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कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं ने उद्धव ठाकरे से की भीमा कोरेगांव के मुकदमों को वापस लेने की मांग

नई दिल्ली। कांग्रेस और एनसीपी के कुछ नेताओं ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नितिन राउत ने कहा कि “हम लोगों का मानना है कि भीमा कोरेगांव मामले में दलितों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लिया जाना चाहिए। हम लोगों ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से इस बात को सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि सभी मुकदमे वापस हो जाएं।” उन्होंने कहा कि “निर्दोष लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस होने चाहिए…..उनमें ज्यादातर छात्र हैं….हमने इसका पूरा विवरण मांगा है।”

एनसीपी नेता धनंजय मुंडे ने कहा कि “ढेर सारे बुद्धिजीवियों, विचारकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं और निर्दोष नागरिकों को नक्सल के तौर पर चिन्हित किया गया है। इन सभी के खिलाफ भीमा कोरेगांव दंगे में मुकदमे दर्ज किए गए थे। यह मेरा निवेदन है कि उनके खिलाफ मुकदमों को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।”

इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक मुंडे ने कहा कि “ऐसे लोग जिन्होंने सरकार के खिलाफ आवाज उठायी उनको जानबूझकर निशाना बनाया गया। बीजेपी सरकार द्वारा प्रताड़ित किए गए ऐसे लोगों को न्याय मिले इसको सुनिश्चित किया जाना चाहिए।”

हालांकि राउत ने भीमा कोरेगांव और एलगार परिषद के केसों में भिन्नता बतायी। उन्होंने कहा कि “भीमा कोरेगांव में हमारे लोगों ने आंदोलन किया था। वहां ढेर सारे लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं…ये वो लोग थे जिन्होंने गलियों में आंदोलन किया था। मेरा मानना है कि इन मुकदमों को वापस किया जाना चाहिए। क्योंकि वो निर्दोष लोग थे।”

राउत ने कहा कि “एलगार परिषद बिल्कुल अलग थी। एलगार का भीमा कोरेगांव से कुछ लेना-देना नहीं है….मैं एलगार परिषद के मुकदमों को वापस लेने की मांग नहीं कर रहा हूं। मैं उनके बारे में बहुत नहीं जानता हूं। मैं उन मुकदमों को वापस लेने की मांग कर रहा हूं जिन्हें सूबे के विभिन्न हिस्सों में बवाल होने के बाद दलित पुरुषों और महिलाओं के खिलाफ दर्ज किया गया है।”

एनसीपी के नेता प्रकाश गजभिये ने भी भीमा कोरेगांव के मुकदमे को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि “भीमा कोरेगांव दंगों में पिछली सरकार ने दलित पुरुषों और महिलाओं के खिलाफ गंभीर मुकदमे दर्ज किए थे। उसी तरह से इंदु मिल आंदोलन के दौरान भी मुकदमे दर्ज किए गए थे। हमने मुख्यमंत्री से निवेदन किया है कि इन मुकदमों को वापस लिया जाना चाहिए और दलित समुदाय के साथ न्याय किया जाना चाहिए।”

इसके पहले एनसीपी विधायक जितेंद्र आह्वाद ने ट्वीट कर कहा था कि “आरे आंदोलनकारियों के खिलाफ मुकदमों को वापस ले लिया गया है। और अब जो भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार किए गए हैं…उन्हें भी छोड़ दिया जाना चाहिए।”

संवाददाताओं से बात करते हुए ठाकरे ने कहा कि “पिछली सरकार ने भीमा कोरेगांव से जुड़े ऐसे मुकदमों को वापस लेने के आदेश दिए थे जो गंभीर नहीं थे। पिछले आदेश के मुताबिक मुकदमों को वापस लिया गया है या नहीं इसकी समीक्षा के लिए हमने निर्देश दे दिए हैं।”

भीमा कोरेगांव की 200वीं बरसी के मौके पर 1 जनवरी, 2018 को दलित समेत ढेर सारे लोगों ने मार्च किया था जिसमें पुणे और मुंबई में हिंसा फूट पड़ी थी और उसमें ढेर सारे लोग घायल हो गए थे।

उसके ठीक एक दिन पहले 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में एलगार परिषद नाम का एक आयोजन हुआ था। पुलिस का दावा है कि एलगार परिषद की बैठक में हुए भाषण भीमा कोरेगांव की हिंसा को भड़काने के लिए जिम्मेदार हैं। ढेर सारे कार्यकर्ताओं को एलगार परिषद केस में यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया है।

इसी बीच, मुंडे ने उन मराठा युवकों के खिलाफ लगे मुकदमों को भी वापस लेने की मांग की है जिन्होंने आरक्षण आंदोलन में हिस्सा लिया था।

This post was last modified on December 4, 2019 9:24 am

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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