Subscribe for notification

प्रियंका ने यूपी के गांवों में कोरोना से हो रही मौतों पर उठाए सवाल, 706 शिक्षकों की मृत्यु पर भी किया ट्वीट

उत्तर प्रदेश कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में ड्युटी करते हुए 706 शिक्षकों की मौत का मामला उठाया है। एक के बाद एक छः ट्वीट की श्रृंखला में कांग्रेस महासचिव ने कहा है, “उत्तर प्रदेश में 700 से अधिक शिक्षकों की मृत्यु हो गई है, जिसमें एक गर्भवती महिला भी शामिल है, जिसे पंचायत चुनाव के लिए मतदान ड्यूटी में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया था।

उन्होंने कहा है, “इन चुनावों को यूपी के लगभग 60,000 ग्राम सभाओं में आयोजित किया गया है, दूसरी लहर के विनाशकारी हमले के बारे में तनिक भी विचार किये बिना।”

उन्होंने योगी सरकार और प्रशासन पर कोरोना से होने वाली मौत के आंकड़ों को कमतर करके दर्ज करने का आरोप लगाते हुए अपने ट्वीट में कहा, “कोरोना की दूसरी लहर की भयावहता के बारे में एक बार भी विचार किए बिना उप्र की लगभग 60,000 ग्राम पंचायतों में इन चुनावों को कराया गया। बैठकें हुईं, चुनाव अभियान चला और अब ग्रामीण इलाकों में कोरोना का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है।”

एक के बाद एक छः सिलसिलेवार ट्वीट करते हुए उन्होंने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में लोगों की बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है जो कि झूठे सरकारी आंकड़ों से कहीं ज़्यादा हैं।

कांग्रेस महासचिव ने आगे कहा, “पूरे उप्र के ग्रामीण इलाकों में लोगों की घरों में मृत्यु हो रही है और इनको कोविड से होने वाली मौतों के आंकड़ों में भी नहीं गिना जा रहा है, क्योंकि ग्रामीण इलाकों में जांच ही नहीं हो रही है। उन्होंने यह भी लिखा कि सरकार का पूरा प्रयास सच दबाने की तरफ है और उसका अधिकतम प्रयास जनता और लोगों की दिन-रात सेवा कर रहे मेडिकल समुदाय को भयभीत करने में रहा है। कांग्रेस महासचिव ने अपने आखिरी ट्वीट में कहा है, “उत्तर प्रदेश में जो घट रहा है, वह मानवता के खिलाफ अपराध से कम नहीं है और राज्य निर्वाचन आयोग इसमें भागीदार है।”

अपने ट्वीट के साथ उन्होंने उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा जारी की गई मृत शिक्षकों की सूची भी संलग्न की है।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पहली बार ये मामला नहीं उठाया है। दो दिन पहले भी उन्होंने इस मसले पर ट्वीट करके चुनाव में ड्युटी करने वाले शिक्षकों की मौत पर योगी सरकार को घेरा था।

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इस मसले पर ट्वीट किया है। उन्होंने कहा है कि जिन अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारियों की मौत कोरोना संक्रमण की वजह से हुई है उन्हें सरकार 50 लाख की आर्थिक सहायता दे।

कोरोना संक्रमण के बीच उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराए जाने को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। हाई कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण से मृत सरकारी कार्मिकों की संख्या का ब्योरा तलब किया है। कोरोना संक्रमण की वजह से ड्यूटी में तैनात शिक्षकों के मामले में संज्ञान लेते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया है जिस पर सुनवाई तीन मई को होगी।

सरकार को आंकड़ों पर भरोसा नहीं
इस बाबत पूछे जाने पर राज्य के अपर मुख्य सचिव सूचना नवनीत सहगल हैरानी जताते हुए कहते हैं, “चुनावी ड्यूटी में शामिल मृतकों की सूची दो दिन में 135 से बढ़कर 706 तक कैसे पहुंच गई?” नवनीत सहगल 706 शिक्षकों की मौत के आंकड़ों का सत्यापन कराने की बात कहते हैं। वो कहते हैं, “राज्य सरकार भी इन आंकड़ों का सत्यापन कराएगी और यदि ऐसा सही हुआ तो परिजनों को उचित और नियमानुसार मदद दी जाएगी।

निर्वाचन में ड्यूटी और बाक़ी प्रक्रियाएं चुनाव आयोग के माध्यम से तय की गई हैं। हालांकि शिक्षक और दूसरे कर्मचारी चूंकि राज्य सरकार के कर्मचारी थे, इसलिए यदि उनकी मौत हुई है तो सरकार उसका संज्ञान लेगी और उनके परिजनों को नियमानुसार उचित मदद मुहैया कराई जाएगी।”

उत्तर प्रदेश सीनियर बेसिक शिक्षक संघ के ज़िलाध्यक्ष डॉ. महेशकांत शर्मा बताते हैं कि ज़िले के शिक्षक 15 अप्रैल को पंचायत चुनाव में चुनाव ड्यूटी करके लौटे थे। इसके बाद से ही वे बुखार, ज़ुकाम और खांसी से पीड़ित हो गए। इन सभी का कोरोना टेस्ट पॉज़िटिव था, जिनमें से छह लोगों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

शिक्षकों के परिवार में कोरोना संक्रमितों की कोई गिनती ही नहीं
प्राथमिक शिक्षक संघ ने राज्य निर्वाचन आयोग और यूपी के मुख्यमंत्री को चुनाव ड्यूटी में लगे 706 शिक्षकों की मौत की सूची सौंपते हुए दो मई को होने वाली मतगणना को रोकने की मांग की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

प्राथमिक शिक्षक संघ ने आरोप लगाया है कि ट्रेनिंग से लेकर मतदान तक राज्य निर्वाचन आयोग ने कोरोना गाइडलाइन्स का कहीं भी पालन नहीं कराया, जिससे हालात भयावह हो गए। शिक्षक संघ ने ज़िलावार एक सूची जारी करते हुए दावा किया है कि चुनाव ड्यूटी करने वाले कम से कम 706 शिक्षक कोविड संक्रमण से जान गंवा चुके हैं और बड़ी संख्या में शिक्षक संक्रमण के बाद बीमार हो गए हैं। संघ का कहना है कि शिक्षकों के परिवार में संक्रमितों की कोई गिनती ही नहीं है।

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on May 1, 2021 5:12 pm

Share