता सुख सम्पतराय भी जाने माने लेखक थे। बॉम्बे से प्रकाशित होने वाली प्रतिष्ठित पत्रिका ‘धर्मयुग’ में धारावाहिक रूप से प्रकाशित उपन्यास ‘आपका बंटी’ से उन्हें अपार लोकप्रियता मिली। उनकी चर्चित कहानियों में, एक प्लेट सैलाब (19962, मैं हार गई (1957), तीन निगाहों की एक तस्वीर,यही सच है (9166),त्रिशंकु, आंखों देखा झूठ, अकेली शामिल है।
इसके अलावा उन्होंने एक नाटक ‘बिना दीवारों का घर’ (1966) भी लिखा था।

मन्नू भंडारी के उपन्यास बेहद चर्चित रहे। उनका पहला उपन्यास ‘आपका बंटी’ (1971) विवाह विच्छेद की त्रासदी में पिस रहे एक बच्चे को केंद्र में रखकर लिखा गया था। यह उपन्यास बाल मनोविज्ञान का नायाब उदाहरण है। उनका दूसरा उपन्यास ‘एक इंच मुस्कान(1962) था। यह उपन्यास उन्होंने पति राजेंद्र यादव के साथ मिलकर लिखा था। यह उपन्यास आधुनिक लोगों की एक दुखांत प्रेमकथा है जिसका एक-एक अंक लेखक-द्वय ने क्रमानुसार लिखा था।
महाभोज (1979) उनका तीसरा उपन्यास था। यह उपन्यास नौकरशाही और राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार के बीच आम आदमी की पीड़ा को उद्घाटित करता है। इस उपन्यास पर आधारित नाटक अत्यधिक लोकप्रिय हुआ था।
उनके उपन्यास ‘यही सच है पर’ पर रजनीगंधा नामक फिल्म बनी थी जिसे 1974 की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार भी प्राप्त हुआ था।

मन्नू भंडारी जी को उनके विपुल साहित्य के लिये विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इसमें हिन्दी अकादमी, दिल्ली का शिखर सम्मान, बिहार सरकार, भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता, राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, व्यास सम्मान और उत्तर-प्रदेश हिंदी संस्थान सम्मान शामिल हैं।

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