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संसद में भी गूंजी किसानों की आवाज, विपक्षी दलों ने प्रदर्शन कर राष्ट्रपति अभिभाषण का किया बहिष्कार

मोदी सरकार के नये कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के आन्दोलन का आज 65 वां दिन है इस आंदोलन को कुचलने और बदनाम करने की सरकार और गोदी मीडिया के तमाम प्रयासों के बाद भी किसान अपनी मांगों के साथ आंदोलन में डटे हुए है।

उधर आज बजट सत्र के पहले दिन विपक्ष ने कृषि कानूनों के विरोध में संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार किया। वाम दलों के सांसदों ने कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए संसद की तरफ विरोध-प्रदर्शन मार्च निकाला।

वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसदों ने संसद परिसर में गांधी प्रतिमा के सामने कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन किया। जबकि राष्ट्रपति के अभिभाषण के बीच राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संसद हनुमान बेनीवाल ने सेन्ट्रल हॉल में प्ले कार्ड दिखाकर नये कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

आरएलपी की तरह बीजेपी और एनडीए गठबंधन में शामिल शिरोमणि अकाली दल ने भी आज संसद के बाहर इन कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

ध्यान देने वाली बात यह है कि आज 19 विपक्षी दलों में से 17 दलों ने कृषि कानूनों के विरोध में राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार करते हुए इन्हें रद्द करने की मांग की और प्रदर्शन किया।

आम आदमी पार्टी के नेता और राज्य सभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि, किसानों को इस ठंड में पानी की बौछार और आंसू गैस के गोले झेलने पड़े। ये तीनों कानून वापस होने चाहिए। इसके लिए आज हम लोगों ने राष्ट्रपति के अभिभाषण का विरोध किया और वहां नारे लगाए। हम लोगों को सेंट्रल हॉल में नहीं घुसने दिया गया।

आज राहुल गांधी ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा, “मैं किसानों से कहना चाहता हूं हम सब आपके साथ हैं। एक इंच पीछे मत हटिए, ये आपका भविष्य है। ये जो 5-10 लोग आपका भविष्य चोरी करने की कोशिश कर रहे हैं, इन्हें मत चोरी करने दीजिए, हम आपकी पूरी मदद करेंगे।”

इस बीच आज फिर सिंघु बॉर्डर पर कुछ लोग किसानों का मंच खाली कराने वहां पहुंच गये। कथित तौर पर इन्हें स्थानीय निवासी कहा जा रहा है जबकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। ये लोग पुलिस की भारी मौजूदगी में संयुक्त किसान मोर्चा के मंच के करीब पहुंच कर पहले नारेबाजी किए फिर किसानों पर पत्थर, लाठी, तलवारों से हमला किया जिसमें कई किसान गंभीर रूप से ज़ख्मी हो गये हैं। ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने भी पहले इस उग्र भीड़ को नहीं रोका, किन्तु जब एक पुलिसकर्मी को चोट लगी तो पुलिस हरकत में आई और आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया।

कुछ किसानों का कहना है कि, पुलिस ने हमलावर भीड़ को नहीं रोका और उल्टा किसानों की तरफ ही आंसू गैस दागे।

नीचे इस वीडियो को देखिये। टोपी पहना हुआ सादे कपड़ो में कौन है इस वीडियो में जिसने पहले हमला किया और पुलिस वालों ने उसे छोड़ कर दूसरे को खींच लिया और मारा?

सीपीआईएम ने कहा कि यह बीजेपी आरएसएस के गुंडों का हमला है और पुलिस और आरपीएफ मूकदर्शक बन इन हमलों को होने दिया। सीपीएम इसकी कड़े शब्दों में भर्त्सना करती है।

गौरतलब है कि गुरुवार 28 जनवरी की शाम को भी गाजीपुर बॉर्डर में ऐसा कुछ होने वाला था किसान नेता राकेश टिकैत ने सीधा बीजेपी और आरएसएस का नाम लेते हुए कहा था कि उनके गुंडे किसानों को मारने के लिए वहां पहुंचे थे, जबकि वहां भी पुलिस की भारी तैनाती थी।

इस बीच गाजीपुर में फारेंसिक एक्सपर्ट की टीम साक्ष्य इकट्ठा करने पहुंची हुई है।

इस बीच हरियाणा सरकार ने कल शाम 5 बजे तक अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, पानीपत, हिसार, जींद, रोहतक, भिवानी, चरखी दादरी, फतेहाबाद, रेवाड़ी और सिरसा में इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया है।

(पत्रकार नित्यानंद गायेन की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on January 29, 2021 9:20 pm

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