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यूपी-एसएसएफ के बहाने काटे गए न्यायपालिका के हाथ, अब नागरिक स्वतंत्रता SSF के बूटों तले

अभी चंद दिनों पहले ही ख़बर आई थी कि उत्तर प्रदेश का पहले डिटेंशन कैंप ग़ाजियाबाद में बनकर तैयार हो गया है। अब कल ख़बर आई की यूपी की योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स यानी यूपीएसएसएफ का गठन किया है जिसके पास बिना वारंट गिरफ़्तार करने और तलाशी लेने का अधिकार होगा। ऐसा लगता है कि यूपी में 100 साल बाद रौलेट एक्ट लौट आया है। रौलेट एक्ट आज़ादी के नागरिक आंदोलन को कुचलने के लिए तत्कालीन अंग्रेज सरकार द्वारा गया गया था। जिसमें न्यायिक प्रक्रिया को पूरी तरह से नकारते हुए सारे अधिकार पुलिस बल में निहित कर दिए गए थे।

कुछ उसी तर्ज़ पर देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने यूपीएसएसएफ का गठन किया है। जिसके पास बिना वारंट किसी को भी गिरफ़्तार करने और तलाशी लेने का अधिकार होगा। जिस तरह से उत्तर प्रदेश में सरकारी दमन और दमनकारी नीतियों के खिलाफ़ एक के बाद एक जनांदोलन खड़े हो रहे थे उसके बाद कयास लगाए ही जा रहे थे कि ये सरकार रौलेट एक्ट जैसे प्रावधान की ओर लौटेगी।

जनवरी-फरवरी में पूरे उत्तर प्रदेश में एनआरसी-सीएए के विरोध में प्रदर्शन हुए थे। इसके अलावा भी कई मसलों पर छिट-पुट विरोध प्रदर्शन लगातार होते रहे हैं। अभी पिछले सप्ताह ही बेरोज़गार युवाओं ने 5 सितंबर को थाली पीटकर और 9 सितंबर को मशाल रैली निकालकर रोजगार छीनने वाली सरकारी नीतियों का विरोध किया था। युवाओं के विरोध-प्रदर्शन को न रोक पाने के चलते ही 4 दिन पहले प्रयागराज के एसएसपी अभिषेक दीक्षित सस्पेंड कर दिए गए।

मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (SSF) का गठन किया है। इस बाबत सरकार की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है। यूपी गवर्नमेंट के ट्विटर हैंडल पर इसे मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट बताया गया है।

26 जून, 2020 को उत्तर प्रदेश स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (UPSSF) के गठन को मंजूरी दे दी थी। कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए SSF के गठन की मंजूरी के बाद अब गृह विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। UPSSF का मुखिया एडीजी स्तर का अधिकारी होगा। जबकि इसका मुख्यालय लखनऊ में होगा।

महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा हेतु वर्तमान में 9,919 कर्मी कार्यरत रहेंगे। विशेष सुरक्षा बल के रूप में प्रथम चरण में 5 बटालियन का गठन किया जाना प्रस्तावित है। इन बटालियनों के गठन हेतु कुल 1,913 नये पदों का सृजन किया जाएगा। इस प्रकार 05 बटालियन के गठन पर कुल व्यय भार ₹1747.06 करोड़ अनुमानित है जिसमें वेतन भत्ते व अन्य व्यवस्थाएं भी सम्मिलित हैं और ये फिलहाल पीएसी के तर्ज़ पर काम करेगी।

प्रथम चरण में पीएसी का सहयोग लेकर कुछ इन्फ्रास्ट्रक्चर शेयर करने के जरिये इसको आगे ले जाया जाएगा। इस बल के सदस्य को विशेष पॉवर नियमावली के तहत दी जाएगी। बल के अधीनस्थ अधिकारियों तथा सदस्यों की भर्ती उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती तथा प्रोन्नति बोर्ड द्वारा की जायेगी जो राज्य सरकार के कार्मिक विभाग द्वारा बनायी गई सामान्य नियमावली के अनुसार होगी।

पूरे प्रदेश की महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों, दफ्तरों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा SSF करेगी। SSF की सेवाएं पेमेंट देकर निजी क्षेत्र भी ले सकेंगे।

यूपीएसएसएफ के बहाने काटे गए न्यायपालिका के हाथ
UPSSF को स्पेशल पावर दी गई है। इसके तहत वो तत्काल किसी की संपत्ति और घर की तलाशी भी ले सकता है। SSF के जवान ऐसा तभी कर सकते हैं जब पूर्ण विश्वास हो कि जिसके खिलाफ वो एक्शन ​ले रहे हैं, उसने अपराध किया है। बिना मजिस्ट्रेट बल का कोई सदस्य किसी मजिस्ट्रेट के किसी आदेश के बिना तथा किसी वारण्ट के बिना किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है (इस धारा के अधीन प्रयोग की जाने वाली शक्तियों की रीति इस निमित्त विहित नियमावली द्वारा शासित होगी)। वारण्ट के बिना तलाशी लेने की शक्ति भी इस फोर्स के पास होगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार इस अधिनियम के उपबन्धों को क्रियान्वित करने के लिए अधिसूचना द्वारा नियम बना सकती है।

फोर्स के किसी भी सदस्य के पास अगर यह विश्वास करने का कारण है कि तलाशी वारंट इश्यू कराने में लगने वाले वक्त के दौरान अपराधी भाग सकता है या साक्ष्य मिटा सकता है तो ऐसी स्थिति में वो उक्त अपराधी को गिरफ्तार कर सकती है। SSF यूपी में बिना वारंट गिरफ्तारी और तलाशी ले सकती है। जबकि बिना सरकार की इज़ाज़त के SSF के अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ कोर्ट भी संज्ञान नहीं लेगा। कह सकते हैं कि एक तरह से उत्तर प्रदेश सरकार ने यूपीएसएसएफ के मामले में न्यायपालिका के भी हाथ काट दिए हैं ताकि कोर्ट सरकारी मामलों विशेषकर यूपीएसएसएफ के राजनीतिक या सांप्रदायिक इस्तेमाल में हस्तक्षेप न कर सके। ये एक तरह से लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्याय प्रणाली का नकार है। अब सरकार बिल्कुल निरंकुश होकर बग़ावत करने का मन बनाने वाली जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को खत्म कर सकती है।

उत्तर प्रदेश मणिपुर और कश्मीर बनने की राह पर
ऐसे ही अधिकार अफ्स्पा कानून के तहत कश्मीर में सेना और अर्द्धसैन्य बलों को भी मिला था। जहां रोज ही जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को सैन्य बलों के बूटों तले कुचला जाता था। कश्मीर के अलावा ये कानून असम नगालैंड, मणिपुर, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भी लागू है। कुछ साल पहले अफ्स्पा कानून की आड़ में असम रायफल्स के जवान दनदनाते हुए एक घर में घुसे थे और और मनोरमा देवी थांगजाम को आतंकवादी बताकर घर से पकड़कर ले गए थे। बाद में उन जवानों ने मनोरमा का गैंगरेप करके उसकी बेरहमी से हत्या कर दी थी। मनोरमा के गैंगरेप और मर्डर के विरोध में मणिपुर के ऐतिहासिक कांगला फोर्ट के सामने तीस स्त्रियों ने नंगे होकर हाथों में “इंडियन आर्मी रेप अस” का बैनर पकड़कर विरोध-प्रदर्शन किया था।

अभी दस दिन पहले यानि 3 सितंबर, 2020 को कुछ ही दिन पहले कश्मीर की ही तर्ज़ पर उत्तर प्रदेश के बलिया में लोगों ने हाथों में पत्थर लेकर यूपी पुलिस पर हमला करके एसीपी समेत 8 पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया था। पुलिस पर आरोप था कि उसने रसड़ा कोतवाली के कोटवरी मोड़ पर एक दिन पहले एक आपसी विवाद में पन्ना राजभर नामक एक ग्रामीण युवक को हिरासत में लेकर पीट-पीटकर अधमरा कर दिया था। पुलिस पर दूसरे पक्ष से पैसे लेकर युवक को पीटने का आरोप था।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

This post was last modified on September 14, 2020 11:14 am

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