Subscribe for notification

कोरोना के घातक हमले से निपटने के लिए सिंगापुर के प्रधानमंत्री ने कैसे पैदा किया अपनी जनता में भरोसा, पढ़िए पूरा भाषण

समस्या एक है-  कोरोना। फिलहाल ये लाइलाज है और बहुत तेजी से पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेता जा रहा है। इस पर कई देशों के प्रधानमंत्रियों ने अपने मुल्क़ की अवाम को संबोधित कर उनसे अपील जारी की है। 19 मार्च को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश की अवाम को संबोधित करते हुए अपना गाल बजाया और जनता से 22 मार्च को कर्फ्यू लगाकर थाली पीटने को कहा। उनके भाषण बाजी के बाद, 22 मार्च को ‘जनता कर्फ्यू’ को बड़ा इवेंट बनाने की तैयारी में जुटा सरकार का मैनेजमेंट, प्रशासन और मीडिया ने जनता में अफरा-तफरी का माहौल बना दिया है। कोरोना जैसे बेहद गंभीर मुद्दे पर इससे मोदी सरकार की असंवेदनशीलता, अज्ञानता और लापरवाह रवैये का पता चलता है।

वहीं पिछले सप्ताह सिंगापुर के प्रधानमंत्री Lee Hsien Loong ने अपने देश के नागरिकों को संबोधित किया। उनका भाषण बेहद संवेदनशील, अपने मुल्क की अवाम के प्रति प्रेम व चिंता से भरा था। इसका कारण ये है कि उन्हें समस्या की व्यापकता सही ज्ञान और सही आकलन किया। उन्होंने समस्या के चिकित्सकीय आर्थिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्लान बनाया।

और उसके समाधान के लिए उन्होंने व्यापक रणनीति बनाई और जनता से साझा करते हुए उनसे सहयोग की अपील की। और तत्काल और त्वरित कदम उठाने के लिए पूरी मशीनरी और संसाधनों को झोंक दिया। उनके भाषण को मैंने ट्रांसक्राइब किया है ताकि मेरे मुल्क़ की अवाम को समस्या की व्यापकता और उससे निपटने के लिए योग्य प्रतिनिधि और ज़रूरत का एहसास हो सके।

सिंगापुर के प्रधानमंत्री Lee Hsien Loong का संबोधन:

गुड इवनिंग। पांच सप्ताह पहले मैंने आप सबको कोविड-19 पर अपने हालात बताया था। तब से बहुत कुछ घटित हो चुका है। अतः समय आ गया है कि आपको फिर से अपडेट करूँ। और आपसे साझा करूँ कि हम जमीनी स्तर पर क्या उम्मीद कर सकते हैं। मैं आपसे इस मुद्दे के तीन पहलुओं पर बात करुँगा- मेडिकल, इकोनॉमिकल और साइकोलॉजिकल। मेडिकल पहलू पर हम सिंगापुर में लगातार नए केसेस देख रहे हैं।अधिकांशत: या तो बाहर से यात्रा करके आए हैं या बाहर से आए केसेस से संक्रमित हुए हैं। हर बार हम उन्हें आइसोलेट करने में सक्षम हुए हैं। और उनके संपर्क में रहने वाले नजदीकी लोगों में संक्रमण की जांच की है। अतः हमारी संख्या ज़्यादा नहीं बढ़ी है। लेकिन अपने बेहतरीन प्रयासों के बावजूद हम वायरस को खत्म करने में कामयाब नहीं हुए हैं।

जबकि इसी समय हमारे चारों तरफ दुनिया में नए केसेस की संख्या भयावह रूप से बढ़ी है विशेषकर यूरोप, अमेरिका और मध्य पूर्व एशिया में। चाइना की स्थिति स्टेबलाइज हो रही है। वैश्विक स्तर पर हर 5-7 दिन में केसेस की संख्या दुगुनी हो जा रही है। अतः आज WHO ने COVID-19 को महामारी (PANDEMICS) घोषित किया है। इसका मतलब क्या है। इसका मतलब है कि WHO इस नतीजे पर है कि कई देशों में ये विकराल रूप ले चुकी है। ससटेन कम्युनिटी ट्रांसमिशन के जरिए। जैसा कि साउथ कोरिया और इटली में घटित हो रहा है। SARS की तरह ये विकरालता एक साल या ज़्यादा समय तक बनी रह सकती है। WHO ने एक मुख्य कारण जो बताया है इसके इतने तेजी से फैलने का वो ये कि कई देशों ने स्थिति को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया।

जिसे WHO ने ‘अलार्मिंग लेवल्स ऑफ इनएक्शन’ कहा है। यहां सिंगापुर में हमने COVID-19 को पर्याप्त गंभीरता से लिया है। वास्तव में WHO ने हमारे प्रयासों को सराहा है। और कहा है कि सिंगापुर ने इससे निपटने की एक मिसाल पेश की है। लेकिन हम भी गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं। हम ज़्यादा गंभीर केसेस की उम्मीद करते हैं। और उसके बाद नए क्लस्टर और संक्रमण के नए वेब्स। इस समय ये कई देशों में दिख रहा है बजाय एक या दो के।

हमने पहले ही कई यात्राओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। उदाहरण के लिए चाइना, इटली, ईरान, साउथ कोरिया आदि। हम इसे अस्थाई रूप से और टाइट करेंगे। क्योंकि हम खुद को दुनिया से नहीं काट सकते। हमें और क्या करना चाहिए। चूंकि COVID-19 हमारे साथ लंबे समय तक रहने वाला है। इसलिए हमें बुनियादी चीजों को अपनी आदतों में शामिल करने पर जोर देना चाहिए।

हमें अच्छी तरह व्यक्तिगत हाईजीन का अभ्यास करना चाहिए।

नये सामाजिक नार्म्स को ग्रहण करना चाहिए।

और बड़े समूहों में इकट्ठा होने को हतोत्साहित करना चाहिए।

सामान्य तौर पर एक दूसरे से शारीरिक दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

यही कारण है कि हमने सामूहिक एक्टिविटी को बंद कर दिया है विशेषकर बुजुर्गों के लिए। और हमें दूसरे क्षेत्रों में भी बहुत कुछ करने की ज़रूरत है। जैसे कि साउथ कोरिया में धार्मिक समारोह शिंचोजी चर्च ग्रुप द्वारा केसेस फैले। सिंगापुर में हमारे दो बड़े क्लस्टर चर्च ग्रुप से घटित हुए। और बहुत से सिंगापुर वासी जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक समारोह, और हाल ही में क्वालालमपुर में सार्वजनिक सभा में शिरकत की थी उन्हें भी वायरस ने संक्रमित कर दिया। मुद्दा सिर्फ़ धार्मिक आयोजन का नहीं लेकिन भीड़ भाड़ होने पर वायरस के तेजी से फैलने का खतरा है। जैसे कि धार्मिक सभा और सेवाओं के जरिए।

यही कारण है कि सऊदी अरब ने अस्थायी रूप से उमराह यात्रा रोक दिया है। और पोप ने सेंट पीटर स्क्वायर पर होने वाली भीड़ को रोकने के लिए लाइव उपदेश बंद कर दिया। मुझे उम्मीद है कि सिंगापुर वासी ये समझेंगे और इस दौरान हमें अपनी धार्मिक सेवाओं को कम करने और ऐसी सभाओं में शिरकत करने को कम करने की ज़रूरत है। कृपया अपने धार्मिक नेताओं के साथ इन धार्मिक सेवाओं को व्यावहारिकता के साथ तालमेल बिठाने के लिए कहिए। 

दूसरा हमें COVID-19 केसेस के संभावित रोकथाम के लिए योजना बनाने की ज़रूरत है। यदि ये बड़ी संख्य़ा में घटित होता है तो हम हर पीड़ित को हॉस्पिटल में भर्ती करने और आइसोलेट करने में सक्षम नहीं हो पाएंगे जैसा कि हम अभी कर पा रहे हैं। लेकिन हमें अब पता है कि अधिकांश मरीज, वास्तव में उनमें से लगभग 80 प्रतिशत में केवल मामूली लक्षण ही दिखे हैं। केवल बुजुर्ग लोगों और उच्चतर रक्तचाप, फेफड़े की बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए ये ज़्यादा ख़तरनाक है। संवेदनशील रूप से उन्हें हॉस्पिटल में दाखिल करने की बात है तो अतः बड़ी संख्या में सिर्फ़ गंभीर केसेस को ही एडमिट किया जा रहा है और जिनमें मामूली लक्षण पाए गए हैं उन्हें अपने परिवार के देखरेख में घर पर आराम करने और खुद को आइसोलेट करके रखने की सलाह दी गई है।

इस तरह हम रिसोर्सेस को गंभीर बीमार के ईलाज, रिसपांस टाइम की गति बढ़ाने, और आशापूर्वक खतरे को कम से कम करने पर खर्च करने पर फोकस कर रहे हैं। और समय रहते हम आईसीयू, हॉस्पिटल बेड और फैसिलिटीज अतिरिक्त क्षमता को बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं ताकि COVID संख्या बढ़ने पर हम उसका सामना कर सकें। इसके अलावा यदि किसी सिंगापुरवासी को तात्कालिक मेडिकल केयर चाहिए तो चाहे वो COVID-19  हो या दूसरी बीमारी उसका हम पूरा ख्याल रखेंगे।

मेडिकल प्लान के अलावा हमें कोरोना के रोकथाम के लिए दूसरे सामाजिक अलगाव के पहलुओं पर भी ध्यान देना चाहिए। ये अस्थाई तौर पर स्कूलों को बंद करने, कामकाज का समय घटाने या घर से काम करने को अपरिहार्य बनाने पर ध्यान देना होगा। ये एक्स्ट्रा ‘ब्रेक’ की तरह होंगे। जिन्हें केसेस में रोकथाम दिखने पर लागू किया जाएगा। ये एक्स्ट्रा ब्रेक वायरस के फैलाव को धीमा करेगा और हमारे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को पूर्णतया पराजित होने से बचाएगा। और इस तरह की मदद से संक्रमण की संख्या घटेगी। स्थिति में सुधार होने के बाद हम इन सबको हटाकर बुनियादी सावधानियों पर वापस आ जाएंगे।

कोरोना समस्या का आर्थिक पहलू

कोरोना के मनोवैज्ञानिक पहलू पर बात करते हुए प्रधानमंत्री Lee Hsien Loong ने नागरिकों से कहा, “लेकिन मैं इस महत्वपूर्ण बात पर जोर देकर कहना चाहूँगा कि सिंगापुर में स्थितियां पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। हम डॉर्सकॉन रेड (संक्रमण की चौथी और सबसे घातक अवस्था) में नहीं जा रहे हैं। न ही हम अपने शहरों को पूरी तरह से बंद करने जा रहे हैं जैसा कि चीन, साउथ कोरिया और इटली ने किया। हम अभी जो करने जा रहे हैं वो आगे की योजनाएं है, इन कुछ कड़े कदमों को लागू करने के अलावा सिंगापुर निवासियों को तैयार करने की ज़रूरत है जब हमें इन्हें वाकई में लागू करने की ज़रूरत हो।

जिसे हम अगले कदम के रूप में देखते हैं और जो हमारी सबसे बड़ी चिंता है वो है हमारी अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला प्रभाव। हमारी अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित होने वाली है। यही कारण है कि पिछले महीने के बजट में हमने तत्काल प्रभाव से 4 बिलियन डॉलर सपोर्ट और स्टेबिलाइज पैकेज के रूप में व्यवसायों, कामगारों और घरेलू लोगों की मदद के लिए आवंटित किया है। इससे मदद भी मिली है। लेकिन हमें अभी भी बहुत कुछ करने की ज़रूरत है। लेकिन इस छोटी अर्थव्यवस्था में कुछ क्षेत्रों में स्थिति बहुत गंभीर है विशेषकर होटल, उड्डयन, अस्पताल और फ्रीलांसर। लेकिन किसी को भी घबड़ाने की ज़रूरत नहीं है। हर कोई अलग-अलग स्तर पर इसके प्रभाव को महसूस कर रहा है। अत: सरकार दूसरे पैकेज मदों पर काम कर रही है। हम अपनी कंपनियों को उनकी कीमतों और कैशफ्लो पर मदद करेंगे ताकि संकट के तूफान में वो उबर सकें।

हम अपने वर्कर्स को उनकी जॉब जारी रखने में मदद करेंगे। और इस वक्त के गुजर जाने के बाद उनकी जॉब बहाली में मदद करेंगे। जैसे ही चीजें फिर से सामान्य होंगी सबसे पहले हमारे वर्कर्स अपने घरों से निकलेंगे और तत्काल उत्पादन में लग जाएंगे। और जो लोग बेरोजगार और छंटनी कर दिए गए हैं उन्हें इस मुश्किल समय में अतिरिक्त मदद की ज़रूररत है। मैं ये प्लान आपसे इसलिए साझा कर रहा हूँ ताकि आपको सुनिश्चित कर सकूँ कि हम इन चीजों से ऊपर हैं और आगे की सोच रहे हैं। हम मेडिकल और आर्थिक परिणामों का पूर्वानुमान कर रहे हैं। और मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूं कि हम इससे निपट सकते हैं।

कोरोना समस्या पर मनोवैज्ञानिक पहलू

कोरोना समस्या के मनोवैज्ञानिक पहलू पर बात करते हुए प्रधानमंत्री Lee Hsien Loong ने नागरिकों से कहा- “लेकिन एक चीज जो और भी गंभीर है वो इस लड़ाई का मनोवैज्ञानिक पहलू है। हमारी अग्रिम पंक्ति का स्टाफ सिंगापुर को चलाए रखने के लिए बहुत कड़ी मेहनत कर रहा है। सिंगापुर के नागरिक हमारे स्वास्थ्यकर्मी, इमिग्रेशन ऑफिसर्स सिविल सर्वेंट, पब्लिक ट्रांसपोर्ट वर्कर्स, टैक्सी ड्राईवर्स, क्लीनिंग स्टाफ का मनोबल बढ़ा रहे हैं। 

सरकार भी अपनी योजनाओं को लेकर पूरी तरह से खुली और पारदर्शी रही है। जब हम सिंगापुर के नागरिकों से डायरेक्ट अपील करते हैं उदाहरण के लिए ठीक न होने पर केवल फेस मास्क पहनें या हमारे सुपर मार्केट के बारे में परवाह न करें कि उनमें घेरलू सामान और खाने की चीजों की कमी हो जाएगी। लोगों ने हमारी आश्वस्ति को स्वीकार किया। और अपने व्यवहारों में परिवर्तन किया। मैं कृतज्ञ हूँ कि अधिकांश सिंगापुर वासी शातिपूर्ण और जिम्मेदारी पूर्वक इसका निर्वाहन कर रहे हैं। आपके भरोसे और समर्थन के लिए शुक्रिया।”

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

This post was last modified on March 21, 2020 5:18 pm

Share