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“किसी विपक्षी नेता के खिलाफ सफलतापूर्वक की गयी एक भी कार्रवाई मेरी कुर्सी सुरक्षित कर सकती है”

नई दिल्ली। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज यानि सीबीडीटी के चेयरमैन प्रमोद चंद मोडी ने एक संवेदनशील मामले को दफनाने का एक बेहद चौंकाने वाला निर्देश दिया था इसके साथ ही उन्होंने यह दावा किया था कि विपक्ष के एक नेता के खिलाफ सफलतापूर्ण कार्रवाई के जरिए वह अपनी सर्वोच्च कुर्सी को सुरक्षित कर सकते हैं।

यह बात देश की वित्तमंत्री को भेजी गयी एक अभूतपूर्व शिकायत में सामने आयी है। जिसको किसी और ने नहीं बल्कि उसी विभाग की मुंबई में इनकम टैक्स की चीफ कमिश्नर (यूनिट2) अलका त्यागी ने भेजी है। इंडियन एक्सप्रेस की मानें तो यह शिकायत 21 जून को की गयी थी। यानि इस सरकार के फिर से शपथ लेने के तकरीबन एक महीने बाद।

9 पेजों की इस शिकायत में इस बात को बिल्कुल साफ तरीके से देखा जा सकता है कि मोडी का अधिकारियों पर कितना दबाव था। इसके साथ ही इस शिकायत की कॉपी पीएमओ, सीवीसी और कैबिनेट सचिवालय को भी भेजी गयी थी।

1984 बैच की आईआरएस अफसर त्यागी का कहना है कि उनके खिलाफ चलने वाले एक बहुत पुराने केस को सिर्फ इसलिए फिर से जिंदा कर दिया गया जिससे उसे ब्लैकमेल के हथियार के तौर पर उनके खिलाफ इस्तेमाल किया जा सके। उनका कहना था जबकि इस केस को खुद मोडी ने ही रफा-दफा किया था।

इस शिकायत के दो महीने बाद सरकार ने मोडी के कार्यकाल को एक साल के लिए और बढ़ा दिया। और इसी बृहस्पतिवार को त्यागी जिनकी इनकम टैक्स के प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर के पद पर पोस्टिंग होनी थी, को नागपुर स्थित नेशनल एकैडमी ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज के डायरेक्टर जनरल आफ इनकम टैक्स (ट्रेनिंग) के पद पर भेज दिया गया।

त्यागी की शिकायत में ढेर सारी अनियमितताओं को गिनाया गया है। जिसमें सीबीडीटी चेयरमैन मोडी द्वारा एक संवेदनशील मामले में बार-बार उनसे कार्रवाई रोकने की की गयी बात भी शामिल है। उनका कहना है कि ये ऐसे मामले थे जो न केवल संवेदनशील थे बल्कि उनमें गंभीर आरोप भी शामिल थे।

अपनी शिकायत में त्यागी ने आरोप लगाया है कि मोडी ने उनसे इस बात को स्वीकार किया है कि “उनके द्वारा विपक्ष के किसी नेता के खिलाफ सफलतापूर्वक संचालित कोई भी केस उनके चेयरमैन पद को सुरक्षित कर सकता है। साथ ही कुछ अफसरों के खिलाफ वह बेरोक-टोक तरीके से कार्रवाई कर सकेंगे।”

त्यागी ने बताया कि अप्रैल 2019 के आखिरी सप्ताह और मई की शुरुआत में मोडी ने उनसे कहा कि संवेदनशील मामलों में चल रही कार्रवाइयों को खत्म कर दिया जाए। और इस काम को मई 2019 से पहले पूरा कर लिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि “यह निर्देश बेहद आश्चर्यजनक था लेकिन मेरे लगातार ऐसा न कर पाने की मुश्किलों के बावजूद उसे बार-बार मेरे पास भेजा गया।”

शिकायत के मुताबिक मोडी ने इस बात का निर्देश दिया कि इन सभी मामलों में कहीं भी यह बात सामने नहीं आनी चाहिए कि वह कहीं किसी भी रूप में इनको खत्म कराने में शामिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बात को सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि फाइल से उनका किसी तरह का कोई रिश्ता नहीं रहा है। त्यागी ने कहा कि चेयरमैन ने उन पर उन फाइलों को बंद करने के लिए भीषण दबाव डाला। और यह काम किसी भी कीमत पर करने का निर्देश दिया।

उन्होंने इस बात का पूरा विवरण दिया है कि कैसे शुरू में कुछ नोटिसों को भेजा गया। लेकिन मोडी को इस बात के लिए मनाना बेहद कठिन था कि किसी भी मामले के संज्ञान में आने पर उस पर नोटिस भेजना और कार्रवाई करना अनिवार्य है क्योंकि ऐसा नहीं होने पर संबंधित अफसर का कैरियर प्रभावित हो सकता है।

और उसके खिलाफ विजिलेंस जांच शुरू हो सकती है। लेकिन उसके बाद भी चेयरमैन पीसी मोडी ने कहा कि नोटिसों का ड्राफ्ट आखिरी तौर पर उनके द्वारा पास किया जाएगा। एक बार फिर उन नोटिसों पर अपनी संस्तुति देने में वह नाकाम रहे यह जानते हुए कि इससे संबंधित अफसरों का कैरियर प्रभावित हो सकता है।

त्यागी के दफ्तर द्वारा सीधे तौर पर देखे जा रहे दीपक कोचर-आईसीआईसीआई बैंक के असेसमेंट केस में मुकेश अंबानी परिवार को ब्लैक मनी एक्ट के तहत नोटिस भेजी गयी थी। जेट एयरवेज केस और दूसरे मामलों में भी ऐसा ही हुआ था।

उन्होंने अपनी शिकायत में कहा है कि वह कभी इन मामलों का खुलासा करने के बारे में सोच भी नहीं सकती थीं लेकिन चेयरमैन के तिकड़मबाजी और शातिराना रवैये के चलते उन्हें ऐसा करना पड़ा। इसके साथ ही त्यागी ने इस बात को भी कहा है कि जो अफसर उनके दबाव में नहीं आते हैं उनके खिलाफ मोडी फर्जी मामले गढ़ने से भी बाज नहीं आते।

त्यागी ने बताया कि एक बार मोदी ने उन्हें अपने नार्थ ब्लॉक स्थित दफ्तर में बातचीत के लिए रात में 8.45-9.00 बजे के आस-पास बुलाया। लेकिन उन्होंने इस निवेदन को खारिज कर दिया।

उन्होंने बताया कि 34 सालों से काम करते हुए उन्हें विभाग में इस तरह के गैर जरूरी समयों में बुलायी गयी आमने-सामने की बैठकों में गलत मंशा से प्रेरित प्रवृत्तियों का अनुभव था। खास कर ऐसी बैठकें जिन्हें किसी दूसरे समय भी रखा जा सकता है। त्यागी ने एक दौर में अपने परिवार से जुड़े कुछ मामलों में की गयी जांचों का भी हवाला दिया है जिसमें ईडी से लेकर सीबीआई तक सभी ने क्लीन चिट दे रखी है।

This post was last modified on October 5, 2019 12:03 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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