Saturday, October 16, 2021

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नीतीश ने 7वीं बार ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, विपक्षी दलों ने किया समारोह का बहिष्कार

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नई दिल्ली। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज सातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ बीजेपी कोटे से तारकिशोर प्रसाद और रेनू देवी ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इस तरह से आज कुल 14 मंत्रियों ने राजभवन में आयोजित एक सादे समारोह में शपथ लिया। इसमें 7 मंत्री बीजेपी के, 5 जेडीयू के और 1-1 वीआईपी तथा हम से बनाए गए हैं। साथ ही विपक्ष की मुख्य पार्टियों शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार किया।

महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राजद ने बहिष्कार की घोषणा करते हुए ट्विटर पर जानाकारी साझा किया है। राजद ने कहा कि – “राजद शपथ ग्रहण का बायकॉट करती है। बदलाव का जनादेश NDA के विरुद्ध है। जनादेश को ‘शासनादेश’ से बदल दिया गया। बिहार के बेरोजगारों, किसानों, संविदाकर्मियों, नियोजित शिक्षकों से पूछे कि उन पर क्या गुजर रही है। NDA के फर्ज़ीवाड़े से जनता आक्रोशित है। हम जनप्रतिनिधि हैं और जनता के साथ खड़े हैं।”

बिहार कांग्रेस ने भी शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार किया है। बिहार कांग्रेस सदस्य और विधानसभा उम्मीदवार रहे लल्लन कुमार फोन पर जानकारी देते हुए जनचौक से बताते हैं कि –“बिहार कांग्रेस ने भी शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार किया है। हमारा कोई साथी समारोह में नहीं गया। इन्होंने लोकतंत्र का चीरहरण किया है। लोकतंत्र के हत्या की कोशिश की है। कांग्रेस पार्टी का इतिहास है कि वो लोकतंत्र की हत्या करने वालों के साथ कभी नहीं रही है। कांग्रेस पार्टी की एक विचारधारा है और उस विचारधारा के अनुरूप हम काम करते हैं।”

सीपीआई (एमएल) ने भी शपथ ग्रहण में हिस्सा नहीं लिया। पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य धीरेन्द्र झा ने कहा कि बिहार का जनादेश भाजपा-जदयू के खिलाफ बदलाव का जनादेश है, लेकिन वोटों की हेरा-फेरी करके आज एक मैनेज्ड सरकार शपथ ले रही है। इसलिए इस सरकार के शपथ ग्रहण का हम बहिष्कार करते हैं।

बिहार के उम्मीदवारों व मतदाताओं के मन में चुनाव के परिणाम को लेकर काफी सवाल थे, लेकिन उसका स्पष्टीकरण व उन्हें संतुष्ट करने की बजाए आयोग ने आनन-फानन में चुनाव परिणाम घोषित कर दिया। कम मार्जिन वाली सीटों पर हरा दिया गया। आयोग की हड़बड़ी के कारण संदेह का दायरा और गहरा हो गया है। हम आयोग से मांग करते हैं कि वह तत्काल कम मार्जिन वाली सीटों पर संज्ञान ले और उम्मीदवारों व बिहार की जनता के सभी प्रकार के संदेहों को दूर करे।

इस तरह शपथ ग्रहण समारोह के बहिष्कार के साथ ही ये एक तरह से ऐलान कर दिया गया है कि महागठबंधन के साथी फासीवादी ताक़तों के खिलाफ़ एक साथ मिलकर लड़ेंगे, संसद के अंदर भी और संसद के बाहर भी। अब सवाल उठना लाजिम भी है कि आखिर ये कैसी सरकार बन रही है जिसे विपक्ष की मान्यता ही नहीं प्राप्त है। जो सरकार अपने शपथ ग्रहण से ही सवालों के घेरे में है। ये सीधे सीधे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ़ है। लोकतंत्र सिर्फ़ बहुमत के वोट से मिली जीत भर नहीं होती है। इसके लिए विश्वास की बहाली बहुत ज़रूरी है।

निर्वाचन आयोग की भूमिका संदिग्ध

असंतुष्ट पक्ष की आवाज़ को अनसुना करके निर्वाचन आयोग ने न सिर्फ़ लोकतंत्र का गला घोटा है बल्कि लोकतंत्र की बहाली के लिए लोकतांत्रिक ढंग से पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के अपने दायित्वों की पूर्ति करने में भी नाकाम रहा है। निर्वाचन आयोग की विफलता लोकतंत्र की विफलता है। निर्वाचन आयोग के इस कदम से लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा खत्म होगा।  

उम्मीदवारों को जीत के बाद जबरन हरा दिया गया

बता दें कि चुनाव परिणाम घोषित किये जाने के बाद महागठबंधन का प्रतिनिधिमंडल निर्वाचन आयोग के पास मतगणना में गड़बड़ी की शिकायत करने पहुंचा था। राजद और कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन आयोग से मिलकर कहा था कि उनके जीते हुए उम्मीदवारों को जबरन हरा दिया गया। बिहार कांग्रेस ने 11 नवंबर बुधवार को पार्टी ऑफिस में प्रेस कान्फ्रेंस करके सरकार पर चुनाव के दौरान गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा, प्रचार अभियान समिति अध्यक्ष अखिलेश सिंह व  विधान परिषद सदस्य प्रेमचंद मिश्रा ने कहा था कि बिहार में मतों का अपहरण किया गया है। जिन जगहों पर उम्मीदवार के बीच कम वोटों का अंतर था वहां गड़बड़ की गई।

बता दें कि 243 निर्वाचन क्षेत्रों में से 40 सीटों पर बेहद करीबी मुकाबला रहा था, जहाँ जीत का अंतर 3,500 से कम रहा था। इनमें से 11 सीटों पर फर्क 1,000 से भी कम रहा- जैसे नालंदा जिले की हिलसा सीट, जहां जनता दल (यूनाइटेड) के उम्मीदवार कृष्णमुरारी शरण उर्फ ​​प्रेम मुखिया ने आरजेडी के अत्रि मुनि उर्फ ​​शक्ति सिंह यादव को मात्र 12 वोटों से हराया था। इसके अलावा बरबीघा में जेडीयू उम्मीदवार सुदर्शन कुमार ने कांग्रेस के गजानंद शाही को मात्र 113 मतों से हराया था। गोपालगंज जिले के भोरे विधानसभा क्षेत्र में, जेडीयू के सुनील कुमार ने सीपीआई (एमएल) के उम्मीदवार जितेंद्र पासवान को 462 मतों से हराया था। सीपीआई (एमएल) ने इस सीट पर स्थानीय जेडीयू सांसद की वोटों की गिनती के दौरान अवैध रूप से मौजूदगी को चुनाव नतीजे बदलवाने से जोड़ते हुए यहाँ वोटों की दोबारा गिनती की मांग की थी। 

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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