Thursday, December 9, 2021

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मुंबई में रेमेडिसीवर का बड़ा जखीरा बरामद; भाजपा बोली बांटने के लिए मंगाया; पुलिस ने कहा विदेश भेजने की थी तैयारी

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बड़ी मात्रा में रेमेडिसीवर का स्टॉक करके रखने और विदेश भेजने की सूचना पर कल रात मुंबई पुलिस ने रेमेडिसीवर बनाने वाली कंपनी ब्रुक फार्मा के एक डायरेक्टर को पूछताछ के लिए विले पार्ले थाने बुलाया। पुलिस को सूचना मिली थी कि कंपनी ने रेमडेसिविर दवा की काफी बड़ी मात्रा मुंबई में स्टोर कर रखी थी। मुंबई पुलिस के मुताबिक रेमेडिसीवर के स्टॉक को विदेश भेजने की तैयारी थी, जबकि इस दवा के निर्यात पर रोक लगी हुई है। कहानी में ट्विस्ट तब आया जब कंपनी के निदेशक से पुलिसिया पूछताछ की सूचना पाते ही पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और वरिष्ठ भाजपा नेता प्रवीण दारेकर भागकर थाने पहुंच गये। इसके बाद शुरू हुआ हाई वोल्टेज ड्रॉमा। दोनों भाजपा नेताओं ने वहीं थाने में मीडिया को बुलाकर बताया कि दवा पार्टी की महाराष्ट्र इकाई ने मंगाई है। जबकि पुलिस का साफ कहना है कि यह दवा विदेश भेेजने की तैयारी थी।

उन्होंने कहा कि रेमेडिसीवर की कमी को देखते हुए पार्टी ने कई फार्मा कंपनियों से संपर्क किया था। हम महाराष्ट्र के लिए दवा उपलब्ध कराने का ईमानदार प्रयास कर रहे थे कि पता चला कि पुलिस ने ब्रुक फार्मा के अधिकारी को हिरासत में ले लिया है। फड़नवीस और दारेकर ने एक बयान में कहा है कि रेमेडिसीवर दवा का स्टॉक का वितरण हम राज्य सरकार के जरिए ही कराना चाहते थे। हमने तय किया था कि दवा की पूरी कीमत, यानी पौने पांच करोड़ रुपये हम ही चुकाएंगे। खरीदने के बाद हम दवा का भंडार मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को दे देते। दारेकर ने कहा कि हमारी मंशा की जानकारी खाद्य एवं दवा मंत्री राजेंद्र शिंगने के पास थी, क्योंकि हम जो करने जा रहे थे, उसके लिए राज्य सरकार की परमिशन चाहिए थी। भाजपा नेता दारेकर ने कहा कि वे पिछले सोमवार को दवा सप्लाई पर बात करने ब्रुक फार्मा के अधिकारियों के पास दमन गए भी थे।

देवेंद्र फड़नवीस ने बताया कि कुछ दिन पहले पार्टी नेता प्रवीण दारेकर और प्रसाद ला ब्रुक फार्मा के पास दमन गए थे। हमने उनसे महाराष्ट्र के लिए रेमेडिसीवर देने की गुजारिश की थी। वे राजी थे, लेकिन दिक्कत यही थी कि उनके पास लाइसेंस नहीं था। इसके बाद केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया से कहकर हमने लाइसेंस दिला दिया।

वहीं देवेंद्र फड़नवीस ने उल्टा चोर कोतवाल को डांटे की तर्ज़ पर कहा है कि राज्य के एक मंत्री के ओएसडी ने कंपनी के अधिकारियों को यह कह कर हड़काया है कि वे विपक्षी दल के कहने पर किस तरह रेमेडिसीवर दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रुक फार्मा के अधिकारी को शाम के वक्त दस पुलिसकमियों ने हिरासत में लिया।

मुंबई पुलिस का दावा विदेश भेजने की तैयारी थी
दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि उसे दमन में बनी दवा के मुंबई में मौजूद भंडार की जानकारी मिली थी। सूत्रों ने पुलिस को बताया था कि यह जखीरा विदेश भेजा जाने वाला है। सो, जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए यह कार्रवाई की गई।

बता दें कि ब्रुक फार्मा देश की उन 16 कंपनियों में एक है जो रेमेडिसीवर बनाती हैं। ब्रुक फार्मा को दवा एक्सपोर्ट की अनुमति भी प्राप्त है, लेकिन कंपनी के पास मार्केटिंग का लाइसेंस नहीं है। अतः दवा की बिक्री के लिए उन फार्मा कंपनियों की मदद लेनी होती है, जिन्हें लाइसेंस प्राप्त है। ऐसी कंपनियों की संख्या सात है। बता दें कि यह जीवनरक्षक दवा कोविड-19 के मरीजों को तब दी जाती है जब उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है। मुंबई में रेमडेसिविर की भारी किल्लत है।

भाजपा नेताओं के पास कैसे पहुंच रहा रेमेडिसीवर का स्टॉक
अभी कुछ दिन पहले तब हल्ला मचा था जब गुजरात में भाजपा के सूरत और नवसारी कार्यालयों में रेमेडिसीवर दवा बांटी गई थी। गुजरात से इस दवा को यूपी सप्लाई करने के लिए भी वहां की रूपानी सरकार को पक्षपात का लांछन झेलना पड़ा था।

इससे पहले मध्य प्रदेश के जबलपुर के सांसद राकेश सिंह ने पूरे शहर में अपना पोस्टर लगवाया था, जिसमें मुफ्त रेमेडिसीवर दवा बांटने का विज्ञापन दिया गया था। वहीं दूसरी ओर भाजपा शासित मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित सरकारी हमीदिया अस्पताल से रेमेडिसीवर इंजेक्शन बड़ी तादाद में चोरी होने का मामला सामने आया है।

महाराष्ट्र सरकर को न, विपक्षी पार्टी भाजपा को हां
इससे पहले कल महाराष्ट्र की महाअघाड़ी सरकार में मंत्री नवाब मलिक ने महाराष्ट्र में रेमेडिसीवर इंजेक्शन की सप्लाई को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्‍होंने कहा कि केंद्र ने रेमडेसिविर इंजेक्‍शन की सप्‍लाई करने वाली सभी कंपनियों से कहा कि वे महाराष्‍ट्र सरकार को ये इंजेक्‍शन न दें। केंद्र ने इन कंपनियों को लाइसेंस रद्द करने की भी धमकी दी है।

एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा, “केंद्र सरकार ने रेमेडिसीवर इंजेक्शन की सप्लाई करने वाली कंपनियों के निर्यात पर पाबंदी लगाई है। अब जब ये 16 कंपनियां विदेश में दवा निर्यात नहीं कर पा रही हैं और जबकि उन्‍होंने देश के भीतर ही रेमेडिसीवर बेचने की अनुमति मांगी है। महाराष्‍ट्र सरकार ने उन कंपनियों से सीधे संपर्क किया है। उन कंपनियों से कहा गया है कि अगर उन्‍होंने सीधे महाराष्‍ट्र सरकार को दे दवा दी तो उनपर कार्रवाई की जाएगी।”

ऐसे में सवाल ये उठता है कि जो कंपनियां महाराष्ट्र की राज्य सरकार को सीधे रेमेडिसीवर बेच नहीं सकती हैं, वर्ना उनका लाइसेंस मोदी सरकार कैंसिल कर देगी वही कंपनियां भाजपा के नेताओं को कैसे रेमेडिसीवर दवाई का बड़ा जखीरा मुहैया करवा दे रही हैं पार्टी ऑफिस में फ्री बांटने के लिए?

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