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आंध्र के अमरावती ज़मीन घोटाले की आंच सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची

आंध्र प्रदेश के अमरावती ज़मीन घोटाले की आंच उच्चतम न्यायालय तक पहुंच गयी है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने चीफ जस्टिस एस ए बोबडे को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस एन वी रमना और राज्य उच्च न्यायालय ने राज्य में वाईएसआर कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने और गिराने की कोशिश की है। रेड्डी का आरोप है कि ऐसा तेलुगु देशम पार्टी के अध्यक्ष चन्द्र बाबू नायडू के निर्देशों के तहत किया जा रहा है और अमरावती ज़मीन घोटाला में एनी लोगों के साथ जस्टिस रमना की दो बेटियों का नाम सामने आया है।

दरअसल सितम्बर 20 में अमरावती ज़मीन घोटाला मामले में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अप्रत्याशित आदेश जारी करते हुए कहा था कि अमरावती में जमीन खरीद के संबंध में भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एसीबी) के गुंटूर पुलिस स्टेशन द्वारा राज्य के पूर्व कानून अधिकारी और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर की जानकारी सार्वजनिक न की जाए। चीफ जस्टिस जेके माहेश्वरी ने आदेश में कहा था कि अंतरिम राहत के माध्यम से यह निर्देशित किया जाता है कि किसी भी आरोपी के खिलाफ इस रिट याचिका को दायर करने के बाद एफआईआर पर कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।किसी भी तरह की पूछताछ और जांच पर भी रोक रहेगी।

एक अभूतपूर्व कदम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे को पत्र लिखा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि न्यायमूर्ति एनवी रमना, जो सीजेआई होने के लिए अगली पंक्ति में हैं, आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के कुछ माननीय न्यायाधीशों के रोस्टर सहित सुनवाई को प्रभावित कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री के आठ पन्नों के पत्र में जस्टिस रमना की टीडीपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू से कथित निकटता का आरोप लगाया है, और कहा है कि अमरावती को नई राजधानी के लिए साइट घोषित करने के पहले संदिग्ध भूमि घोटाले की एंटी-करप्शन ब्यूरो जांच में जस्टिस रमना की दो बेटियों और अन्य का नाम सामने आया हैं। यह संभवत: पहली बार है जब किसी मौजूदा मुख्यमंत्री ने उच्चतम न्यायालय में वरिष्ठतम न्यायाधीशों में से एक के खिलाफ इस तरह के गंभीर स्वभाव का आरोप लगाया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार अजय कल्लम द्वारा 6 अक्तूबर को लिखे गये पत्र को शनिवार देर शाम हैदराबाद में मीडिया को पत्र जारी किया गया था।

इस पत्र के आधार पर इंडियन एक्सप्रेस और हिंदुस्तान टाइम्स ने रिपोर्ट प्रकाशित की है।
अपने पत्र में मुख्यमंत्री ने कुछ माननीय न्यायाधीशों को तेलुगु देशम पार्टी के लिए महत्वपूर्ण मामलों को कैसे आवंटित किया गया है के उदाहरणों का उल्लेख किया है, और इसे एक अनुलग्नक में विस्तृत रूप से संलग्न किया है। पत्र में कहा गया है कि जब से वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने मई 2019 में सत्ता हासिल की है और जून 2014 से मई 2019 तक एन चंद्रबाबू नायडू के शासन द्वारा किए गए सभी सौदों की जांच का आदेश दिया है, जस्टिस एनवी रमना ने राज्य में न्याय प्रणाली को प्रभावित करना शुरू कर दिया।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा राज्य के पूर्व महाधिवक्ता दम्मलापति श्रीनिवास के खिलाफ भूमि घोटाले की प्राथमिकी दर्ज करने के बाद जांच को  उच्च न्यायालय द्वारा रोक दिया गया है।
धोखाधड़ी और अपराध की जाँच की शिकायत इस आधार पर स्टे कर दी गयी है कि लेन-देन में शामिल धन आरोपी द्वारा वापस लौटा दिया गया है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि ऐसे आदेशों से न्यायपालिका के प्रत्येक न्यायिक मिसाल और प्राथमिक सिद्धांत का उल्लंघन किया जाता है, जिसमें टीडीपी सदस्यों के हितों की रक्षा करने का मामला होता है।

अमरावती ज़मीन घोटाला मामले में 15 सितम्बर को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जेके माहेश्वरी द्वारा पारित आदेश में यह निर्देशित किया गया है कि इस संबंध में कोई भी समाचार इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट या सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। यक्ष प्रश्न यह है कि आखिर अमरावती ज़मीन घोटाला मामले में ऐसी कौन सी बात छिपी है, जिसकी इतनी पर्दादारी है। चर्चा है कि व्यवस्था के बहुत ऊँचे पायदान के लोगों तक इस घोटाले की आंच पहुंच रही है।

इसलिए रात में हाईकोर्ट ने यह आदेश पारित किया है। मुख्यमंत्री के पत्र से स्पष्ट हो गया है कि मामला जस्टिस रमना की दो पुत्रियों से जुड़ा हुआ है इसलिए आनन फानन में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने न केवल जाँच को स्टे कर दिया बल्कि मीडिया पर भी रोक लगा दिया। पत्र में उच्चतम न्यायालय द्वारा बार बार कहा गया है कि मीडिया को किसी समाचार के प्रकाशन पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता फिर भी आन्ध्र उच्च न्यायालय द्वारा मीडिया पर एक गैग आदेश पारित किया गया है। उन्होंने चीफ जस्टिस बोबडे से आंध्र की न्यायपालिका की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए” उचित और उचित समझे जाने वाले कदम उठाने पर विचार करने का आग्रह किया है।

गौरतलब है कि राज्य के वित्त मंत्री बुग्गना राजेंद्रनाथ के नेतृत्व में कैबिनेट की उप समिति पहले ही तेलुगु देशम पार्टी के शासन में अमरावती में हुई जमीन की खरीद-फरोख्त एवं लेन-देन की जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है। कैबिनेट उपसमिति की रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने कथित घोटाले की गहराई से जांच करने के लिए विशेष जांच दल का गठन किया है। इसके साथ ही मामले की जांच सीबीआई से कराने का भी फैसला किया है और इसके लिए केंद्र को पत्र लिखा है। राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी के सूत्रों ने बताया कि केंद्र को अभी इस पर जवाब देना है। हालांकि, वाईएसआर कांग्रेस के सांसदों ने मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के संकेत पर केंद्र को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।

जांच में पाया गया कि सौदे के समय ज्यादातर खरीदार ड्राइवर, रसोइया, घरेलू कामगार, प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड इत्यादि के रुप में काम कर रहे थे। जांचकर्ताओं ने संदेह जताया है कि वास्तव में जिन्होंने लाभ प्राप्त किया, वे प्रभावशाली लोग हैं ।जाँच में सामने आया कि 40 साल के एक व्यक्ति के खातों में 8 लाख रुपये थे और उसने 1 एकड़ जमीन खरीदी। सेल डीड में इस जमीन की कीमत 78.65 लाख रुपये दिखायी गई है। 35 साल के एक व्यक्ति के पास 6 लाख रुपये थे और उसने 48.4 लाख रुपये कीमत वाली 1 एकड़ जमीन खरीदी। 37 साल के एक व्यक्ति के पास 6.8 लाख रुपये थे और उसने 21.74 लाख रुपये कीमत वाली आधा एकड़ जमीन खरीदी। ये महज कुछ उदाहरण हैं।

आंध्र प्रदेश सीआईडी 5 जून, 2014 और 26 दिसंबर, 2014 के बीच प्रस्तावित अमरावती राजधानी क्षेत्र में और उसके आसपास भूमि सौदों में कथित तौर पर “बेनामी” संपत्ति खरीद की जांच कर रही है। 797 बेनामी लोग सीआईडी की लिस्ट में हैं। जांच में पता चला है कि 797 व्यक्तियों में से 594 ने 5 लाख रुपये से लेकर 60 लाख रुपये तक की कीमत की जमीन खरीदी। जांच के दौरान सीआईडी ने पाया कि सभी ‘बेनामी’ सफेद राशन कार्ड धारक हैं। इसका मतलब है कि वे निम्न आय वर्ग वाले परिवार हैं।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on October 11, 2020 9:25 am

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