Tuesday, March 5, 2024

गुजरात पुलिस का क्रूर चेहरा : पूरे परिवार की कराई सड़क पर परेड

कलीम सिद्दीकी

जंगलराज के लिए कभी यूपी और बिहार बदनाम था लेकिन गुजरात ने अब इनको बहुत पीछे छोड़ दिया है। जंगलराज अगर अपराधियों, गुंडों और माफियाओं का हो तो एक बात है लेकिन यहां तो पुलिस ही बर्बरता की नयी इबारत लिख रही है।

देश में जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव, हिंसा और मारपीट कोई नई बात नहीं है। लेकिन इन तंग दायरों से बाहर निकलने वाले इंसान का बेवजह उत्पीड़न किया जाए तो मामला जरूर गंभीर हो जाता है।

 

शर्मनाक!

गुजरात के पालिताणा में इसी तरह का एक मामला सामने आया है। यहां खाकी वर्दीधारियों ने वहशीपन की सारी हदें पार कर दी। उन्होंने न केवल शहर के एक गणमान्य परिवार के लोगों की बेरहमी से पिटाई की बल्कि सरेआम सड़कों पर घुमाकर उन्हें शर्मसार कर दिया।

मामला ‘जनचौक’ पर दो दिन पहले दिखायी गयी मांडवी से महज 30 किमी दूर पालिताणा का है। दोनों इलाके भावनगर जिले में ही आते हैं।

गणमान्य परिवार है नोडिया परिवार

दिलीप युसूफ भाई नोडिया गुजरात के पालिताणा कस्बे के कारोबारी हैं। पालिताणा में सोनाली रेस्तरां नाम से नोडिया परिवार के 6 रेस्तरां हैं। इसके अलावा तीन दुकानें भी हैं।

मुफ़्त खाना मंगाती थी पुलिस

पीड़ित परिवार से जुड़े लोगों का कहना है कि पालिताणा पुलिस उनके रेस्तरां से जब चाहे जितना चाहे खाना मुफ्त में मंगवा लेती थी।

रेस्तरां मालिक के अंदर भय बना रहे इसके लिए खाकी के लोग आए दिन उनके साथ गाली गलौच किया करते थे। साथ ही उन्हें इस बात का भी एहसास दिलाते रहते थे कि वो मुसलमान हैं और पुलिस के रहमोकरम पर उनका अस्तित्व है। जबकि दिलीप भाई के दादा ने धर्म और जाति का चोला कभी का उतार दिया था।

हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल है परिवार

इस परिवार का सरनेम नोडिया है। ये उपनाम कच्छ के मूलनिवासियों का है। आम तौर पर यह उपनाम हिन्दू मुस्लिम दोनों धर्मों के लोग लगाते हैं।

इस परिवार के लोग जाति और धर्म की सीमाओं से पार चले गए थे। उनके बच्चों के नाम भी इसकी गवाही देते हैं।

जो नाम अच्छा लगा उसे रख लिया। वो हिन्दी नाम हो या उर्दू, हिन्दू नाम हो या मुस्लिम नाम। किसी हिन्दू मित्र ने राजेश नाम रखने का सुझाव दिया तो राजेश रख लिया। किसी मुस्लिम मित्र ने करीम के नाम का सुझाव दिया तो करीम रख लिया। तीन पीढ़ियों से यही परंपरा चली आ रही है।

बताया जाता है कि पुलिस द्वारा बार बार अपमानित करने और मनमाने तरीके से खाने के वसूली से तंग आ कर दिलीप भाई ने पुलिस को मुफ्त में खाना देना बंद कर दिया।

नोडिया परिवार का ये फैसला पुलिस को अच्छा नहीं लगा। और अंदर ही अंदर उसने उन्हें सबक सिखाने का मन बना लिया।

घटनाक्रम

घटना 15 मार्च की है सुबह लगभग दस बजे का समय था। पुलिस का एक जवान दिलीप भाई के रेस्तरां पहुंचा और बोला कि साहब यानी पुलिस इंस्पेक्टर वी एस मंजारिया ने बुलाया है।

पुलिसवाले करीम भाई युसूफ भाई नोडिया को अपने साथ थाने ले गए। खबर सुन कर उनके भाई और भतीजे दिलीप भाई और युसूफ भाई नोडिया भी थाने पहुंचे।

थानेदार वी एस मंजारिया ने थाने पहुंचे परिवार के सभी सदस्यों को लॉकअप में डालकर पिटाई शुरू कर दी। यहां तक उन्होंने महिलाओं को भी नहीं बख्शा।

परिवार की महिला सदस्य जैबुन बेन युसूफ भाई को पुलिस ने इतना मारा कि उन्हें भावनगर सिविल अस्पताल में दाखिल कराना पड़ा।

शाम को पांच बजे नोडिया परिवार के चारों लोगों को पुलिस थाने से मारते मारते उनके रेस्तरां ले आयी। उसके बाद उन्हें पूरे कस्बे में घुमा-घुमा कर पीटा और अपमानित किया गया।

बाद में फ़िरोज़ करीम भाई नोडिया और करीम युसूफ भाई नोडिया को छोड़ दिया गया। जबकि दिलीप युसूफ भाई नोडिया और नवाब करीम भाई नोडिया को वापस थाने के लॉकअप में डाल दिया गया।

रात को तकरीबन साढ़े ग्यारह बजे थानेदार मंजारिया ने राजन भवन भाई संघवी को बुलाया और उन पर दबाव बनाकर नोडिया परिवार के खिलाफ 2000 रुपये के लूट की एफआईआर दर्ज करवा दी।

आपको बता दें कि राजन भवन भाई संघवी की कपड़े की एक दुकान है जो सोनाली रेस्तरां के बिल्कुल नीचे है। बताया जाता है कि राजन को बलात्कार के एक केस में जेल हो चुकी है। पिछले तीन महीने से वह ज़मानत पर हैं।

इसी का लाभ उठा कर पुलिस ने उनसे नोडिया परिवार के खिलाफ केस दर्ज करवाने में सफलता हासिल कर ली। और अब नोडिया परिवार के खिलाफ लूट का केस बनाकर उन्हें प्रताड़ित कर रही है। पुलिस ने इस केस में दो महिला समेत आठ लोगों पर केस दर्ज किया है। इसमें दिलीप युसूफ भाई नोडिया, नवाब करीम भाई नोडिया, सलीम भाई युसूफ भाई नोडिया, फैसल दिलप भाई नोडिया, फारुक दिलीप भाई नोडिया, रिजवाना फ़िरोज़ भाई नोडिया, जैबुन बेन युनुस भाई नोडिया, रफीक भाई युनुस भाई नोडिया के नाम शामिल हैं।

हाईकोर्ट में न्याय की गुहार

परिवार के एक सदस्य राजेश नोडिया उस दिन पालिताना से बाहर थे। जिसके चलते पुलिस इनको आरोपी नहीं बना पायी। राजेश अब न्याय की गुहार लगाते हुए गुजरात हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। उनका कहना कि 15 मार्च से पूरा कारोबार ठप्प है। कारोबार से अधिक चिंता है कि बरसों की इज्ज़त को कैसे दोबारा लौटाए जाए।

उनका कहना है कि सीसीटीवी फुटेज मिल जाए तो उनका काम बन सकता है। पुलिस ने रात में दो बजकर तीस मिनट पर एफआईआर दर्ज की है। जबकि सुबह दस बजे से ही पुलिस ने परिवार के चार लोगों को अपनी कस्टडी में ले रखा था।

इस पुलिसिया अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए राजेश ने पूर्व आईपीएस राहुल शर्मा को अपना वकील रखने का फैसला किया है। राहुल शर्मा से मुलाक़ात के बाद पुलिस दबाव में है।

दलित नेता जिग्नेश मेवानी ने भी राजेश नोडिया से मिलकर उनका साथ देने का भरोसा दिया है।

राजेश नोडिया गुजरात प्रदेश कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े हैं। हालांकि कांग्रेस आईटी सेल के प्रमुख रोहन गुप्ता का कहना है कि राजेश नोडिया एक वालंटियर के तौर पर सोशल मीडिया पर कांग्रेस का प्रचार प्रसार करते हैं। वो सेल के पदाधिकारी नहीं हैं।

जनचौक से जुड़े

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

Latest Updates

Latest

Related Articles