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देश के असली मुद्दों से कब तक ध्यान भटकाते रहेंगे मोदी-शाहः कांग्रेस

कांग्रेस का राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आज एक प्रेस कान्फ्रेंस करके देश के सामने तमाम ज्वलंत और बुनियादी राजनीतिक मुद्दों को रखा। उन्होंने इन मुद्दों पर देश की राजनीति को केंद्रित करने, विमर्श केंद्रित करने की अपील भी की। उन्होंने कहा, “देश में मुद्दों की राजनीति होनी चाहिए राजनीति का मुद्दा नहीं। देश में राजनीति का धर्म होना चाहिए। धर्म की राजनीति नहीं। देश में एकीकरण की राजनीति होनी चाहिए तुष्टिकरण की नहीं। देश में प्रेम और सद्भाव की राजनीति होनी चाहिए नफ़रत और बंटवारे की नहीं। परंतु भाजपा ने इसमें भी उत्तर और दक्षिण के विभाजन का टूलकिट जारी कर दिया है।”

सुरजेवाला ने देश को मुद्दे गिनाते हुए कहा, “लोगों को राहुल गांधी के आह्वान पर विचार करने का वक़्त आ गया है। आज देश का मुद्दा क्या है। मुद्दा है कि देश में डीजल 90 रुपये और पेट्रोल 100 रुपये लीटर क्यों बिक रहा है? देश का मुद्दा है चीन, वह आज भी पैंगोंग, डेप्सांग प्लेन, गोगरा और हॉटस्प्रिंग में घुसपैठ करके क्यों बैठा हुआ है और मोदी सरकार चुप क्यों है? प्रधानमंत्री चीन से डरते क्यों हैं? ये भी बताना पड़ेगा देश का मुद्दा है आम जनमानस महंगाई की मांर से त्रस्त क्यों है? मुद्दा ये है कि पेट्रोल और डीजल पर टैक्स लगाकर मोदी सरकार ने साढ़े 21 लाख करोड़ तो कमा लिए पर मध्यम वर्ग और किसान को राहत क्यों नहीं है?

देश का मुद्दा ये है कि लाखों किसान दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं ढाई सौ से अधिक किसान वीरगति को प्राप्त हो गए परंतु दिल्ली की सरकार पसीजती क्यों नहीं? देश का मुद्दा ये है कि जीडीपी औंधे मुंह क्यों गिर रही है? देश का मुद्दा ये है कि स्टॉफ सेलेक्शन कमीशन में 14,000 पदों के लिए एक करोड़ 30 लाख लोग रोजगार के लिए आवेदन क्यों करते हैं? बेरोज़गारी इतनी गहरी क्यों है? नौजवान दर-दर की ठोकरें क्यों खाते हैं? चपरासी के पद के लिए एमबीए, पीएचडी और इंजीनियर नौकरी की लाइन में खड़े हैं ये देश का मुद्दा है। देश में पिछले साढ़े छह साल में इतने सैनिक वीरगति को क्यों प्राप्त हो रहे हैं? ये देश का मुद्दा है।”

इसके बाद कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला ने उन टिप्पणियों और विभाजनकारी, स्त्री विरोधी चुनावी भाषणों को गिनाया, जो देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री समय-समय पर देश को विमर्श और मुद्दों के नाम पर देते आए हैं। उन्होंने कहा, “देश के हुक्मरानों के लिए सही मुद्दे क्या हैं? जब प्रधानमंत्री हिमाचल के चुनाव में ‘50 करोड़ की गर्लफ्रैंड’ का मुद्दा बनाएंगे तो ये मुद्दा है। जब देश के प्रधानमंत्री विपक्षी नेताओं को जर्सी गाय और हाईब्रिड बछड़ा बताकर मुद्दा बनाते हैं। प्रधानमंत्री कहते हैं लड़कियां इसलिए कुपोषण का शिकार हैं क्योंकि वो फीगर कांशियस हैं। देश का प्रधानमंत्री देहज प्रथा को बढ़ावा देने वाला बयान देकर कहता है कि बेटी के जन्म पर पेड़ लगाइए और बेटी विवाह योग्य हो जाए तो वो पेड़ बेचकर दहेज दीजिए।

प्रधानमंत्री द्वारा श्मशान और कब्रिस्तान इस देश का मुद्दा बना दिए जाते हैं। जब हमारे देश के प्रधानमंत्री चुनाव में वीरगति प्राप्त सैनिकों की फोटो लगाकर उनकी वीरगति के आधार पर वोट मांगेंगे तो क्या ये देश का मुद्दा हो सकता है? जब व्यापारियों के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री कहते हैं, सेना का साहस कुछ भी नहीं व्यापारियों का साहस सेना से भी बड़ा है। गृह मंत्री महात्मा गांधी को चतुर बनिया कह देंगे तो क्या ये सही बात है? जब देश के प्रधानमंत्री 15-15 लाख का वादा कर देंगे और गृह मंत्री उसे जुमला बता देंगे तो क्या ये सही मुद्दा है? नहीं।

देश के मुद्दे हैं महंगाई, बेरोज़गारी, औंधे मुंह गिरी जीडीपी, किसानों की शहादत, भारतीय सरजमीं पर चीन का कब्ज़ा, भारतीय सैनिकों की शहादत, ये हमारे देश के आज के मुद्दे हैं। जब असहमति रखने वाले लेखक, पत्रकार को देशद्रोही बताकर जेल में डाल देते हैं तब ये देश का मुद्दा है। कोरोना से डेढ़ लाख लोग मर गए, क्या ये देश का मुद्दा नहीं है? पर देश के स्वास्थ्य मंत्री फर्जी दवाई ‘कोरोनिल’ बेचने के लिए पत्रकार वार्ता करते फिरते हैं। ये सही मुद्दे हैं। इसलिए इस देश में इन मुद्दों को लाने की ज़रूरत है, लेकिन इसे भी उत्तर और दक्षिण में बांटकर इस देश का अपमान मत करिए। संविधान पर यदि हमला होगा तो ये देश का मुद्दा है। अगर आपके अधिकार छीने जाएंगे तो ये देश का मुद्दा है और इन पर चर्चा अवश्य होगी।

फिशरी मंत्रालय के सवाल पर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “इस देश में करोड़ों मछुआरे हैं। हजारों किलीमोटर की कोस्टल लाइन है, जो महाराष्ट्र से पश्चिम बंगाल तक फैली है। हमारे मछुआरे भाई अपनी जान जोखिम में डालकर एक छोटी सी कश्ती के सहारे अपनी रोटी कमाते हैं। क्या उनके लिए एक मंत्रालय नहीं होना चाहिए? शायद अहंकारी पार्टी को ये पता नहीं है।”

चीनी निवेश के सवाल पर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “भारत सरकार ने चीन को सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बना लिया है। ख़बरें तो यहां तक आ रही हैं कि अब चीन 25 प्रतिशत निवेश भारतीय कंपनियों में ऑटोमेटिक कर पाएगा किसी की इज़ाज़त नहीं लेनी पड़ेगी। चीन को मोदी सरकार राहत दे रही है, क्योंकि न तो वो चीन को आंख दिखा सकते हैं, न वो चीन को भारत की सरजमीं से पीछे धकेल सकते हैं। यही सच्चाई है और इसका जवाब देश के प्रधानमंत्री को देना चाहिए।”

लालकिले पर उपद्रव पर एक सवाल के जवाब में सुरजेवाला ने कहा, “देश के गृह मंत्री यदि लाल किले की सुरक्षा नहीं कर सकते तो उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। आप उनसे पूछिए कि कैसे इतने उपद्रवी लाल किले में घुसते चले गए। उन्हें वहां तक जाने का रास्ता और गली किसने मुहैया करवाई। उनके लिए लाल किले का एक-एक दरवाजा किसने खोला, जिससे वो लाल किले के हर जगह पर जहां चाहें वहां जा सकें। उन्हें पकड़ा क्यों नहीं दिल्ली पुलिस ने। लाल किले की घटना खुद गृह मंत्री की विफलता है, लेकिन जिम्मेदारी लेने के बजाय गृह मंत्री अपने पपेट संस्थाओं सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स का इस्तेमाल करके विरोधियों, विपक्षियों और आंदोलनकारी किसानों को डराने में लगे हैं।

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This post was last modified on February 24, 2021 6:40 pm

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