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सीएम योगी के शहर गोरखपुर में पुलिसकर्मियों ने अगवा कर बच्ची के साथ किया सामूहिक बलात्कार

गोरखपुर/नई दिल्ली। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शहर गोरखपुर में पुलिसकर्मियों द्वारा एक बच्ची को अगवा कर सामूहिक बलात्कार का मामला सामने आया है। इसका एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें न केवल पूरी घटना का विवरण दिया गया है बल्कि बच्ची ने भी अपने साथ हुई घटना को विस्तार से बताया है।

बताया जा रहा है कि यह बच्ची गोरखनाथ थाना क्षेत्र में अपने परिजनों के साथ इलाज के लिए गयी थी। लेकिन शौच के चक्कर में बच्ची भटक कर अपने परिजनों से अलग हो गयी। उसके बाद वह मदद मांगने के लिए कौड़ियाहवा पुलिस चौकी गयी। लेकिन मदद देने की जगह पुलिकर्मी उसे अपनी बाइक पर बैठा लिए और उसे रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक होटल में ले गए और फिर उसके साथ बारी-बारी से बलात्कार किए।

बच्ची का कहना है कि बाइक पर बैठाने से पहले उसके मुंह को कपड़े से ढंक दिया गया और उसके साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी गयी। इस दौरान लगातार बच्ची इसका विरोध करती रही। लेकिन पुलिस वाले उसको धंधे वाली बताते रहे। बच्ची का कहना है कि कमरे में ले जाकर पुलिसकर्मियों ने उसकी पिटाई भी की। वे उसके सीने पर चढ़ गए और पेट में घूसे मारे। जिससे वह बिल्कुल बेहोशी की स्थिति में आ गयी। फिर सभी ने उसके साथ बलात्कार किया। इस दौरान उस कहना था कि कुछ लोग बाहर निगरानी भी कर रहे थे।

बच्ची का कहना था कि पुलिस वाले उसे सुबह छोड़ने की बात कर रहे थे लेकिन बच्ची रात में ही अपने घर जाने की जिद पर अड़ गयी थी। जब उसने उन लोगों से घर छोड़ने की बात कही तो उन्होंने मना कर दिया। और उसे अकेले ही कमरे से रुखसत कर दिया। उसके पहले पुलिस वालों ने उसे कुछ रुपये भी देने की कोशिश की जिसे उसने लेने से इंकार कर दिया। उसने पुलिस कर्मियों से कहा कि वह यह सब कुछ नहीं करती है। बाद में कमरे के बाहर उसके आटो लेकर जाने तक पुलिस वाले खिड़कियों से उसे देखते रहे।

इस तरह से बच्ची रात में तककरीबन एक बजे अपने घर पहुंची। शुरू में घर वाले पूरे मामले को छिपाने की कोशिश कर रहे थे। ऐसा वो अपनी इज्जत और सम्मान के अलावा बच्ची की भविष्य में शादी को देखते हुए कर रहे थे। लेकिन अचानक उसकी तबियत जब खराब हो गयी तो उसे अस्पताल में ले जाना पड़ा और फिर उसके परिजनों ने मामले को छुपाने की जगह खुलकर सामने लाने का फैसला किया। जिसके बाद यह पूरा प्रकरण सामने आया है।

घटना की एफआईआर दर्ज हो गयी है। लेकिन मामले की लीपापोती शुरू हो गयी है। पुलिस वालों का कहना है कि वह अपने मर्जी से उनके साथ गयी थी। जांच का काम उसी थाने के इंचार्ज को सौंपा गया है जिस थाने का मामला है।

पूर्वांचल सेना के नेता धीरेंद्र प्रताप ने जनचौक से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री का शहर है और वह बदनाम न हो। लिहाजा पूरा पुलिस-प्रशासन मामले को दबाने में लग गया है। लेकिन उनका कहना है कि उनका संगठन ऐसा होने नहीं देगा। और जरूरत पड़ी तो फिर लोग सड़कों पर भी उतरेंगे।

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This post was last modified on February 15, 2020 1:20 pm

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