देश की आबरु के लिए तो मुंह खोलिए प्रधानमंत्री जी!

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मोदी, ट्रंप और इमरान।

मोदी, ट्रंप और इमरान।

डोनाल्ड ट्रम्प ने झूठ बोला। अमेरिका के राष्ट्रपति ने झूठ बोला। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के सामने झूठ बोला। दो हफ्ते पहले हुई मुलाकात की बात सच थी। मगर, कश्मीर पर मध्यस्थता के आग्रह का दावा झूठा था। हम अपने विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया पर विश्वास करें। हम अपनी सरकारों के दशकों पुराने रुख पर भरोसा रखें। मगर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पर कुछ नहीं बोलेंगे। दुनिया इस चुप्पी का चाहे जो मतलब ले, लेकिन वे चुप रहेंगे। हमने उन्हें प्रधानमंत्री चुना है तो भरोसा करना होगा। मगर, दुनिया ने नरेंद्र मोदी को नहीं चुना है प्रधानमंत्री। वे कैसे जानेंगे कि ट्रम्प सही बोल रहे हैं या मोदी?

विपक्ष सवाल पूछे मगर पहले बताए भरोसा मोदी पर है या ट्रम्प पर?

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देश की संसद में भी कोई चर्चा नहीं होनी चाहिए! संसद में हंगामा करना गलत है! प्रधानमंत्री से बयान की मांग करना गलत है! अगर ट्रम्प के बयान पर संसद में चर्चा हुई तो इसका मतलब होगा कि भारतीय विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा नहीं करता। सत्ता पक्ष के हिसाब से अपराध है! सत्ताधारी दल के नेता पूछ रहे हैं कि अगर आप मोदी पर भरोसा नहीं करते, इसका मतलब क्या ट्रम्प पर भरोसा करते हैं? विपक्ष पर यह सवाल आरोप बनकर चस्पां है।

विपक्ष के पास सवालों का गुब्बारा फूट जाता है, सत्ता पक्ष सवाल लेकर हावी हो जाता है। बताइए किन्हें मोदी से ज्यादा ट्रम्प पर भरोसा है? ‘मोदी में भरोसा है’, कहना मुश्किल है विपक्ष के लिए। और, जो नहीं कहा, तो वह अपने देश से ज्यादा विदेश के नेता पर भरोसा करने का आरोपी हो गया। देशभक्ति उसकी चली गयी। वे देश विरोधी हो गये।

अमेरिकी सांसद को है मोदी पर भरोसा, मगर वे देशद्रोही क्यों नहीं?

अमेरिका के डेमोक्रैट सांसद ब्रैड शेरमेन के साथ ऐसा नहीं है। वे अमेरिका में विपक्ष के सांसद हैं। मगर, खुलकर कह रहे हैं कि नरेंद्र मोदी कश्मीर में मध्यस्थता की बात नहीं कह सकते। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने झूठ बोला। दक्षिण एशियाई मामलों पर नज़र रखने वाला कोई भी व्यक्ति यह बात कह सकता है। वे भारतीय राजदूत से अपने राष्ट्रपति की ओर से माफी भी मांगते हैं। मगर, अमेरिका में सत्ता पक्ष उनसे यह सवाल नहीं पूछता कि आप डोनाल्ड ट्रम्प के साथ हैं या नरेंद्र मोदी के साथ? शेरमेन इस भय से मुक्त हैं कि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से भारतीय राजदूत से माफी मांगने का हक किसने दिया? उन्हें कोई देश विरोधी कहेगा, इसका भी डर नहीं है।

ह्वाइट हाऊस ने ट्रम्प के बयान को गलत नहीं कहा

मीडिया कह रहा है कि ह्वाइट हाऊस ने भी गलती मान ली है। मगर, ह्वाइट हाऊस की ओर से कहीं ऐसा नहीं कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कोई बात गलत कही है। एक बयान में जरूर कहा गया है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद पर लगाम कसने की दिशा में सख्त कदम उठाए हैं। कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मसला है। अमेरिका का दोस्त है भारत और रणनीतिक साझेदार भी।

एक समय था जब पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे के अंतरराष्ट्रीयकरण की कोशिश करता था और हम उसकी हर कोशिश को नाकाम कर दिया करते थे। आज पाकिस्तान के प्रधानमंत्री खुलेआम कश्मीर पर अमेरिकी राष्ट्रपति से मदद मांग रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति खुलेआम झूठ बोलते हुए कश्मीर के मुद्दे पर बयान दे रहे हैं। कश्मीर मुद्दे के अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिश में पाकिस्तान सफल हो गया है, इस बात पर भी हिन्दुस्तान में चर्चा नहीं हो सकती क्योंकि ऐसा कहना मोदी सरकार की असफलता होगी। और, सत्ताधारी दल व सरकार अपनी असफलता की बात सुनना ही नहीं चाहते।

ट्रम्प का इस्तेमाल करने में कामयाब रहे इमरान

इमरान ख़ान अमेरिका से अपने देश के लिए भले ही खाली हाथ लौटें, लेकिन वहां उनका स्वागत होगा। कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिश करके वे लौटे होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति से भारत के खिलाफ झूठ बोलवाकर लौटे होंगे। भारत और अमेरिका की बीच खटास पैदा करके लौटे होंगे। डोनाल्ड ट्रम्प के बयान के बाद भारत की जो स्थिति असहज हुई है क्या यह पाकिस्तान की कूटनीतिक सफलता और हिन्दुस्तान की कूटनीतिक हार नहीं है?

नरेंद्र मोदी उस झूठ पर कतई नहीं बोलेंगे जो अमेरिकी राष्ट्रपति ने उनके ही हवाले से कही है। इसके लिए तमाम तरह के बहाने के गढ़े जाएंगे। अमेरिका से संबंध का बहाना, कूटनीतिक मर्यादा की बात और भी बहुत कुछ। क्या सदन में रहते हुए प्रधानमंत्री का इस विषय पर चुप रहने को ‘चुप्पी’ कहेंगे? यह ‘चुप्पी’ भी बोल रही है कि भारतीय प्रधानमंत्री में देश की प्रतिष्ठा के प्रश्न पर बोलने की हिम्मत नहीं रही।

(प्रेम कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल उन्हें विभिन्न न्यूज़ चैनलों पर बहस करते देखा जा सकता है।)

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