EXCLUSIVE: सुरंग को बचाने की चिन्ता में हुई मजदूरों को निकालने में देरी?

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उत्तरकाशी। 41 मजदूरों के उत्तरकाशी की सुरंग में फंसने के बाद से बेशक बचाव कार्य तीव्र गति से चलाये जाने के हर रोज दावे किये जा रहे हों, लेकिन वास्तव में ग्राउंड पर इस तरह की तेजी नहीं दिखी। हालात ये हैं कि मलबे को ड्रिल करके मजदूरों तक पहुंचने के लिए मंगवाई गई ऑगर ड्रिंलिंग मशीन 4 दिन तक बंद पड़ी थी। 11 नवंबर को वो मशीन फिर से शुरू की गई।

ताजा सूचना के अनुसार अब तक 39 मीटर पाइप अंदर पहुंचाई जा चुकी है और मजदूर 62 मीटर पर हैं। यानी 23 मीटर पाइप अभी और ड्रिल करके अंदर पहुंचानी बाकी है। कहा जा रहा है कि मशीन में अब कोई खराबी नहीं आई और मशीन के रास्ते में कोई बड़ी बाधा नहीं आई तो 22 नवंबर की शाम या रात तक मजदूरों को बाहर निकाला जा सकता है।

मजदूरों के सुरंग में फंसने के 11वें दिन 21 नवंबर को ‘जनचौक’ मौके पर पहुंचा। सुरंग से करीब 200 मीटर दूर बैरिकेड लगाया गया है। यहां फोर्स तैनात की गई है। बचाव कार्य में जुटे अधिकारियों, मजदूरों और बचाव से संबंधित अन्य लोगों के अलावा किसी को भी यहां से आगे जाने की अनुमति नहीं है।

एक व्यक्ति को जयश्री राम लिखा पीले रंग का झंडा और पूजा-सामग्री के साथ बैरिकेड से अंदर जाते देखा गया। बताया गया कि सुरंग के मुहाने पर बौख नाग देवता का मंदिर था, जो तोड़ दिया गया है। अब वहां पर अस्थाई मंदिर बनाकर पूजा की जा रही है, इसी के लिए यह पूजा सामग्री ले जाई जा रही है।

सुरंग के ठीक नीचे एक प्राकृतिक जलधारा बह रही है। मलबे से पूरी तरह पाट दी गई इस जलधारा के दूसरी तरफ की पहाड़ी पर, यानी सुरंग के मुहाने के ठीक सामने एक टेंट लगा है। यह टेंट पिछले दिनों यहां आये केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी के लिए लगाया गया था, लेकिन अब यहां प्रेस गैलरी का बोर्ड लगा दिया गया है। कुछ कुर्सियां लगी हुई हैं, जिन पर बड़े-बड़े कैमरे लिए पत्रकार और कैमरामैन बैठे हैं। सामने की तरफ दर्जनों की संख्या में ट्राइपॉड हैं और उनमें भी कैमरे लगे हैं।

प्रेस गैलरी से सुरंग के मुहाने को अच्छी तरह देखा जा सकता है। कैमरा जूम करके सुरंग के भीतर कुछ मीटर दूर तक देखा जा सकता है। जहां कुछ सुरक्षाकर्मी दिखाई दे रहे हैं और वेल्डिंग की चिनगारियां निकल रही हैं। सुरंग के बाहर से क्रेन से एक पाइप सुरंग में पहुंचाया जा रहा है। इससे आगे सिर्फ हम अंदाजा ही लगा सकते हैं।

इस समय सुरंग के अन्दर बचाव के क्या प्रयास हो रहे हैं, इस बारे में बाहर खड़े पत्रकारों को कोई जानकारी नहीं है। सरकारी विभागों के कुछ अधिकारी भी बाहर मौजूद हैं, लेकिन वे सिर्फ इतना कहकर पूछने वालों को टाल देते हैं कि काम शुरू हो गया है। अब जल्दी मजदूरों को निकाल दिया जाएगा।

लगातार प्रयास के बाद इतनी सूचना मिल पाई है कि जो ऑगर ड्रिलिंग मशीन चार दिन से बंद पड़ी थी अब चालू कर दी गई है। यह भी पता चला कि चार दिन पहले 22 मीटर तक 900 मिमी व्यास वाले लोहे के पाइप मलबे में डाले गये थे, लेकिन अब आगे 800 मिमी के पाइप डाले जा रहे हैं।

हमें बताया गया कि अंदर फंसे लोगों में से ज्यादातर का कोई न कोई परिजन यहां आया हुआ है। लेकिन, सुरंग के आस-पास ऐसा कोई व्यक्ति नजर नहीं आ रहा है। पता चला कि प्रशासन ने उन्हें अलग-अलग जगहों पर ठहराया है और उन्हें लगातार सूचनाएं देने का आश्वासन देकर सुरंग के पास न आने की हिदायत दी है।

कुछ कैमरामैन एक युवक को घेरे हुए नजर आये। पता चला कि वह सुरंग में फंसे हुए एक मजदूर का भाई है। वह मीडियाकर्मियों को अपना नाम बताने के लिए तैयार नहीं है। सिर्फ यही रट लगा रहा है कि काम संतोषजनक तरीके से चल रहा है। सब लोग प्रयास में लगे हुए हैं। उनका भाई और अन्य लोग जल्दी बाहर आ जाएंगे। सरकार और प्रशासन का भी पहले दिन से ही यही स्टैंड है। ऐसे में यह पता लगाना कठिन है कि वह व्यक्ति वास्तव में किसी फंसे हुए मजदूर का भाई है या प्रशासन की ओर से प्लांट किया गया कोई व्यक्ति।

स्थानीय महिलाओं की एक टोली नजर आती है। इनमें एक पास के किसी गांव की ग्राम प्रधान हैं। पूछने पर ये महिलाएं कहती हैं कि बौखनाग देवता सब ठीक करेगा। सब लोग ठीक-ठाक बाहर आएंगे। सब लोग पूरी कोशिश कर रहे हैं। क्या आप लोग बचाव कार्यों से संतुष्ट हैं, इस सवाल के जवाब में महिलाएं कहती हैं- ‘पहले दिन से लगातार काम हो रहा है, अब तो अंदर फंसे लोगों का वीडियो भी आ गया है, सब ठीक हैं। जल्दी ही बाहर निकाल लिये जाएंगे’।

दरअसल दो दिन पहले यानी 20 नवंबर को बचाव दल 6 इंच का एक पाइप सुरंग के अंदर तक पहुंचाने में सफल रहा है। इससे पहले एक पतले पाइप से ही फंसे हुए लोगों से बात हो पा रही थी। 6 इंच के पाइप के पहुंचने के बाद मजदूरों को पहले से ज्यादा खाना और अन्य जरूरत की चीजें दी जा रही हैं। इसी पाइप से एक कैमरा भी कुछ देर के लिए अंदर भेजा गया था, जिस पर अंदर फंसे मजदूरों की एक झलक नजर आई है।

हमें यहां ऐसे पत्रकार मिले जिनका कहना था कि ‘पहले दिन से ही गंभीर प्रयास किये जाते तो मजदूर बहुत पहले निकाल लिये जाते। लेकिन, शुरू में ज्यादा ध्यान इस बात पर रहा कि सुरंग को कम से कम नुकसान पहुंचाया जाए’। इन पत्रकारों का कहना था कि ‘अपने चैनल या अखबार में उन्हें ये सब कहने की इजाजत नहीं है’। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मीडिया वहां होने के बावजूद भी क्या कर रहा है।

राज्य के सूचना महानिदेशक लगातार पत्रकारों के बीच नजर आये। हालांकि सूचना के नाम पर शाम को कंपनी के अधिकारियों की कुछ मिनट की ब्रीफिंग के अलावा अन्य कोई आधिकारिक जानकारी मीडिया को नहीं दी जा रही है। पत्रकारों ने यह भी बताया कि इस प्रेस ब्रीफिंग में डीएम को एक किनारे पर बिठाया जाता है। ब्रीफिंग कंपनी के अधिकारियों की तरफ से की जाती है।

इस सुरंग हादसे पर अंधविश्वास की छौंक भी जमकर लगा दी गयी है। स्थानीय लोग ही नहीं, कई पत्रकार तक इस अंधविश्वास को बढ़ावा लेने में योगदान दे रहे हैं। जिस पहाड़ को चीरकर 4.50 मीटर लंबी और 14 मीटर चौड़ी सुरंग बनाई जा रही है, उसे स्थानीय लोग राड़ी का डांडा कहते हैं। गंगोत्री से यमुनोत्री की तरफ जाते हुए सिलक्यारा गांव से राड़ी का डांडा शुरू होता है। यहां से लगातार 12 किमी चढ़ाई चढ़ते हुए राड़ी टॉप पहुंचते हैं।

राड़ी टॉप से सड़क फिर उतार की है और 18 किमी नीचे उतरकर बड़कोट आता है। राड़ी का डांडा वाली सड़क ठंड के दिनों में लंबे समय तक बर्फ से ढकी रहती है। गंगोत्री और यमुनोत्री की इसी दूरी को कम करने और बर्फ से बचने के लिए सिलक्यारा सुरंग बनाई जा रही है।

सुरंग हादसे में अंधविश्वास की छौंक लगाने के लिए जो कहानी गढ़ी गई है उसके हिसाब में राड़ी के डांडे पर ऊपर कहीं बौख नाग का मंदिर है। जहां सुरंग का मुहाना है, वहां पर भी बौख नाग का एक छोटा मंदिर था। सुरंग निर्माण के दौरान इस मंदिर को तोड़ा गया। कहा जा रहा है कि इसीलिए हादसा हुआ। अंधविश्वास की पराकाष्ठा यह है कि सुरंग के मुहाने पर अब एक अस्थाई मंदिर बनाया गया है, जहां लगातार पूजा-अर्चना की जा रही है।

जिन लोगों से ‘जनचौक’ की बातचीत हुई, उसके आधार पर यह बात साफ होती है कि मजदूरों के टनल में फंसने के बाद मुख्य ध्यान इस बात पर रहा कि सुरंग को नुकसान पहुंचाए बिना मजदूरों को रेस्क्यू किया जाए। अब भी कमोबेश यही प्रयास है। हालांकि अब रेस्क्यू अभियान की कमान एक विदेशी वैज्ञानिक अर्नाल्ड डिस्क के हाथ है और उन्होंने जो प्लान तैयार किये हैं, उससे सुरंग को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

सुरंग के बाहर मजदूर अपने साथियों को जल्द से जल्द बाहर निकालने के लिए दो बार प्रदर्शन कर चुके हैं। इसके बाद ज्यादातर मजदूरों को यहां से हटा दिया गया है। सुरंग के चल रहे बचाव अभियान में काम कर रहे कुछ मजदूर यहां नजर आये। लेकिन, कोई भी मजदूर बात करने के लिए तैयार नहीं है।

काफी कुरेदने के बाद गोरखपुर के रहने वाले एक मजदूर ने बताया कि “सुरंग अपने मुहाने से करीब 200 मीटर आगे जाकर दाहिनी तरफ मुड़ जाती है। ऐसे में मुहाने से करीब 300 मीटर दूर से एक छोटी सुरंग बनाई जाती तो सिर्फ 40 मीटर दूर जाकर फंसे हुए मजदूरों को निकाला जा सकता था।” मजदूरों ने यह भी कहा कि “हम देशी जुगाड़ से यह काम कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए मना कर दिया गया, क्योंकि इससे सुरंग में एक जगह छेद करना पड़ता।” हम यहां जानबूझकर मजदूर का नाम नहीं लिख रहे हैं।

घटना के बाद सबसे पहले जेसीबी से मलबा हटाकर रेस्क्यू करने का काम शुरू किया गया था। लेकिन जेसीबी मलबा हटाने लगी तो ऊपर से और मलबा आने लगा। इसके बाद सुरंग में ऊपर से छेद कर रेस्क्यू करने की योजना बनी। लेकिन वर्टिकल ड्रिलिंग मशीन नहीं थी। जो मशीन मिली वह इतनी क्षमता की नहीं थी कि ऊपर से सुरंग को काटा जा सकता।

हालांकि अब नये सिरे से अर्नाल्ड डिक्स ने जो 5 प्लान बनाये हैं, उनमें एक प्लान सुरंग में ऊपर से छेद करना भी शामिल है, लेकिन इस बार बड़ी मशीन से यह काम करने की योजना है। इसके लिए सुरंग के मुहाने से लेकर ऊपर जहां से सुरंग को काटा जाना है, वहां तक मशीन को पहुंचाने के लिए बीआरओ ने सड़क बना दी है। बताया गया था कि मशीन जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंच गई है, लेकिन अब कहां है इस बारे में कोई अपडेट पिछले 24 घंटे से नहीं दिया गया है।

इस वर्टिकल ड्रिलिंग मशीन के पहुंचने तक प्लान एक के तहत की बचाव अभियान चल रहा है। इस अभियान के तहत मलबे में से पाइप को अंदर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। अमेरिकन ऑगर ड्रिलिंग मशीन से यह काम 5 दिन पहले शुरू हुआ था, लेकिन बाद में मशीन में खराबी आ जाने से 4 दिन से काम बंद था। इस मशीन से 900 मिमी व्यास का 22 मीटर पाइप अंदर पहुंचाया गया था।

ताजा अपडेट के अनुसार पिछले 24 घंटे में 17 मीटर पाइप अंदर पहुंचाई जा चुकी है। यानी अब तक कुल 39 मीटर पाइप अंदर पहुंचाई जा चुकी है। शुरू में डाले गये 900 मिमी व्यास के पाइप की जगह अब 800 मिमी व्यास के पाइप डाले जा रहे हैं।

(उत्तरकाशी से त्रिलोचन भट्ट की ग्राउंड रिपोर्ट।)  

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Om प्रकाश
Om प्रकाश
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6 months ago

बहुत सुंदर भट्ट ज़ी 🙏🙏 धन्यवाद