कोर्ट ने माना पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर बलात्कार का दोषी

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उन्नाव बलात्कार और अपहरण मामले में दिल्ली की तीस हज़ारी कोर्ट ने भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी क़रार दिया है। तीस हजारी कोर्ट ने विधायक कुलदीप सेंगर को धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 363 (अपहरण), 366 (शादी के लिए मजबूर करने के लिए एक महिला का अपहरण या उत्पीड़न), 376 (बलात्कार और अन्य संबंधित धाराओं) और POCSO के तहत दोषी ठहराया है। सेंगर की सजा पर 19 दिसंबर को बहस होगी। महिला आरोपी शशि सिंह को कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

सेंगर पर पीड़िता ने आरोप लगाया था कि जून, 2017 में जब वह नौकरी मांगने उनके आवास पर गई थी तो विधायक ने उसके साथ बलात्कार किया था। पीड़िता के परिवार ने कहा था कि बलात्कार मामले में विधायक और उसके साथियों ने पुलिस में शिकायत नहीं करने के लिए उन पर दबाव बनाया था। परिवार ने कहा था कि विधायक के भाई अतुल सिंह सेंगर और उसके साथियों ने पीड़िता के पिता के साथ मारपीट की थी और इसके बाद पुलिस हिरासत में पीड़िता के पिता की मौत हो गई थी।

मौत से पहले पीड़िता के पिता का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने कहा था कि विधायक के भाई और उसके गुर्गों ने उन्हें पीटा था। पीड़िता ने पुलिस के रवैये से परेशान होकर मुख्यमंत्री आवास के बाहर मिट्टी का तेल डालकर आत्मदाह करने का भी प्रयास किया था।

कोर्ट ने विधायक सेंगर की मोबाइल लोकेशन को अहम सबूत माना। अपने फैसले में अदालत ने कहा कि इस बात के सुबूत हैं कि पीड़िता को शशि सिंह ही दोषी विधायक के पास लेकर गई थीं। सेंगर को आईपीसी की धारा 376, सेक्शन 5(c) और पॉक्सो ऐक्ट के तहत दोषी करार दिया। कोर्ट ने शशि सिंह की मामले में भूमिका को संदेह के घेरे में रखा। ‌सिंह के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने और न ही मामले में सीधे तौर पर भूमिका स्पष्ट होने के चलते कोर्ट ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए मामले से बरी कर दिया है।

सेंगर ने 2017 में एक युवती का अपहरण करने के बाद उससे बलात्कार किया था। उस समय युवती नाबालिग थी। उप्र की बांगरमऊ विधानसभा सीट से चौथी बार विधायक बने सेंगर को इस मामले के बाद अगस्त 2019 में भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था। अदालत ने नौ अगस्त को विधायक और सिंह के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, अपहरण, बलात्कार और पॉक्सो कानून से संबंधित धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। कुलदीप सेंगर को 14 अप्रेल 2018 को गिरफ्तार किया गया था।

इसके साथ ही कोर्ट ने सीबीआई को भी जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने मामले की जांच में देर करने और चार्जशीट दाखिल करने में समय लगाने को लेकर सीबीआई को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई ने चार्जशीट फाइल करने में एक साल लगा दिया। इससे जांच एजेंसी भी सवालों के घेरे में आती है। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी ने पीड़िता को बयान देने के लिए कई बार बुलाया, जबकि सीबीआई के अधिकारियों को पीड़िता के पास बयान लेने के लिए जाना चाहिए था।

कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि पीड़िता वारदात के समय नाबालिग थी और उसके साथ सेक्सुअल असॉल्ट हुआ। वो डरी हुई थी। उसे लगातार धमकियां दी जा रही थीं। उसके परिवार की जान को खतरा था। कोर्ट ने कहा कि वह एक पटवरफुल पर्सन से लड़ रही थी और इसी के चलते पीड़ित परिवार पर फर्जी केस भी लगाए गए।

पीड़ित युवती की कार को 28 जुलाई को एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी, जिसमें वह गंभीर रूप से जख्मी हो गई थी। दुर्घटना में युवती की दो रिश्तेदार मारी गईं और उनके परिवार ने इसमें षड्यंत्र होने के आरोप लगाए थे। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने उन्नाव बलात्कार मामले में दर्ज सभी पांच मामलों को एक अगस्त को उत्तर प्रदेश में लखनऊ की अदालत से दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित किया था। उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया था कि रोजाना आधार पर सुनवाई की जाए।

उच्चतम न्यायालय ने उन्नाव रेप केस में दर्ज सभी पांच मामलों को एक अगस्त को उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कोर्ट से दिल्ली स्थित कोर्ट में ट्रांसफर करते हुए निर्देश दिया था कि रोजाना आधार पर सुनवाई की जाए और इसे 45 दिनों के अंदर पूरा किया जाए।

रेप मामले में बंद कमरे में हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन के 13 गवाहों और बचाव पक्ष के नौ गवाहों से जिरह हुई। रेप सर्वाइवर का बयान दर्ज करने के लिए दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में एक विशेष अदालत भी बनाई गई। सर्वाइवर को लखनऊ के एक अस्पताल से एयर लिफ्ट कर यहां भर्ती कराया गया था।

इस मामले में कुल पांच एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिसमें से एक पर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। बाकी में अभी भी सुनवाई इसी कोर्ट में चल रही है, जिस में पीड़िता के पिता की कस्टडी में हुई मौत, सड़क दुर्घटना में उसके परिवार से मारे गई दो महिला और पीड़िता के साथ किए गए गैंग रेप और उसके चाचा के खिलाफ कथित रूप से झूठे मुकदमे दर्ज करने से जुड़े मामले शामिल हैं।

गौरतलब है कि कुछ महीने पहले पीड़िता जब रायबरेली जेल में बंद अपने चाचा से मिलने जा रही थी तो रास्ते में उनकी गाड़ी को ग़लत दिशा से आ रहे एक ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी थी। इस घटना में पीड़िता की मौसी और चाची की मौत हो गई थी, जबकि पीड़िता और वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

मामले में पीड़िता के चाचा की शिकायत पर विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, उसके भाई मनोज सिंह सेंगर और आठ अन्य लोगों के ख़िलाफ़ हत्या, हत्या की साज़िश रचने का मुक़दमा दर्ज कराया गया था। हालांकि ट्रक दुर्घटना के मामले में सीबीआई की चार्जशीट में कुलदीप सिंह सेंगर और उसके सहयोगियों पर हत्या का आरोप नहीं है। ट्रक के ड्राइवर आशीष कुमार पाल पर भारतीय दंड संहिता की धारा 304-ए, 338 और 279 के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है।

कुलदीप सिंह सेंगर के सियासी रसूख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उन्नाव के सांसद साक्षी महाराज ने कुलदीप सिंह सेंगर से सीतापुर जेल में मुलाक़ात की थी।

 (जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)

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