Saturday, October 16, 2021

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आंदोलन में तोड़-फोड़ की हर तरकीब नाकाम, उपवास के साथ किसानों ने लिया नया संकल्प

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मोदी सरकार के तीन नये कृषि कानून और प्रस्तावित बिजली बिल के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज 19वां दिन है और आज देश भर के तमाम किसान संगठनों के नेता और लाखों किसान सुबह 8 बजे से शाम पांच बजे तक एक दिन के उपवास पर बैठे हैं। ठीक इसी बीच एआईकेएससीसी के राष्ट्रीय वर्किंग ग्रुप ने बुलेटिन जारी कर समिति से संयोजक पद को समाप्त करने की घोषणा कर दी।

एआईकेएससीसी के राष्ट्रीय वर्किंग ग्रुप ने संयोजक पद को समाप्त करने का निर्णय लिया है। यह कदम सरदार वीएम सिंह के उस बयान के बाद लिया गया है जहां उन्होंने एकतरफ़ा एमएसपी की गारंटी देने पर सरकार से आगे की बातचीत वाली बात कही थी। एआईकेएससीसी ने 13 को बयान जारी कर पहले वीएम सिंह के बयान से किनारा करते हुए उसे उनका निजी और एक तरफ़ा बयान कहा था और आज  एआईकेएससीसी ने बयान जारी कर कहा है कि, राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने बैठक की और संयोजक के पद को रद्द करने का निर्णय लिया। अब से एआईकेएससीसी के सभी निर्णय वर्किंग ग्रुप द्वारा लिये जाएंगे, वही उसका अधिकारिक पक्ष होगा और उसी रूप में वे घोषित किये जाएंगे।

दरअसल दो दिन पहले सरदार वीएम सिंह ने मीडिया से एक अनाधिकृत बातचीत में कहा था कि, सरकार लिखित में एमएसपी गारंटी दे तो आगे बातचीत होगी। यह बयान एआईकेएससीसी और इस आंदोलन के लिए कोर कमेटी की तीन कृषि कानूनों के रद्द करने की मांग के विपरीत है। सरदार वीएम सिंह के बयान से एआईकेएससीसी ने खुद को अलग करते हुए कहा था कि, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति का राष्ट्रीय कार्य समूह वीएम सिंह के मीडिया में दिए गए एक बयान से खुद को अलग करता है। बयान न तो एआईकेएससीसी द्वारा अधिकृत था और न ही इसने वर्किंग ग्रुप के निर्णय लेने के प्रोटोकॉल का पालन किया था। एआइकेएससीसी के वर्किंग ग्रुप ने अपनी बात दोहराई कि वह किसानों की मांग के साथ है और वह न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी चाहता है। आज एआईकेएससीसी ने बयान जारी कर संयोजक पद को ही रद्द कर दिया।

इस बीच भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि सरकार लगातार एमएसपी पर गुमराह कर रही है, चढूनी ने कहा कि 8 दिसंबर की बैठक में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि, सरकार एमएसपी पर सभी 23 फसलों को नहीं खरीद सकती, इसकी कीमत 17 लाख करोड़ है।

  इस बीच खबर है कि उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु , केरल, तेलंगाना , बिहार और हरियाणा के दस किसान संगठन (अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति से सम्बद्ध) केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर से मिलकर तीन नये कृषि कानूनों का समर्थन किया है। हालांकि इसे प्रायोजित कार्यक्रम माना जा रहा है।

गौरतलब है कि रविवार को भी उत्तराखंड के कुछ किसानों ने कृषि मंत्री से मुलाकात कर सरकार के तीनों नये कृषि कानून का समर्थन किया था ऐसा सरकार ने दावा किया है।

गौरतलब है कि किसान संगठन लगातार यह बात कहते रहे हैं कि सरकार किसानों में फूट डालना चाहती है और लगातर इस कोशिश में लगी हुई है।

सवाल यह है कि जब सभी किसान संगठन एक साथ इन कानूनों के खिलाफ बीते करीब तीन सप्ताह से इस ठण्ड और सरकारी दमन सह कर आंदोलनरत हैं फिर ये अचानक नये-नये किसान संगठन सरकार के समर्थन में कहां से निकल कर आ रहे हैं?

किसानों के समर्थन में अब जवान भी आ गए हैं। सैकड़ों रिटायर्ड फौजियों ने अपने तमाम मेडल वापस लौटाने की घोषणा कर दी है।

इस बीच सरकार द्वारा केन्द्रीय कृषि कानूनों के समर्थन के तमाम दावों को ख़ारिज करते हुए किसान आज सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

किसानों ने आज सुबह ही गाजीपुर बॉर्डर से नेशनल हाईवे 24 को ब्लॉक कर दिया था। इस मौके पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि हम आम लोगों को परेशान नहीं करना चाहते सिर्फ उनको यह महसूस कराना चाहते हैं कि जीवन का कुछ क्षण भी कितना महत्वपूर्ण होता है।

कृषि कानूनों के​ खिलाफ भारतीय किसान यूनियन ने बुलंदशहर में कलेक्टर ऑफिस ​के बाहर आज विरोध प्रदर्शन किया। वहीं किसानों द्वारा आज एकदिन के उपवास के समर्थन में देशभर में आम लोग और अन्य जनवादी संगठन भी उपवास पर हैं और आम आदमी पार्टी ने भी किसानों के समर्थन में कल ही सार्वजानिक तौर पर उपवास पर बैठने की घोषणा की थी।

केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने एक बार फिर किसानों से आन्दोलन खत्म करने की अपील करते हुए कहा कि सरकार के साथ बैठकर इन कानूनों में कुछ जोड़ घटा पर बात करें और कानून रद्द करने की जिद्द छोड़ दें।

(पत्रकार नित्यानंद गायेन की रिपोर्ट।)

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