Sunday, June 26, 2022

ग्राउंड रिपोर्ट:‘मध्य गंगा नहर परियोजना’ के रास्ते का रोड़ा बनी सूबे की लालफीताशाही

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अमरोहा। साल 2003 में फसलों की सिंचाई के लिए केन्द्रीय जल आयोग ने 13 परियोजनाओं पर स्वीकृति की मुहर लगाई थी। अंतिम तेहरवीं परियोजना मध्य गंगा नहर परियोजना स्टेज टू के नाम से थी, जिसका निर्माण बिजनौर बैराज से शुरू होकर अमरोहा होते हुए बहजोई व चन्दौसी तक होना था, इस परियोजना का काम वर्ष 2007 में प्रारंभ तो हुआ, लेकिन 14 साल बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। मध्य गंगा नहर बनाने का काम नहर विभाग की 16 डिवीजन कर रही हैं। अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, बिजनौर, हरिद्वार, बुलंदशहर, अलीगढ़, गढ़मुक्तेश्वर में यह डिवीजन स्थापित हैं।

1056 करोड़ रुपये ‘मध्य गंगा नहर फेज टू प्रोजेक्ट’ की लागत 2007-08 में थी। नतीजा यह है कि परियोजना की लागत बढ़ती जा रही है लेकिन किसान फसलों की सिंचाई के लिए अभी भी पानी का ही संकट झेल रहे हैं और जल दोहन करने को विवश हैं। देश की तेरह परियोजनाओं में शुमार मध्य गंगा नहर परियोजना फेस टू का काम 2013 तक पूरा होना था। गौरतलब बात है कि इसकी मांग अमरोहा के किसानों ने ‘नहर बनाओ संघर्ष समिति’ के अध्यक्ष चौधरी शिवराज सिंह के नेतृत्व में उठी थी, किसानों का मानना था कि गंगा नहर परियोजना के आने से उन्हें खेतों की सिंचाई के लिए कुओं पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा लेकिन परियोजना का निर्माण कछुए की चाल से होता रहा। परिणामस्वरूप आज 14 साल बाद भी यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका।

मध्य गंगा नहर परियोजना 2007-2008 में मंजूर हुई। परियोजना में पहले बजट की कमी रही लेकिन अधिग्रहण की प्रक्रिया धीमी चलती रही इसीलिए लागत बढ़ी और परियोजना का बजट पुनरीक्षित होता गया। मुरादाबाद मंडल के चार जनपदों के साथ बुलंदशहर और बदायूं के किसानों को लाभ देने के लिए मध्य गंगा नहर 2007-08 में 1060.76 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना बनाई गई। साल 2016 में पुनरीक्षित बजट बढ़कर 4417 करोड़ पहुंच गया। साथ ही दिसंबर 2019 तक काम पूरा करने का लक्ष्य दिया गया लेकिन काम की रफ्तार ऐसी नहीं है कि निर्धारित समय में काम पूरा हो सके। इस बीच किसान सिंचाई के लिए तरस रहे हैं। अब लागत बढ़कर 4700 करोड़ हो गई है। परियोजना में 2008 से 2013 तक काम हुआ लेकिन 2013 से 2017 तक बेहद धीमी गति से काम हुआ। 2018 में काम शुरू करने के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। कई डिवीजनों में बजट न मिलने से काम ठप रहा।

इस परियोजना से कुल 1.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल कृषि भूमि की सिंचाई हो सकेगी। इसमें जनपद संभल की 70917 हेक्टेयर जमीन और अमरोहा जिले की 59046 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई किया जाना प्रस्तावित है। इसके साथ ही मुरादाबाद जनपद की 16559 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करने का लक्ष्य है। इससे नलकूपों की भी सिंचाई क्षमता बढ़ेगी। जो नलकूप पानी छोड़ चुके हैं उनमें पानी लौटेगा। सिंचाई की लागत घटने से किसानों की आय बढ़ेगी क्योंकि बिजली बिल अदा करना किसानों के लिए दूभर साबित हो रहा है। वहीं मध्य गंगा नहर परियोजना के ढांचे में सुधार चाहते हुए वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र सिंह का कहना है कि “इस नहर पर जहां-जहां पुल बने हैं उनके चारों ओर सीढ़ियां बननी चाहिए थी। मान लीजिए यदि किसी का पशु या बच्चा पानी में गिर जाए तब नहर में कैसे उतरेगा?” दूसरा महेंद्र सिंह का कहना है, सरकार पक्की नहर का निर्माण कर रही है जिसके कारण किसानों को भूजल स्तर का उतना लाभ नहीं मिल पाएगा जितना कच्ची नहर से मिल पाता।

इस परियोजना में गंगा नदी बिजनौर से मध्य गंगा नहर को जोड़ा जाएगा, जिससे पानी नहरों से होते हुए आस-पास के जनपदों में पहुंचेगा। इसके लिए गंगा नदी से 30 मीटर चौड़ी मुख्य नहर निकाली जा चुकी है। मुख्य नहर का पानी शाखाओं के जरिए चंदौसी और बहजोई तक आएगा हालांकि शाखाओं के निर्माण का काम अभी अधूरा पड़ा है। इसके पूरा होने पर संभल जिले में बिजनौर की तरह नहरों का जाल बिछाया जाएगा जिससे क्षेत्र का जल स्तर ठीक होगा और किसानों को समय पर सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा।

इस परियोजना द्वारा वर्षा ऋतु में गंगा नदी में उपलब्ध अतिरिक्त जल का प्रयोग ऊपरी गंगा नहर के कमाण्ड क्षेत्र में वर्तमान नहरों को अतिरिक्त जल उपलब्ध कराकर 114000 हेक्टेयर तथा गाजियाबाद, बुलन्दशहर एवं अलीगढ़ जनपदों में असिंचित क्षेत्र में कुल 256000 हेक्टेयर कृषि योग्य क्षेत्र में नई नहर प्रणाली का निर्माण कर 64000 हेक्टेयर सिंचन क्षमता का सृजन कर खरीफ/धान की सिंचाई की जाती है। बता दें कि परियोजना द्वारा वर्ष 1988 से निरन्तर खरीफ फसली में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है।

मार्च 2021 तक इस परियोजना पर 3404 करोड़ खर्च हो चुके हैं। परियोजना पूरी होने पर करीब 1850 गांव की जमीनों को सिंचाई के लिए पानी मिलना है। अमरोहा में छह ब्लॉक में 59 हजार हेक्टेयर, संभल में 70 हजार हेक्टेयर और मुरादाबाद के केवल डींगरपुर ब्लॉक में 16569 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई इस परियोजना के पूरा होने से हो सकेगी। सम्भावना जताई जा रही है कि करीब डेढ़ दशक बाद इस साल पश्चिमी यूपी के बिजनौर, अमरोहा, संभल और मुरादाबाद के 168 गांवों के करीब 15 लाख किसानों की आस पूरी होगी। इन जिलों के 12 ब्लाकों की करीब 1.47 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन को सींचने वाली मध्य गंगा नहर परियोजना इस साल पूरी हो जाएगी। इससे नहर के अधिग्रहण क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों में खरीफ और रबी का रकबा बढ़ेगा।

पिछली सरकारों द्वारा पर्याप्त पैसा और समय से भू अधिग्रहण में देरी के साथ इसकी लागत बढ़ती गयी। मौजूदा समय में इसकी पुनरीक्षित लागत करीब पांच गुना से अधिक हो गयी है। मार्च, 2021 तक इसमें से 3403.35 करोड़ रुपए खर्च किये जा चुके हैं। अधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक परियोजना का करीब 68 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। 3218 हेक्टेयर में से 2755. 46 हेक्टेयर भूमि खरीदी जा चुकी है। 1242 किमी प्रस्तवित नहरों में से 480 किमी का काम पूरा हो चुका है। अब तक 2022 पक्के कार्यों में से 666 कार्य पूरे हो चुके हैं। मध्य गंगा नहर परियोजना कब तक चालू हो सकेगी, इसके बारे में जानने के लिए हमने इंजीनियर शौर्य वर्धन से सम्पर्क किया। उनका कहना है, हम इस प्रोजेक्ट के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके हैं इसलिए दिसम्बर 2023 तक इस परियोजना के पूर्ण होने की सम्भावना है।

सिंचाई विभाग के पश्चिम कमांड में यह पहली नहर परियोजना होगी जिससे खरीफ और रबी की दोनों फसलों को लाभ होगा। इसमें 1.46 लाख हेक्टेयर खरीफ की अतिरिक्त फसल सिंचित होगी। इसमें से .79 हेक्टेयर रकबा धान का होगा। उल्लेखनीय है कि सरकार ने 20 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचन क्षमता के विस्तार का लक्ष्य रखा है।

सरकार उम्मीद जता रही थी कि मध्य गंगा नहर परियोजना का काम मार्च 2022 तक पूरा हो सकता है। इसके बाद ही किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल पाएगा लेकिन अभी इसके पूरा होने की सम्भावना नहीं है। किसानों से जमीन खरीदने के लिए सरकार ने डेढ़ सौ करोड़ रुपये और दे दिए हैं। दिसंबर तक जमीन खरीदने का काम पूरा करना है। इसलिए अब जमीन की धनराशि मिलने में देरी नहीं होगी। प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत केंद्र सरकार से 300 करोड़ रुपये मिलने के बाद मध्य गंगा नहर के लिए चारों जिलों में जमीन तेजी से खरीद ली गई है।

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मध्य गंगा नहर परियोजना पर पथ रहे उपले

परियोजना प्रबंधन में किसानों और प्रशासन दोनों का टकराव भी चलता रहा है। जहां किसान अपनी जमीनों के अनुच्छेद दान देने के लिए सरकार को घेर रहे हैं वहीं प्रशासन का कहना है कि कुछ किसानों की वजह से परियोजना में देरी हो रही है। नहर के लिए अधिकृत जमीन पर किसान काबिज हैं तो प्रशासन उनसे अधिग्रहण की गई जमीन छोड़ने के लिए कह रहा है। इस प्रोजेक्ट के लिए 59045 हेक्टेयर से अधिक जमीन किसानों से खरीदी जा चुकी है। अमरोहा ब्लाक के 87, जोया के 230, मंडी धनौरा के 78, गजरौला के 157 व हसनपुर ब्लाक के 370 गांवों से होकर यह नहर निकल रही है। अधिकतर गांवों के किसानों से जमीन की खरीदारी हो चुकी है।

सर्किल रेट से चार गुना दामों में किसानों से जमीन खरीदी गई है लेकिन किसान अब चार गुना मुआवजे की मांग कर रहे हैं जबकि, प्रशासन मसले में हाथ खड़ा कर पुराना मुआवजा ही देने के लिए राजी है। जनचौक ने किसानों के मसले को समझने के लिए चौधरी दिवाकर सिंह राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन(भानु गुट) से सम्पर्क किया। दिवाकर सिंह का कहना है कि, “वास्तव में अब जो किसान प्रशासन से औगुने-चौगुने रेट को लेकर अड़े हुए हैं वो उन लाखों-करोड़ों किसानों का नुक़सान कर रहे हैं जो इस नहर परियोजना से सिंचाई की आस लगाए बैठे हैं।” दिवाकर सिंह का मानना है कि कुछ राजनीतिक लोग इस मामले में अपनी राजनीति चमकाने का काम कर रहे हैं, जब सरकार जमीन के 4 गुने दाम दे रही है फिर क्या डिमांड रह गई? कुछ किसान ऐसे हैं जिनकी जमीन नहर में जा ही नहीं रही वो अड़ंगा लगाए बैठे हैं।

(अमरोहा से स्वतंत्र पत्रकार प्रत्यक्ष मिश्रा की रिपोर्ट।)

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