Friday, January 21, 2022

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बीजेपी शासित कई राज्यों में चर्चों पर हमले, हरियाणा में एक सदी पुरानी जीसस की मूर्ति तोड़ी

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भारत के संविधान का अनुच्छेद 25-28 धार्मिक स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता देता है लेकिन इस समय देश में संविधान का शासन नहीं बल्कि फासीवादी आरएसएस के पोलिटिकल विंग भाजपा का शासन है जिसकी बागडोर मोदी-शाह के हाथों में है। जो लगातार अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक अधिकारों और जीवन पर सिलसिलेवार हमले कर और करवा रहे हैं।

17-19 दिसंबर को हरिद्वार में मुस्लिम समुदाय के सामूहिक जनसंहार की अपील वाले ‘हेट कॉन्क्लेव’ के बाद क्रिसमस के मौके पर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, असम समेत तमाम भाजपा शासित राज्यों में भगवा आतंकियों ने चर्चों में घुसकर मूर्तियां तोड़ीं और प्रार्थनाओं में शामिल होकर जय श्री राम के आतंकी नारे लगाये।

हरियाणा गुरुग्राम में यीशु की मूर्ति तोड़ी गई

लारेंस रोड स्थित प्राचीन कैथोलिक चर्च परिसर में लगी यीशु मसीह की क़रीब 70 साल पुरानी मूर्ति तोड़े जाने से इलाके में स्थिति तनावपूर्ण है।

हरियाणा पुलिस ने चर्च के फादर पतरस मुंडू की शिक़ायत पर मामला दर्ज़ कर लिया है। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में दो युवकों के मूर्ति तोड़ने की घटना में शामिल होने का पता चला है। इसके अलावा इनके साथ और कितने लोग थे, इसका सुराग अभी नहीं लगा है।

रविवार को प्रार्थना के लिए पहुंचे थे काफी लोग

हर सप्ताह रविवार को चर्च में विशेष प्रार्थना होती है। घटना के बाद रविवार सुबह श्रद्धालु चर्च पहुंचे। यहां यीशु मसीह की मूर्ति टूटी हुई मिली।

थाना प्रभारी नरेश कुमार के मुताबिक इस घटना की सूचना मिलते ही उन्होंने जांच पड़ताल शुरू कर दी थी। पुलिस ने सीसीटीवी में कैद फुटेज को अपने कब्जे में लेकर इस घटना में शामिल दोषियों की तलाश शुरू कर दी है।

अलीगढ़ में सांता क्लाज का पुतला जला दिया

उत्तर प्रदेश के आगरा में अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सेंट जॉन्स कॉलेज के बाहर एमजी रोड और शहर के विभिन्न स्कूलों के बाहर सांता क्लॉज के पुतले जलाये। राष्ट्रीय बजरंग दल के क्षेत्रीय महासचिव अज्जू चौहान ने आरोप लगाया, “दिसंबर आते ही ईसाई मिशनरी क्रिसमस, सांता क्लॉज और नए साल के नाम पर सक्रिय हो जाते हैं और वे बच्चों को सांता क्लॉज से उपहार बांटकर ईसाई धर्म की ओर आकर्षित करवाते हैं। गौरतलब है कि सेंट निकोलस’ को सेंटा क्लॉज और ‘फादर क्रिसमस’ कहा जाता है।

गुरुग्राम को पटौदी में एक स्कूल में चल रहे क्रिसमस आयोजन में घुस कर जय श्री राम के नारे लगे

हरियाणा के शहर गुरुग्राम में धार्मिक विद्वेष फैलाने का एक और मामला सामने आया है। गुरुग्राम के पटौदी टाउन के नरहेरा गांव के एक स्कूल में य़ह घटना घटी है, जहां क्रिसमस कार्निवाल के दौरान एक स्कूल में जय श्री राम के नारे लगाए गए।

यमुना नगर में क्रिसमस के मौके पर भगवा आतंकियों ने विरोध किया

यमुनानगर, थाना छप्पर के गांव मुसिंबल में क्रिसमस पर्व पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान भगवा संगठनों ने जमकर उत्पात मचाया। क्रिसमस प्रेयर रोककर भगवा कार्यकर्ताओं ने वहां गीता पढ़ा व गायत्री मंत्र का जाप किया।

चर्च के पादरी ने बयान दिया है कि वे क्रिसमस पर प्रभु यीशु की प्रार्थना कर रहे थे। तभी हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने उनके कार्यक्रम में बाधा पहुंचाई और उन्हें प्रार्थना करने से रोका। सूचना पर छप्पर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया।

जानकारी के अनुसार शनिवार को थाना छप्पर के गांव मुसिंबल में खेतों के बीच टेंट लगाकर क्रिसमस दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन चल रहा था। तभी कुछ ग्रामीणों ने इसकी सूचना हिंदू संगठनों को दी, जिसके बाद विश्व हिंदू परिषद, जय भवानी सेना व अन्य संगठनों के कार्यकर्ता कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्रिसमस दिवस कार्यक्रम की आड़ में धर्म परिवर्तन करने की तैयारी चल रही है। इसके बाद उन्होंने कार्यक्रम को रुकवा दिया।

अम्बाला में ऐतिहासिक गिरजाघर में ईसा मसीह की प्रतिमा तोड़ी गई

हरियाणा के अंबाला में रविवार को ईसा मसीह की मूर्ति को तोड़ दिया गया। ये मूर्ति ब्रिटिश काल में बने होली रिडीमर चर्च के प्रवेश द्वार पर लगी थी। चर्च के पादरी फादर पैट्रस मुंडु के मुताबिक “ये चर्च सदियों पुराना है और इसका ऐतिहासिक महत्व है। इसकी स्थापना 1840 के दशक में हुई थी। लेकिन यहां पहले कभी ऐसी घटना नहीं हुई”।

ऐसी जानकारी सामने आई है कि यहां दो लोगों ने प्रवेश कर मूर्ति को तोड़ा है। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, दो संदिग्ध व्यक्ति रात के 12 बजकर 30 मिनट पर यहां प्रवेश करते देखे गए हैं।

पादरी पैट्रस मुंडु ने मीडिया बयान में बताया है कि “हमने रात 9.30 बजे तक क्रिसमस की प्रेयर पूरी कर ली थी और फिर कोविड प्रतिबंधों के कारण चर्च को समय पर बंद कर दिया गया। रात 10.30 बजे तक इलाका लगभग खाली था और मुख्य द्वार को बंद कर दिया गया था। मामले की शिक़ायत दर्ज़ करने वाले फादर मुंडु ने कहा, ‘आरोपियों में से एक लाइट (लड़ियां) हटा रहा था, तो दूसरा फोन पर रिकॉर्डिंग कर रहा था। वह फोन पर किसी से बात कर रहे थे, जो इन्हें निर्देश दे रहा था। एक संदिग्ध का चेहरा साफ नज़र आ रहा है और पुलिस के लिए उसे ढूंढना मुश्किल नहीं होना चाहिए”।

असम में बजरंग दल ने नहीं मनाने दिया क्रिसमस

असम के सिल्चर में शनिवार को क्रिसमस समारोह में अचानक पहुंचकर बजरंगदल के आतंकियों ने जमकर उपद्रव किया। उन्होंने खुद को बजरंग दल का सदस्य होने का दावा करते हुये समारोह को बंद करवा दिया और कहा कि इसमें हिंदू भाग नहीं ले सकते। बजरंगी आतंकियों का कहना था कि क्रिसमस मनाने वाले ईसाइयों के साथ उनकी कोई समस्या नहीं थी, लेकिन वह हिंदुओं को ऐसा नहीं करने देंगे, क्योंकि 25 दिसंबर को ‘तुलसी दिवस’ भी था।

कार्यक्रम में पहुंचे एक भगवा टोपीधारी ने एक ऑनलाइन वीडियो में कहा है कि हम क्रिसमस के ख़िलाफ़ नहीं हैं… क्रिसमस केवल ईसाई मनाएं। हम क्रिसमस समारोह में भाग लेने वाले हिंदू लड़कों और लड़कियों के ख़िलाफ़ हैं। आज हिंदुओं का तुलसी दिवस था, लेकिन किसी ने नहीं मनाया। यह हमारी भावनाओं को आहत करता है … हर कोई कह रहा है मेरी क्रिसमस। हमारा धर्म कैसे बचेगा?”

बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब सिलचर में क्रिसमस के दौरान हंगामा हुआ हो। पिछले साल भी काफी विवाद देखने को मिला था।

कर्नाटक में चिक्कबल्लापुर में सेंट एंथोनी की स्टैच्यू तोड़ी

क्रिसमस से दो दिन पहले 23 दिसंबर को दक्षिणी कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले में एक चर्च में तोड़फोड़ की गई। घटना 160 साल पुराने सेंट जोसेफ चर्च में हुई जहां सेंट एंथोनी की स्टैच्यू तोड़ दी गई। चर्च के पुजारी फादर जोसेफ एंथोनी डैनियल ने मीडिया को बताया कि राज्य की राजधानी बेंगलुरु से लगभग 65 किलोमीटर दूर सुसैपल्या में चर्च घटना को अंजाम दिया गया। चर्च में एक व्यक्ति को सुबह 5.40 बजे घटना के बारे में पता चला। इस घटना के बाद फादर जोसेफ ने पुलिस में शिक़ायत दर्ज़ कराई ।

इससे पहले अभी हाल ही में कर्नाटक के दक्षिण में मंगलौर के पास सेंट जोसेफ़ चर्च में तोड़फोड़ की खबर सामने आई थी।

कुछ ही दिनों पहले दक्षिणपंथी ग्रुप के लोगों ने कोलार में ईसाइयों की धार्मिक पुस्तकों में आग लगा दी थी, जिस पर काफी हंगामा हुआ था।

स्कूल में नहीं मनाने दी क्रिसमस

कर्नाटक के मांड्या जिले में स्थित एक शैक्षणिक संस्थान ने हिंदू जागरण वेदिके नामक संगठन के एक कार्यकर्ता के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज़ कराई है। पांडवपुरा इलाके के इस शैक्षणिक संस्थान ने स्थानीय पुलिस को बताया कि कार्यकर्ता ने क्रिसमस सेलिब्रेशन को रोकने के लिए स्कूल परिसर में कथित रूप से घुसने की कोशिश की और क्रिश्चियन फेस्टिवल सेलिब्रेट करने को लेकर सवाल उठाया।

पुलिस अधिकारियों ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि निर्मला शिक्षा संस्थान ने हिंदू जागरण वेदिके के कार्यकर्ता के ख़िलाफ़ स्कूल में प्रवेश करने और क्रिसमस के जश्न में खलल डालने के लिए शिकायत दर्ज़ कराई है। संस्थान ने यह भी आरोप लगाया है कि कार्यकर्ता ने स्कूल प्रशासन को परिसर में क्रिश्चियन फेस्टिवल नहीं मनाने की चेतावनी भी दी है। अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच के बाद यह पाया गया कि हिंदू जागरण वेदिके के एक कार्यकर्ता ने कुछ बच्चों के माता-पिता के साथ स्कूल में जबरन प्रवेश की कोशिश की और स्कूल प्रशासन से सवाल किया कि क्रिश्चियन फेस्टिवल (क्रिसमस) मनाने के लिए हर एक छात्र से 50 रुपये क्यों इकट्ठे किए गए थे। इस घटना के बाद पुलिस ने विवाद में शामिल पक्षों के बयान दर्ज कर लिए। इस मामले में आगे की जांच की जा रही है।

इस घटना से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर पर वायरल हुआ जिसमें भगवा गुंडों ने स्कूल के अधिकारियों से सवाल भी किया कि गणेश उत्सव जैसे हिंदू त्योहार क्यों नहीं मनाए जा रहे और सिर्फ़ क्रिश्चियन फेस्टिवल क्यों सेलिब्रेट हो रहे हैं। वीडियो में एक शख्स को यह कहते हुए सुना जा सकता है, ‘हम यह निर्णय आप पर (बच्चों के माता-पिता) छोड़ रहे हैं। अगर हम इसे अपने हाथों में लेंगे तो स्थिति अलग होगी।

वहीं स्कूल की प्रधानाध्यापिका कनिका फ्रांसिस मैरी ने एक चैनल को बताया कि संस्था में हर साल क्रिसमस मनाया जाता है, लेकिन चल रहे कोरोना वायरस महामारी की वजह से स्कूल के अधिकारियों ने उत्सव को बंद करने का फैसला लिया था। हालांकि, छात्रों ने स्कूल से एक छोटे सेलिब्रेशन की इजाजत देने की गुहार लगाई थी। इतना ही नहीं, क्रिसमस सेलिब्रेशन के लिए, बच्चों ने केक ख़रीदने के लिए भी खुद ही पैसे जमा किए थे।

चिदंबरम ने मोदी की चुप्पी पर उठाए सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने हरियाणा और असम में क्रिसमस के कार्यक्रमों में उपद्रवियों द्वारा बाधा डालने को लेकर रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल खड़े किए हैं। पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि जिस दिन प्रधानमंत्री ने लोगों से ईसा मसीह की शिक्षाओं को याद करने का आह्वान किया, उसी दिन उपद्रवियों ने हरियाणा के एक निजी स्कूल में क्रिसमस कार्यक्रम को बाधित करने का प्रयास किया।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा कि प्रधानमंत्री को उपदेश देने के बजाय भाजपा सरकारों को इन घटनाओं में शामिल लोगों की पहचान करने और उन्हें कानून के कटघरे में लाने का निर्देश देना चाहिए।

चिदंबरम ने कहा, कौन हैं ये उपद्रवी? रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने जय श्री राम और भारत माता की जय के नारे लगाए। अगले दिन असम में एक चर्च में प्रार्थना बाधित की गई।

उन्होंने कहा, उपदेश देने के बजाय, प्रधानमंत्री को हरियाणा और असम की भाजपा सरकारों को उपद्रवियों की पहचान करने और उन्हें कानून के कटघरे में लाने का निर्देश देना चाहिए। चिदंबरम ने कहा कि प्रधानमंत्री को हिंदुत्व ब्रिगेड को ईसा मसीह की शिक्षाओं को पढ़ने का उपदेश देना चाहिए।

अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट 2021 में भारत

कंट्रीज़ ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न’

अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की वर्ष 2021 की वार्षिक रिपोर्ट में भारत को लगातार दूसरे वर्ष भी धार्मिक स्वतंत्रता का सर्वाधिक उल्लंघन करने के लिये ‘कंट्रीज़ ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न’ (प्रमुख चिंता वाले देशों) की श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है।

गौरतलब है कि USCIRF ‘अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम’ (IRFA)- 1998 के तहत स्थापित एक स्वतंत्र, द्विदलीय अमेरिकी संघीय आयोग है। USCIRF अंतर्राष्ट्रीय मानकों के आधार पर वैश्विक स्तर पर धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन की निगरानी करता है।

इस रिपोर्ट में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (CAA) को धार्मिक आधार पर भेदभाव पूर्ण माना गया।

इस रिपोर्ट में फरवरी 2020 में दिल्ली दंगों के दौरान धार्मिक बहुसंख्यक आबादी द्वारा धार्मिक अल्पसंख्यकों पर किये गए हमलों का भी उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में कुछ विशिष्ट लोगों को शामिल न किये जाने के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं, जो कि असम में बनाए जा रहे निरोध शिविरों से स्पष्ट है।

रिपोर्ट में धर्मांतरण विरोधी कानून का उल्लेख करते हुए कहा गया कि धार्मिक स्वतंत्रता की संवैधानिक सुरक्षा के बावजूद, भारत के 28 राज्यों में से लगभग एक-तिहाई राज्यों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों के कथित वर्चस्व से धार्मिक बहुसंख्यकों की रक्षा के लिये धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किये हैं, जो कि देश में धार्मिक स्वतंत्रता पर ख़तरा उत्पन्न करते हैं।

USCIRF रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों के विरुद्ध दुष्प्रचार और हिंसा में बढ़ोत्तरी का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सोशल मीडिया और अन्य प्रकार के संचार माध्यमों का उपयोग मुस्लिमों, ईसाइयों और दलितों समेत विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के विरुद्ध नफ़रत और दुष्प्रचार फैलाने के लिये किया जा रहा है।

गोहत्या जैसे विषय अभी भी नीति-निर्माण के केंद्र में बने हुए हैं, उदाहरण के लिये दिसंबर माह में कर्नाटक ने मवेशियों के वध के लिये उनकी बिक्री और ख़रीद तथा उनके परिवहन पर जुर्माने और कारावास की सज़ा देने हेतु एक पूर्ववर्ती विधेयक में संशोधन किया था।

भारत में धार्मिक स्वतंत्रता मौलिक अधिकार

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25-28 में धार्मिक स्वतंत्रता को एक मौलिक अधिकार के रूप में उल्लेख किया गया है।

अनुच्छेद 25 अंतःकरण की स्वतंत्रता एवं धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और9प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है।

अनुच्छेद 26 धार्मिक कार्यों के प्रबंधन की स्वतंत्रता देता है।

अनुच्छेद 27  किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि हेतु करों के संदाय को लेकर स्वतंत्रता देता है।

अनुच्छेद 28 कुछ विशिष्ट शैक्षिक संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थित होने को लेकर स्वतंत्रता देता है।

इसके अलावा संविधान के अनुच्छेद 29-30 में अल्पसंख्यकों के हितों की सुरक्षा से संबंधित प्रावधान हैं।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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