Friday, January 21, 2022

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पेगासस स्नूपगेट: एल्गार परिषद के आरोपियों के वकीलों की भी हो रही थी जासूसी!

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पेगासस जासूसी की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित समिति के समक्ष प्रभावित व्यक्तियों ने अपने फोन की हैकिंग कि जानकारी देना शुरू कर दिया है। भीमा कोरेगांव के एल्गार परिषद मामले में फंसे कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों व उनके वकीलों ने पेगासस जासूसी मामले की जांच कर रही सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त तकनीकी समिति को लिखा है कि उनके फोन पर भी पेगासस सॉफ्टवेयर का हमला हुआ था। तीन जनवरी को समिति ने एक नोटिस जारी करके लोगों से अपील की थी कि अगर उन्हें लगता है कि उनका फोन भी पेगासस हमले का शिकार हुआ था तो वे समिति से संपर्क कर सकते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हेनी बाबू और वकील व सामाजिक कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज ने भी समिति के समक्ष अपनी बात भेजी है। एल्गार परिषद मामले में भारद्वाज हाल ही में जमानत पर रिहा हुई हैं, जबकि हेनी बाबू अभी जेल में हैं। इसलिए समिति के सामने हेनी बाबू ने अपना पक्ष पत्नी जेनी रोवेना के माध्यम से भेजा है।

रिपोर्ट के अनुसार, एल्गार परिषद मामले में कई आरोपियों की पैरवी कर रहे वकील निहाल सिंह राठौड़ ने इस संबंध में समिति को लिखित में भेजा है। उनके साथ ही एक अन्य वकील जगदीश मेश्राम और सांस्कृतिक समूह कबीर कला मंच की सदस्य रूपाली जाधव ने भी समिति को इस संबंध में लिखा है। ये तीनों उन लोगों में शुमार हैं, जिन्हें 2019 में टोरंटो विश्वविद्यालय की सिटीजन लैब ने उनके फोन में हुई संभावित जासूसी के संबंध में सबसे पहले सूचित किया था।

राठौड़ ने अपने आवेदन में उल्लेख किया है कि उन्हें 2019 की शुरुआत में वॉट्सऐप पर अनजान अंतरराष्ट्रीय नंबरों से वीडियो कॉल आने शुरू हुए थे, जिनका जवाब देने की कोशिश करने पर वे कट जाते थे। ऐसा बार-बार होने पर तंग आकर उन्होंने उन नंबरों को ब्लॉक कर दिया। राठौड़ ने लिखा है कि इसके बावजूद भी अन्य अंतरराष्ट्रीय नंबरों से बार-बार कॉल आने पर उन्होंने आधिकारिक तौर पर वॉट्सऐप से इसकी शिकायत की।

एल्गार परिषद मामले में ही गिरफ्तार सुरेंद्र गाडलिंग की पत्नी मीनल गाडलिंग, मेश्राम और पिछले वर्ष अप्रैल में गुजरे सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक और अभिनेता वीरा साथीदार भी ऐसे ही संदिग्ध कॉल आने की बात कह चुके हैं। राठौड़ ने अपने पत्र में लिखा है कि उनका शक तब यकीन में बदल गया जब सिटीजन लैब के वरिष्ठ शोधकर्ता जॉन स्कॉट-राइलटन ने उन्हें फोन करके जासूसी करने वाले इस सॉफ्टवेयर की जानकारी दी। जाधव, मेश्राम, गाडलिंग और साथीदार से भी सिटीजन लैब ने संपर्क किया था। राठौड़ का कहना है कि वे तब से कई संवेदनशील मामलों की पैरवी कर रहे हैं, जिनमें नागपुर केंद्रीय जेल में माओवादियों के साथ संपर्क होने के आरोप में उम्र कैद की सजा काट रहे जीएन साईबाबा का मामला भी शामिल है। उन्होंने लिखा है कि उनके मुवक्किलों (क्लाइंट्स) से जुड़ी अहम जानकारियां खुफिया तरीके से हासिल करने के लिए उनके फोन की जासूसी की जा रही थी।

एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया कंसोर्टियम, जिसमें द वायर भी शामिल था, ने पेगासस प्रोजेक्ट के तहत यह खुलासा किया था कि इजरायल की एनएसओ ग्रुप कंपनी के पेगासस स्पायवेयर के जरिये नेता, पत्रकार, कार्यकर्ता, सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों के फोन कथित तौर पर हैक कर उनकी निगरानी की गई या फिर वे संभावित निशाने पर थे। इस कड़ी में 18 जुलाई से द वायर सहित विश्व के 17 मीडिया संगठनों ने 50,000 से ज्यादा लीक हुए मोबाइल नंबरों के डेटाबेस की जानकारियां प्रकाशित करनी शुरू की थी, जिनकी पेगासस स्पायवेयर के जरिये निगरानी की जा रही थी या वे संभावित सर्विलांस के दायरे में थे। इस एक पड़ताल के मुताबिक, इजरायल की एक सर्विलांस तकनीक कंपनी एनएसओ ग्रुप के कई सरकारों के क्लाइंट्स की दिलचस्पी वाले ऐसे लोगों के हजारों टेलीफोन नंबरों की लीक हुई एक सूची में 300 सत्यापित भारतीय नंबर हैं, जिन्हें मंत्रियों, विपक्षी नेताओं, पत्रकारों, न्यायपालिका से जुड़े लोगों, कारोबारियों, सरकारी अधिकारियों, अधिकार कार्यकर्ताओं आदि द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है।

यह खुलासा सामने आने के बाद देश और दुनिया भर में इसे लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। एनएसओ ग्रुप यह मिलिट्री ग्रेड स्पायवेयर सिर्फ सरकारों को ही बेचती हैं। भारत सरकार ने पेगासस की खरीद को लेकर न तो इनकार किया है और न ही इसकी पुष्टि की है।

संयुक्त राज्य अमेरिका में 1970 के वाटरगेट घोटाले की तुलना करने और संसद में एक जांच आयोग की मांग को लेकर पेगासस हैकिंग के खुलासे ने पोलैंड को हिलाकर रख दिया है। पोलैंड के सबसे शक्तिशाली राजनेता ने स्वीकार किया है कि देश ने इजरायली निगरानी सॉफ्टवेयर निर्माता एनएसओ ग्रुप से उन्नत स्पाइवेयर खरीदा है, लेकिन इस बात से इनकार किया कि इसका इस्तेमाल उनके राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा था। पोलैंड की सत्तारूढ़ रूढ़िवादी पार्टी, कानून और न्याय के नेता जारोस्लाव काज़िंस्की ने एक साक्षात्कार में कहा कि कई देशों में गुप्त सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं कवि की उमंग अपराध और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सॉफ्टवेयर।

काकज़िंस्की ने कहा कि इस तरह के स्पाइवेयर का उपयोग पारगमन में डेटा को मास्क करने के लिए एन्क्रिप्शन के बढ़ते उपयोग के जवाब में हुआ, जिसने पहले की निगरानी तकनीकों को हराया। फोन हैक करके, यह अधिकारियों को संचार की निगरानी करने देता है, साथ ही वास्तविक समय की बातचीत जहां वे एन्क्रिप्टेड नहीं हैं। यह बुरा होगा यदि पोलिश सेवाओं में इस प्रकार का उपकरण नहीं होता,” काकज़िन्स्की ने साप्ताहिक पत्रिका सिएसी के सोमवार संस्करण में प्रकाशित होने वाले एक साक्षात्कार में कहा। wPolityce.pl समाचार पोर्टल ने शुक्रवार को अंश प्रकाशित किए।

साक्षात्कार द एसोसिएटेड प्रेस द्वारा विशेष रिपोर्टों का अनुसरण करता है कि टोरंटो विश्वविद्यालय में एक साइबर वॉचडॉग समूह सिटीजन लैब ने पाया कि तीन पोलिश सरकार के आलोचकों के साथ हैक किया गया था एनएसओ का पेगासस।

गुरुवार को, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने स्वतंत्र रूप से सिटीजन लैब की इस खोज की पुष्टि की कि सेन क्रिज़्सटॉफ़ ब्रेज़ा को 2019 में कई बार हैक किया गया था, जब वह विपक्ष का संसदीय चुनाव अभियान चला रहे थे। ब्रेजा के फोन से चुराए गए पाठ संदेशों को पोलैंड में राज्य-नियंत्रित टीवी द्वारा प्रसारित किया गया था और दौड़ की गर्मी में एक धब्बा अभियान के हिस्से के रूप में प्रसारित किया गया था, जिसे लोकलुभावन सत्ताधारी पार्टी ने जीत हासिल की थी। ब्रेजा अब कहते हैं कि चुनाव अनुचित था क्योंकि सत्ताधारी पार्टी के पास उनके अभियान की सामरिक सोच और योजनाओं तक पहुंच होगी।

काकज़िंस्की ने कहा कि उन्हें इस तरह के आयोग के गठन का कोई कारण नहीं दिखता है, और उन्होंने इस बात से इनकार किया कि 2019 के चुनाव के परिणाम में निगरानी ने कोई भूमिका निभाई। यहाँ कुछ भी नहीं है, कोई तथ्य नहीं, सिवाय विपक्ष के उन्माद के। कोई पेगासस मामला नहीं है, कोई निगरानी नहीं है, ”कैज़िन्स्की ने कहा। “कोई पेगासस नहीं, कोई सेवा नहीं, कोई गुप्त रूप से प्राप्त जानकारी ने 2019 के चुनाव अभियान में कोई भूमिका नहीं निभाई। वे हार गए क्योंकि वे हार गए। उन्हें आज ऐसे बहाने नहीं तलाशने चाहिए।अन्य दो पोलिश लक्ष्यों की पुष्टि की गई नागरिक प्रयोगशाला रोमन गीर्टिच, एक वकील थे जो कई राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में विपक्षी राजनेताओं का प्रतिनिधित्व करते थे, और एक स्वतंत्र दिमाग वाले अभियोजक ईवा रज़ोसेक थे।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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