Tuesday, October 19, 2021

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किसान आंदोलन: बैकफुट पर सरकार, शाह की अमरिंदर से आज मुलाकात

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9 दिन से लगातार चले आ रहे किसान आंदोलन के बीच आज मोदी सरकार में गृहमंत्री अमित शाह पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से मुलाकात करेंगे। किसान संगठन और सरकार की बैठक से पहले यह मुलाकात दिल्ली में हो रही है।

बता दें कि पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और कांग्रेस पार्टी किसान आंदोलन का समर्थन कर रही है और पंजाब विधानसभा ने केंद्र के नये कृषि कानूनों को निष्प्रभावी बनाने के लिए विधेयक भी पारित किये हैं। और कुछ दिन पहले ही अमरेंदर सिंह ने कहा था कि वह और उनकी सरकार सभी के सामूहिक हित में केंद्र और किसानों के बीच मध्यस्थता के लिए तैयार हैं।

पंजाब के मुख्यमंत्री ने मध्यस्थता का प्रस्ताव देते हुए कहा था- “अपने लोगों की बात सुनना सरकार का काम है। अगर कई राज्यों के किसान आंदोलन में शामिल हो रहे हैं तो उन्हें समझना होगा कि अवश्य ही इन कानूनों से उन्हें कोई परेशानी है।

केंद्र सरकार इसे पंजाबी किसानों का आंदोलन मानकर चल रही है।

ये सच है कि पंजाब के 30 किसान संगठन समेत कई राज्यों के किसान दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं। और सरकार से नये कृषि कानून वापस लेने की मांग कर रहे हैं। उनमें से ज्यादातर किसान पंजाब से हैं।

लेकिन मोदी सरकार बिल्कुल शुरुआत से ही इसे पंजाब के किसानों का आंदोलन मानकर चल रही है। और पंजाब में कांग्रेस की सरकार है। इसलिए हरियाणा के भाजपा सरकार ने जहां पहले इन किसानों को खालिस्तानी समर्थक कहकर बैकफुट पर धकेलने की नाकाम कोशिश की वहीं लगातार मीडिया में भी आंदोलनकारी किसानों की कुछ वैसी ही छवि बनाने की कोशिश की गई और लगातार ये सवाल उठाये गए कि यदि ये किसान आंदोलन है तो देश के बाकी हिस्सों के या दूसरे राज्यों के किसान इसमें क्यों नहीं शामिल हैं। लेकिन फिर भाजपा शासित उत्तर प्रदेश और हरियाणा के किसानों के आंदोलन में शामिल होने से सरकार के सवाल पर विराम लग गया। 

बुराड़ी के निरंकारी मौदान में जाने के अमित शाह के प्रस्ताव को किसानों द्वारा खारिज करके किसान लगातार दिल्ली जाने के पांच मुख्यद्वारों  को घेरकर बैठ गए। अब सरकार के पास वार्ता के सिवाय कोई चारा नहीं बचा है। सरकार दमन करके देश की आवाम को अपने खिलाफ़ नहीं करना चाहती है। और किसानों की मांग (तीनों कृषि कानून निरस्त करने) की बात मानकर खुद को कमजोर भी नहीं साबित करना चाहती है। शातिर अमित शाह अपने ही बिछाये जाल में फंस गये हैं। उसी का नतीजा है उनका अमरिंदर सिंह से वार्ता करने के लिए जाना। फिलहाल किसान आंदोलन के पीछे पंजाब सरकार के आक्रामक रुख को देखते हुए ये मुलाकात काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पूर्व में भी अमित शाह से मिलने का समय मांगा था, हालांकि तब शाह और उनकी मुलाकात नहीं हुई थी।

बता दें कि किसान संगठन आज गुरुवार को एक बार फिर केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने किसान आंदोलन को खुला समर्थन दिया है। इसके अलावा हरियाणा में किसानों के प्रदर्शन पर हुए बल प्रयोग को भी हाल ही में कैप्टन ने गलत कार्रवाई बताया था। कैप्टन ने इस मामले में हरियाणा सरकार की आलोचना भी की थी। ऐसे में कैप्टन के रुख को देखते हुए अमित शाह से उनकी मुलाकात में किसानों को समझाने को लेकर कोई रास्ता निकलने की उम्मीद जताई जा रही है। 

हरसिमरत कौर ने साधा मुलाकात पर निशाना

कैप्टन अमरिंदर सिंह और अमित शाह की प्रस्तावित मुलाकात पर अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने कैप्टन-मोदी के बीच साठगांठ बताते कैप्टन पर निशाना भी साधा। गौरतलब है कि हरसिमरत कौर ने कृषि कानून के खिलाफ केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।

पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत ने ट्वीट करते हुए लिखा है- “कैप्टन-मोदी की साठगांठ उजागर: जब अध्यादेश पास किए गए तब कैप्टन एक इंच भी नहीं हिले और न ही जब किसान रेल की पटरियों पर बैठे थे। जब किसानों पर वाटर कैनन और आंसू गैस छोड़े गए तो भी वे एक इंच नहीं हिले। किसान वे ठंड में दिल्ली की सड़कों पर बहादुरी के साथ डटे हुए हैं। लेकिन होम मिनिस्टर उनको बुलाते हैं तो वह दौड़कर जाते हैं। यह मिलियन डॉलर का सवाल कि ये किसके हित के लिए है!”

बुधवार को अमित शाह ने की किसानों से वार्ता करने वाले तीन मंत्रियों के साथ बैठक

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक कर नए कृषि कानूनों से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के उपायों पर चर्चा की। तोमर, गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने मंगलवार को किसान नेताओं के साथ बातचीत के दौरान केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व किया था। माना जा रहा है कि बुधवार को तीन प्रमुख केंद्रीय मंत्रियों ने किसानों की ओर से उठाए गए मुद्दों और इसको लेकर चर्चा की है कि नए कृषि कानूनों को लेकर कैसे कृषकों की चिंताओं को दूर किया जाए। 

पहले राउंड की वार्ता के बाद किसान संगठनों के समूह अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की ओर से जारी बयान में बताया गया कि सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों के साथ मंगलवार को हुई लंबी बैठक बेनतीजा रही। लगभग दो घंटे चली बैठक में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की एकमत राय थी कि तीनों नये कृषि कानूनों को निरस्त किया जाना चाहिए। किसानों के प्रतिनिधियों ने इन कानूनों को कृषक समुदाय के हितों के खिलाफ करार दिया।

एमएसपी पर ख़तरे में खट्टर सरकार

हरियाणा में बीजेपी सरकार की सहयोगी जननायक जनता पार्टी (JJP) ने किसान आंदोलन पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि हरियाणा सरकार में दुष्यंत चौटाला के उपमुख्यमंत्री रहते हुए फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर किसी तरह की आंच नहीं आने दी जाएगी। अगर, किसानों को एमएसपी पर नुकसान हुआ तो फिर दुष्यंत चौटाला पद से इस्तीफा दे देंगे। जेजेपी ने केंद्र सरकार से आंदोलनरत किसानों की एमएसपी आदि से जुड़ीं मांगों का जल्द हल निकालने को कहा है।

जननायक जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रतीक सोम ने आईएएनएस से कहा- “हम किसानों से कहना चाहते हैं कि उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के चंडीगढ़ में रहते हुए एमएसपी पर किसी तरह की आंच नहीं आएगी। बावजूद इसके अगर किसानों को एमएसपी को लेकर किसी तरह का नुकसान होता दिखा तो पहला इस्तीफा दुष्यंत चौटाला का होगा। जेजेपी हमेशा किसानों के साथ खड़ी रहने वाली पार्टी है।”

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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