Tuesday, October 19, 2021

Add News

प्रधानमंत्री जी! देश के सर्वोच्च पद पर बैठे शख्स का इस तरह झूठ बोलना शोभा नहीं देता

ज़रूर पढ़े

रामलीला मैदान में प्रधानमंत्री मोदी ने एक समुदाय को ‘इनके’ कह कर संबोधित किया। कहा कि इनके हाथ में तिरंगा देख कर सुकून होता है। कभी यही तिरंगा लेकर ये आतंकवाद के ख़िलाफ़ भी बोलेंगे। इसी के चंद मिनट पहले वो कहते धर्म के आधार पर विभाजन नहीं करते। वैसे पिछले ही हफ़्ते झारखंड में कपड़े के आधार पर पहचानने की बात कर रहे थे। रामलीला मैदान में प्रधानमंत्री फिर से एक समुदाय विशेष की तरफ इशारा करते हुए कहते हैं कि इनके हाथों का तिरंगा कभी आतंकवाद के ख़िलाफ़ भी उठे। यही सार है उनके भाषण का।लोग तालियाँ बजाने लगे। लेकिन क्या आपको पता है कि 2008 के साल में दारु़ल उलूम के नेतृत्व में 6000 मुफ़्तियों ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पर दस्तखत किए थे।

उसी साल इसी रामलीला मैदान में आतंकवाद की निंदा करते हुए बड़ी सभा हुई थी और ऐसी सभा देश के 200 शहरों में हुई थी। जिसमें कई मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने हिस्सा लिया था। यही नहीं 2015 में जब सीरिया में ISIS का ज़ोर था तब इन्हीं संगठनों ने भारत में 70 से अधिक सभाएँ कर इसकी निंदा की थी। रामलीला मैदान में आज इप्रधानमंत्री इस भरोसे बोल गए कि आप नागरिक उनकी बातों को चेक नहीं करेंगे। जो कहेंगे मान लेंगे। मीडिया भी इसे फैलाएगा और आप समझने लगेंगे कि मुसलमान तिरंगा लेकर आतंकवाद का विरोध नहीं करता है। आप तीनों तस्वीरें ज़रूर देखिए।

रामलीला मैदान में प्रघानमंत्री ने लोगों से कहा कि देश की दोनों सदनों का सम्मान कीजिए। खड़े होकर सम्मान कीजिये। बस मैदान में जोशीला माहौल बन गया। लोग खड़े होकर मोदी मोदी करते रहे। किसी को भी लगेगा कि क्या मास्टर स्ट्रोक है।

लेकिन लोकसभा और राज्य सभा में जब यह बिल लाया गया तो चर्चा में प्रधानमंत्री ने भाग लिया? जवाब है नहीं। क्या चर्चा के वक्त प्रधानमंत्री सदन में थे ? जवाब है नहीं। क्या प्रधानमंत्री ने बिल पर हुए मतदान में हिस्सा लिया? जवाब है नहीं। क्या आप यह बात जानते थे या मीडिया ने आपको यह बताया है? जवाब है नहीं। क्या मीडिया आपको बताएगा? तो जवाब है नहीं।

संसद के बनाए क़ानूनों का खुद उनकी पार्टी कई बार विरोध कर चुकी है। संसद के बनाए क़ानून की न्यायिक समीक्षा होती है। उसके बाद भी विरोध होता है। सुप्रीम कोर्ट भी अपने फ़ैसलों की समीक्षा की अनुमति देता है।

आज समर्थन में कई जगहों पर रैलियाँ हुईं। बीजेपी के कार्यकर्ता हाथ में तिरंगा लिए गोली मारने के नारे लगा रहे थे। क्या यह लोकतंत्र का सम्मान है? क्या यह संविधान का सम्मान है? क्या उसी लोकसभा और राज्यसभा में विरोध करने वाले जनता के प्रतिनिधियों का सम्मान है? जवाब है नहीं

(वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार की टिप्पणी।)

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

पैंडोरा पेपर्स: नीलेश पारेख- देश में डिफाल्टर बाहर अरबों की संपत्ति

कोलकाता के एक व्यवसायी नीलेश पारेख, जिसे अब तक का सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) 7,220 करोड़...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -

Log In

Or with username:

Forgot password?

Forgot password?

Enter your account data and we will send you a link to reset your password.

Your password reset link appears to be invalid or expired.

Log in

Privacy Policy

Add to Collection

No Collections

Here you'll find all collections you've created before.