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चीनी सैनिक गलवान घाटी से पीछे हटे! लेकिन वजहों को लेकर विशेषज्ञों में सहमति नहीं

नई दिल्ली। भारत और चीन की सेनायें वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थित अपने-अपने पुराने ठिकानों की तरफ लौटना शुरू हो गयी हैं। बताया जा रहा है कि चीन की सेना गलवान घाटी के पीपी 14 प्वाइंट से पीछे लौट रही है। इसी तरह की अपेक्षा हॉट स्प्रिंग सेक्टर में स्थित पीपी 15 और पीपी 17 ए में भी दोनों सेनाओं से की जा रही है।

इंडियन एक्सप्रेस की मानें तो यह फैसला कमांडर स्तर की बातचीत में लिया गया। जिसमें यह तय पाया गया था कि सेनाओं की वापसी स्टेप बाई स्टेप होगी। इसमें दोनों पक्षों द्वारा अपने सैनिकों और ढांचों के हटाने की भी बात शामिल है। इसी कड़ी में एक रिपोर्ट चीनी पक्ष के कुछ टेंटों के उखाड़ने की भी आयी है।

आधिकारिक सूत्रों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि “यह प्रक्रिया उस समय शुरू हो गयी जब कल शाम को गलवान में चीनी पक्ष की तरफ कुछ गतिविधियां दिखीं जहां उसने अपने उन रक्षा ढांचों को ध्वस्त कर दिया जिसे उसने बना रखा था। इसके साथ ही इलाके को साफ कर दिया है। अपने सैनिकों को ले जाने के लिए कुछ गाड़ियों को भी लोकेशन पर आते देखा गया है।”

सुरक्षा से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि “सेना से कुछ टीमें उन बिंदुओं पर चेक करने जाएंगी जहां हमारी सेनाओं के बीच गतिरोध बना हुआ है। पूरी रिपोर्ट कल ही हमारे पास तक पहुंच सकती है। लेकिन गलवान में कुछ सैनिकों और ढांचों के ध्वस्तीकरण के प्रमाण जरूर हैं।”

हालांकि साथ ही अफसर का यह भी कहना था कि “प्रगति बहुत धीमी है….वैसी नहीं है जिसकी अपेक्षा थी”।

उन्होंने कहा कि हम नहीं जानते कि यह जान बूझ कर किया जा रहा है। पिछले पांच दिनों से मौसम भी अच्छा नहीं है। गलवान में नदी उफान पर है। शायद उसके चलते मूवमेंट कुछ धीमा हो।

सूत्रों का कहना है कि प्रक्रिया अभी भी जारी है। और दोनों पक्ष कितनी दूर तक पीछे हटेंगे उसके बारे में कुछ भी सही कह पाना मुश्किल है। किसी भी तरह की पुष्टि प्रमाण हासिल करने के बाद ही की जा सकती है।

गृहमंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि प्रत्येक दिन क्या हासिल किया जा सकता है उसको ध्यान में रखते हुए पूरी टाइमलाइन दस दिनों की तय की गयी है।और फिर इसमें तीन और पांच दिन का लक्ष्य रखा गया है।

उसने कहा कि “हालांकि इस टाइम लाइन को भी रिवाइज करने की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन गलवान में जरूर कुछ प्रगति हुई है। वह हम लोगों के लिए प्राथमिकता का क्षेत्र है”।

हालांकि पैंगांग त्सो समेत फिंगर 4 और फिंगर 8 के बीच आने वाले इलाके में अभी भी चीनी सेना पहले की तरह बनी हुई है। यहां सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया कब शुरू होगी। कुछ कह पाना मुश्किल है।

जहां तक देप्सांग में सैनिकों के जमावड़े का सवाल है तो वह जरूर चिंता का विषय है। आखिरी नतीजे पर पहुंचने में जरूर कुछ समय लग सकता है।

इस बीच, रक्षा विशेषज्ञ कर्नल (रि.) अजय शुक्ला ने इस पूरे घटनाक्रम पर कहा है कि समाचारों में अभी ‘सरकारी अफसर कहते हैं’ कि पीपी 14 के झगड़े के प्वाइंट से चीनी सैनिक पीछे जा रहे हैं। बहुत अच्छा, अगर सही है। लेकिन मैं इन चीजों का इंतजार कर रहा हूं:

(ए) सरकार का आधिकारिक बयान (क्यों अज्ञात नाम से रिपोर्ट?)

(बी) सैनिकों के पीछे जाने की सैटेलाइट फोटो

(सी) भारतीय सेनाएं कहां तक पीछे आयी हैं?

हमें चीनियों की दो कदम आगे एक कदम पीछे के सामरिक प्रैक्टिस को नहीं भूलना चाहिए। क्या चीन पैंगांग त्सो जैसे दूसरे भारत के हथियाए इलाकों से लोगों का ध्यान बंटाने के लिए गलवान पर फोकस तो नहीं कर रहा है?

पूरे मामले को बड़े फलक पर देखे जाने की जरूरत है। इसके अलावा कुछ तकनीकी कारण भी हो सकते हैं। मसलन गलवान नदी में पानी के स्तर का ऊपर आना जिसमें अक्सर उथल-पुथल होने लगती है। इसके मद्देनजर चीनी अपने कैंपों की जगह को बदल सकते हैं। और जब पानी का स्तर नीचे जाए तो फिर वे वापस भी आ सकते हैं। इसलिए रिपोर्टिंग के मामले में बहुत जल्दबाजी करना उचित नहीं होगा।

This post was last modified on July 6, 2020 2:44 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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