Saturday, October 23, 2021

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किसानों को 6 हजार पर हायतौबा, गुजरात की कम्पनियों को हजारों करोड़

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी जब कहते हैं कि मोदी सरकार सूटबूट की सरकार है और यह केवल मोदी के कार्पोरेट मित्रों के हित में काम करती है तब भाजपा ,गोदी मीडिया और अंधभक्त बेहद खफा हो जाते हैं, लेकिन बुरा हो नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) का जिसने एक बार फिर मोदी सरकार के कारनामों की पोल खोल कर रख दी हैऔर अपनी रिपोर्ट में कहा है कि केंद्र ने वर्ष 2015 से हज़ारों करोड़ रुपये सीधे गुजरात की कंपनियों के खाते में ट्रांसफर किए। एजेंसियों को भेजे हैं और यह गुजरात सरकार के बही-खाते में दिखाई नहीं देता है। किसानों के खाते में वार्षिक 6 हज़ार सीधे केंद्र सरकार भेजती है तो उसका हल्ला मचाया जाता है पर साल दर साल ख़ामोशी से गुपचुप ढंग से हज़ारों करोड़ रुपये सीधे गुजरात की कंपनियों के खाते में ट्रांसफर किये जा रहे हैं और सरकार, गोदी मीडिया और भाजपा डकार तक नहीं लेती।

कैग ने कहा कि यह साल 2014 के केंद्र सरकार के उस फैसले का उल्लंघन है, जिसमें कहा गया था कि भारत सरकार अपनी योजनाओं के लिए राशि सीधे राज्य सरकार के खाते में भेजेगी। वित्त वर्ष 2015-16 में 2,542 करोड़ रुपये भेजे गए थे, वहीं 2019-20 तक ये राशि बढ़कर 11,659 करोड़ रुपये हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, ये पहला मौका नहीं है जब केंद्र और गुजरात सरकार के बीच साठ-गांठ का पर्दाफाश हुआ है। लोकसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देश को दिखाया गया ‘गुजरात मॉडल’का सपना कॉरपोरेट जगत को दी गई रियायतों और छूट पर आधारित था। अब केंद्र सरकार द्वारा सीधे कंपनियों को भेजा गया ये फंड कैग की नजरों में आया है।

कैग की 31 मार्च, 2020 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए राज्य वित्त आडिट रिपोर्ट को मंगलवार को गुजरात विधानसभा में रखा गया। यह दो दिन के मानसून सत्र का आखिरी दिन भी था। कैग ने कहा कि केंद्र ने ये फंड सीधे एजेंसियों को भेजे हैं और यह गुजरात सरकार के बही-खाते में दिखाई नहीं देता है। केंद्र के इस फंड को राज्य सरकार के बजट के जरिये नहीं भेजा गया। कैग ने कहा कि गुजरात की एजेंसियों को सीधे पैसे भेजने की प्रक्रिया वित्त वर्ष 2019-20 तक जारी रही और इसमें करीब 350 फीसदी का उछाल आया। जहां वित्त वर्ष 2015-16 में 2,542 करोड़ रुपये भेजे गए थे, वहीं 2019-20 तक ये राशि बढ़कर 11,659 करोड़ रुपये हो गई।

कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा 2019-20 में निजी क्षेत्र की कंपनियों को सीधे 837 करोड़ रुपये का फंड दिया गया। इसी अवधि में निजी शैक्षणिक संस्थानों को 17 करोड़ रुपये और ट्रस्टों को 79 करोड़ रुपये दिए गए। इसी तरह पंजीकृत समितियों और गैर सरकारी संगठनों को 18.35 करोड़ रुपये और कुछ व्यक्तियों को 1.56 करोड़ रुपये केंद्र सरकार द्वारा दिए गए थे।

साल 2019-20 में सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए 3,133 करोड़ रुपये इस तरह से ट्रांसफर किए गए थे। गांधीनगर और अहमदाबाद के लिए मेट्रो-लिंक एक्सप्रेस के तहत 1,667 करोड़ रुपये, मनरेगा के लिए 593 करोड़ रुपये, सांसद निधि के तहत 182 करोड़ रुपये और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत 97 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे।

रिपोर्ट में कहा गया कि केंद्र सरकार सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए सीधे राज्य कार्यान्वयन एजेंसियों को फंड ट्रांसफर कर रही है। इन फंड्स को राज्य के बजट/राज्य कोषागार प्रणाली के जरिए नहीं भेजा गया था। कैग ने कहा कि ये पैरामीटर पूरी तस्वीर पेश नहीं करते। केंद्र की जिन योजनाओं में साल 2019-20 के दौरान फंड ट्रांसफर हुआ उनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के रूप में 3133 करोड़ रुपए भी शामिल हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लिए 593 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के लिए 182 करोड़ रुपए जारी हुए। वहीं प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए 97 करोड़ रुपए जारी हुए।

कैग ने कहा कि गुजरात के बजट नियमावली-1983 के अनुसार कोई भी खर्च बिना बजट प्रावधान या बिना अनुपूरक मांग के अनुमान के आधार पर किसी मद में भी नहीं किया जा सकता। इन दो मामलों में 2019-20 में एक करोड़ रुपये से अधिक का खर्च (कुल 11.07 करोड़ रुपये) बिना बजट प्रावधान के किया गया।

इसके अलावा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने गुजरात सरकार के वित्तीय व्यवहार में कई खामियां उजागर की हैं। कैग ने राज्य को सुझाव दिया है कि वह जरूरत के विश्वसनीय अनुमानों के आधार पर सही बजट बनाए। कैग ने कहा, ‘गुजरात के बजट नियमावली-1983 के अनुसार, कोई भी खर्च बिना बजट प्रावधान या बिना अनुपूरक मांग के अनुमान के आधार पर किसी मद में भी नहीं किया जा सकता।इन दो मामलों में 2019-20 में एक करोड़ रुपये से अधिक का खर्च (कुल 11.07 करोड़ रुपये) बिना बजट प्रावधान के किया गया।कैग ने कहा कि बिना बजट प्रावधान के खर्च वित्तीय नियमनों का उल्लंघन और यह वित्तीय अनुशासन की कमी को दर्शाता है’।

कैग ने अपने ऑडिट में यह भी पाया कि सरकारी खातों में 14,273 ग्राम पंचायतों के कोष के प्रवाह को नहीं दर्शाया गया है। इसका मतलब है कि इन ग्राम पंचायतों के खाते अनुसूचित बैंकों (सरकारी खाते से बाहर) से बाहर हैं। कैग ने कहा कि सरकार के पास पंचायतों के खातों में पड़े बिना इस्तेमाल के कोष का पता लगाने को कोई तंत्र नहीं है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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