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Wednesday, September 29, 2021

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आजमगढ़: गोधौरा दलित बस्ती में फिर पुलिसिया तांडव, खाकी वर्दी ने आधी रात को मचाया उत्पात

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गोधौरा(आजमगढ़)। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ पुलिस ने दरिंदगी और हैवानियत का खेल फिर शुरू कर दिया है। जहानागंज इलाके की करीब पांच सौ आबादी वाली गोधौरा दलित बस्ती में पुलिसिया तांडव से लोग अभी उबरे भी नहीं थे कि रविवार को आधी रात के बाद खाकी वर्दी वाले फिर वहां धमके और नंगा नाच किया। कई दलितों के घरों के दरवाजे और चारपाई तोड़ दिए गए। इन दलितों का कुसूर सिर्फ इतना है कि उन्होंने पुलिस और प्रशासन की मनमानी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। फिर ढाई सौ पुलिस कर्मियों ने दलित बस्ती में पहुंचकर फायरिंग, लूटमार, तोड़फोड़ और आगजनी की। महिलाओं की इज्जत पर भी डाका डाला गया। आततताई खाकी वर्दी वाले महिलाओं के आभूषण ही नहीं, उनकी बकरियां, मुर्गे, बत्तख, बटेर तक लूटकर ले गए। घटना के विरोध में कांग्रेस ने बीती 13 जुलाई को दलित पंचायत की थी। बीती रात हुई घटना के बाद गोधौरा दलित बस्ती के लोग फिर से पालयन कर गए हैं। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष प्रवीण सिंह ने कहा है कि सीएम योगी आदित्यनाथ यूपी में गुंडाराज कायम करना चाहते हैं। इसी की परिणति है दलितों पर पुलिसिया अत्याचार। आजमगढ़ के इतिहास में पुलिस का ऐसा नंगा नाच आज तक देखने को नहीं मिला था। घटना के विरोध में कांग्रेस बड़ा आंदोलन छेड़ेगी।

एक अगस्त की रात आजमगढ़ के जहानाबाद थाने की पुलिस ने आधी रात के बाद गोधौरा दलित बस्ती में फिर धावा बोला। गांव की दलित महिलाएं और उनकी बच्चियां अपनी अस्मत बचाने के लिए जंगल, खेत और झाड़ियों में छुप गईं। यह वही गांव है जहां चार महीने से लगातार पुलिसिया तांडव चल रहा है। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस कुछ दिनों तक खामोश रही और अब फिर दलितों पर जुल्म-ज्यादती का पहाड़ तोड़ऩे लगी है। एक अगस्त की रात पुलिस ने दर्जनों घरों को निशाना बनाया और डकैतों की तरह दलितों के घरों में घुसकर तोड़फोड़ व मारपीट शुरू कर दी। इस घटना के बाद गोधौरा दलित बस्ती में दहशत का माहौल है।

पुलिस के खौफ से बी राम अपने छत से कूद गए। जिसमें वो गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और उन्हें आजमगढ़ के रमा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है जहां उनकी हालत चिंताजनक है। बताया जा रहा है कि पुलिस उनके घर का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश कर रही थी। दरअसल उनके घर में दो जवान लकड़ियां हैं जिनके साथ पुलिस ने पिछली बार ज्यादती की थी। इस बार फिर पुलिस कर्मियों ने उनके घर पर इसी नजरिये से हमला किया। जिससे बी राम काफी डर गए और फिर उसी खौफ के साये में वह छत से कूद गए। बताया जा रहा है कि इस घटना में बी राम के शरीर में कई जगह फ्रैक्चर हो गया है।

गोधौरा के लोगों के मुताबिक बस्ती के लोग जब नींद में थे, तभी बड़ी संख्या में पुलिस गांव में पहुंची और गांव को चारों ओर से घेर लिया। बताया जाता है कि पुलिस ने सबसे पहले वीरेंद्र राम का दरवाजा तोड़ा और जाति सूचक गालियां देते हुए घर की महिलाओं के साथ अभद्रता शुरू कर दी। बस्ती के केदारनाथ की बेटी और उनके दामाद आए थे। पुलिस उनकी बेटी को खींचकर खेतों की ओर ले जाने लगी तो उनके दामाद ने विरोध किया। फिर पुलिस ने दोनों को बुरी तरह मारा-पीटा। गांव के रतिलाल का दरवाजा, चारपाई, कुर्सियां तोड़ डाला और उनके घरों में जमकर लूटपाट की।

पुलिस ने जब मारपीट और लूटपाट शुरू की तो गांव की महिलाएं खेतों और जंगलों की ओर भाग निकलीं। जिन घरों में महिलाएं नहीं मिलीं, उनके घरों के सामने खूंटे में बंधी भैस-गायों तक को बुरी तरह पीटा गया। पुलिस ने करीब एक घंटे तक नंगा नाच किया।

रात करीब दो बजे पुलिस उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई, तब जहानाबाद थाना पुलिस गांव से लौटी। एसपी सुधीर कुमार सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने पहले घटना से इंकार किया। बाद में एसपी ने खुद फोन करके उनको बताया कि पुलिस अभियुक्तों को पकड़ने गई थी और वह लौट गई है।

चार महीने पहले पुलिस ने गोधौरा गांव में करीब डेढ़ सौ दलितों के घरों में तोड़फोड़, लूटपाट और मारपीट की थी। दलितों के बदन पर जख्मों के निशान अभी भरे नहीं हैं। कुछ लड़कियों और महिलाओं की हालत ऐसी है कि अभी तक वो चल-फिर पाने में असमर्थ हैं। फिलहाल दलित बस्ती में मरघटी सन्नाटा। गांव की ज्यादातर महिलाएं और पुरुष पलायन कर गए हैं। पुलिस जुल्म के शिकार कन्हैया कुमार राव कहते हैं, “दलित बस्ती में पुलिस वाले रोज आते हैं और जेल भेजने का डर दिखाकर दलितों की बेटियों और महिलाओं पर जुल्म-ज्यादती का पहाड़ तोड़ते हैं। यह सिलसिला काफी दिनों से चल रहा है। बस्ती के ज्यादतर लोग अपनी बहन-बेटियों की इज्जत बचाने के लिए गांव से पलायन कर गए हैं। पुलिस हमें रोज सता रही है। हमें इतना पीटा जा चुका है कि अब और लाठी खाने का दम नहीं है। अपना सब कुछ गंवा देने के बाद टूट से गए हैं हम लोग।”

पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव इस क्षेत्र से लोकसभा में नुमाइंदगी करते हैं। इनकी चुप्पी भी दलितों को साल रही है। साथ ही भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर उर्फ रावण का खेल भी दलितों के समझ में नहीं आ रहा है।

आजमगढ़ जिला मुख्यालय से करीब आठ किमी दूर लबे रोड पर स्थित है गोधौरा गांव। जिला पंचायत के चुनाव में इस दलित बस्ती की जमुनती देवी ने पर्चा दाखिल किया। इनके बेटे कन्हैया ने अपनी मां के पक्ष में जमकर चुनाव प्रचार किया। जमुनती देवी का सीधा मुकाबला सूबे के वनमंत्री दारा सिंह चौहान की रिश्तेदार रंजना चौहान से था। जिला पंचायत की यह सीट महिलाओं के लिए आरक्षित थी। कन्हैया कहते हैं, “गिनती के बाद हमारी मां करीब 450 मतों से चुनाव जीत गईं थीं। इसके बावजूद नतीजा डिक्लेयर नहीं किया गया। बाद में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी आए और अचानक नतीजे को पलट दिया। रंजना के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें 950 मतों से विजयी घोषित कर दिया। रि-काउंटिंग के लिए वो अफसरों से गुहार लगाते रहे, पर किसी ने नहीं सुनी।” 

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जमुनती देवी के पक्ष में आए नतीजे को पलटे जाने से इलाके के दलित गुस्से में आ गए और उन्होंने मतगणना स्थल के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। बाद में पुलिस ने लाठीचार्ज कर सभी को खदेड़ दिया। यह घटना चार मई के दिन की है। गोधौरा दलित बस्ती के लोग बताते हैं कि शाम सात बजे पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार सिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी सिद्धार्थ तोमर और इलाके के एसडीएम अपने साथ करीब दो सौ से अधिक पुलिस के जवानों को लेकर गांव में धमके। खाकी वर्दी वालों ने गांव को चारों ओर से घेर लिया और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। बदामी देवी कहती हैं, “पुलिस ने करीब 56 राउंड गोलियां दागी और आंसू गैस के अनगिनत गोले दागे। फायरिंग से समूची बस्ती थर्रा उठी। जान बचाने के लिए जिसे जहां मौका मिला भागने लगा।

कुछ लोगों ने गांव के बाहर खेतों में छिपकर अपनी जान बचाई थी। पुलिस ने करीब साढ़े तीन घंटे तक यहां जमकर नंगा नाच किया। जो जहां मिला उस पर लाठियां तोड़ी गईं। पुलिस अपने साथ गैता, रम्मा, टंगारी आदि लेकर आई थी। घरों के किवाड़ तोड़े गए। महिलाओं के आभूषण लूटे गए और बेशर्मी के साथ महिलाओं पर जुल्म व ज्यादती की गई। छोटे-छोटे बच्चों को पुलिस वालों ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। बस्ती में चीख-पुकार मच गई। खाकी वर्दी वालों ने गांव में हैंडपंप तक उखाड़ दिया। खाने-पीने का सामान तहस-नहस कर दिया। कुछ बाइकें तोड़ दी गईं और करीब चालीस बाइकें पुलिस वाले लूट ले गए। महिलाओं के लाखों रुपये के जेवर भी पुलिस वालों ने लूट लिए। मन नहीं भरा तो लड़कियों और महिलाओं के साथ जोर-जबर्दस्ती की। बकरे, मुर्गे, बत्तख और बटेर तक पुलिस वाले ले गए।” 

गोधौरा दलित बस्ती में दोबारा हुए पुलिसिया तांडव पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अनिल यादव ने कहा है कि आजमगढ़ के पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार सिंह दलित-ओवीसी विरोधी मुहिम चला रहे हैं। भाजपा के इशारे पर निर्दोष लोगों को फर्जी मामले में फंसाकर समाज में खौफ का माहौल पैदा कर रहे हैं। आजमगढ़ में पुलिस का कृत्य संवैधानिक और विधि संगत नहीं है। गोधौरा में दोबारा पुलिसिया तांडव यह साबित करता है कि यूपी में पूरी तरह गुंडाराज कायम हो गया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय राय ने कहा कि अगले चुनाव में भाजपा को अपनी हार दिख रही है। योगी सरकार ने दलितों और पिछड़ों पर जुल्म करके जबरिया उनका वोट लेने का मंसूबा बनाया है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बीते दिनों आजमगढ़ कांग्रेस ने दलितों के मुद्दे पर आंदोलन चलाया था। भाजपा के लिए काम करने वाले भीमा आर्मी के चंद्रशेखर रावण से मिलकर पलिया में दलितों का तोड़ा गया घर बनवाना शुरू करा दिया। भाजपा चाहती है कि दलित तबका उनका गुलाम बन जाए। इसी योजना को मूर्त रूप देने के लिए आजमगढ़ में दलित बस्तियों में पुलिसिया नंगा नाच शुरू कराया गया है। अज्ञात लोगों की धर-पकड़ के बहाने पुलिस निर्दोष लोगों को अपना निशाना बना रही है।

(आजमगढ़ से वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत की रिपोर्ट।)

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