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ऑक्सीजन संकट पर दिल्ली हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, कहा- भगवान भरोसे चल रहा है देश

देश के अलग-अलग पांच हाई कोर्ट में भी कोरोना को लेकर सुनवाई चल रही है, लेकिन इन सब के बीच सुप्रीम कोर्ट ने आज स्वत: संज्ञान ले लिया और संकेत भी दे दिए हैं कि अलग-अलग हाई कोर्ट में लंबित केस को सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर किया जा सकता है। बता दें कि चीफ जस्टिस बोबडे शुक्रवार को रिटायर हो जाएंगे। इलाहाबाद हाई कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट और बांबे हाई कोर्ट समेत तमाम हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। ऐसे में मोदी सरकार के खिलाफ़ एक नकरात्मक माहौल बना है और लोगों में जबरदस्त गुस्सा भी है, जबकि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार के प्रभाव में काम करता दिखता है। हाल ही में हाईकोर्ट द्वारा उत्तर प्रदेश के पांच शहरों में लॉकडाउन लगाने के फैसले के खिलाफ़ योगी सरकार के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर पूछा है कि उनके पास कोविड-19 से निपटने के लिए क्या नेशनल प्लान है। साथ ही कोर्ट ने हरीश साल्वे को एमिकस क्यूरी भी नियुक्त किया है। सुप्रीम कोर्ट ने चार अहम मुद्दों पर केंद्र सरकार से राष्ट्रीय योजना मांगी है। इसमें पहला- ऑक्सीजन की सप्लाई, दूसरा- दवाओं की सप्लाई, तीसरा- वैक्सीन देने का तरीका और प्रक्रिया और चौथा- लॉकडाउन करने का अधिकार सिर्फ राज्य सरकार को हो, कोर्ट को नहीं। इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल यानी कल होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में छह अलग-अलग हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है, इसलिए ‘कंफ्यूजन और डायवर्जन’ की स्थित है। दिल्ली, बॉम्बे, सिक्किम, कलकत्ता, इलाहाबाद और ओडिशा, 6 हाई कोर्ट में कोरोना संकट पर सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि यह ‘कंफ्यूजन और डायवर्जन’ कर रहा है, एक हाई कोर्ट को लगता है कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में प्राथमिकता है, एक को लगता है कि उनका अधिकार क्षेत्र है।

इस बाबत सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से यह भी पूछा कि क्या वह हाई कोर्ट में कार्यवाही पर रोक लगाएगी। इस पर कोर्ट ने कहा कि सरकार अपनी योजनाओं को हाई कोर्ट में प्रस्तुत कर सकती है, यदि आपके पास ऑक्सीजन के लिए एक राष्ट्रीय योजना है तो निश्चित रूप से हाई कोर्ट इसे देखेगा।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के लॉकडाउन वाले आदेश का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह नहीं चाहती कि हाई कोर्ट ऐसे आदेश पारित करें। सीजेआई एसए बोबडे ने कहा, “हम राज्य सरकारों के पास लॉकडाउन की घोषणा करने की शक्ति रखना चाहते हैं, न्यायपालिका द्वारा इसका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।”

गौरतलब है कि कोरोना के बेतहाशा बढ़ते मामले और देश के तमाम अस्पतालों में ऑक्सीजन, बेड और एंटिवॉयरल दवाइयों की कमी पर दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट लगातार केंद्र सरकार को फटकार लगा रहे हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने आज गुरुवार को केंद्र को निर्देश दिया कि आवंटन आदेश और यह सुनिश्चित करने के लिए कि मेडिकल ऑक्सीजन की मुक्त आवाजाही की अनुमति देने वाला एमएचए आदेश तुरंत लागू किया जाए, और इसका अनुपालन न करने पर आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। केंद्र को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि हालांकि सरकार ने आवंटन आदेश पारित किया था, लेकिन इसे गंभीरता से लागू नहीं किया गया। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, “जैसा कि यह खड़ा है, हम सभी जानते हैं कि यह देश भगवान द्वारा चलाया जा रहा है।”

वहीं ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में आज गुरुवार को सुनवाई हुई। MHA के इस ऑर्डर की जानकारी SG तुषार मेहता ने कोर्ट को दी, जिसमें कहा गया है कि ऑक्सीजन टैंकरों के मूवमेंट में किसी राज्य द्वारा कोई बाधा नहीं डाली जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हम वो कदम उठा रहे हैं कि दिल्ली तक ऑक्सीजन टैंकर पहुंचने में दिक्कत न हो। MHA के एक अधिकारी की ओर से हाई कोर्ट को बताया गया कि सुबह हरियाणा में दिक्कत हुई। दो टैंकर 30 MT ऑक्सीजन लेकर दिल्ली के निकले, लेकिन ये कहकर उन्हें रोक लिया गया कि हरियाणा में ऑक्सीजन की ज़्यादा ज़रूरत है।

MHA सेक्रेटरी ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि दिल्ली के नोडल अफसर और हरियाणा चीफ सेक्रेटरी से बात हुई है। ये आश्वस्त किया गया है कि अब ऑक्सीजन टैंकर के मूवमेंट में कोई दिक्कत नहीं होगी। हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं कि टैंकर न रोके जाएं।

इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर मामला सुप्रीम कोर्ट जाता है तो हमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन ये मामला ऐसा भी नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर होने से पहले हम इसको यूं ही टाल दें। तुषार मेहता ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि उनकी ओर से ये मामला सुप्रीम कोर्ट में मेंशन नहीं किया गया। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में इस MHA के ऑर्डर को रिकॉर्ड पर लिया। कहा कि केंद्र की ओर से इससे पहले बताया गया था कि दिल्ली को 480 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई होगी, लेकिन सिर्फ 200-250 मीट्रिक ऑक्सीजन ही दिल्ली को कल मिल पाई है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने आगे कहा कि हमें पता चला है कि पानीपत में लोकल ऑथॉरिटी की एयर लिक्विड पानीपत की ओर से दिल्ली को आने वाले ऑक्सीजन के टैंकर को रोका गया। कल फरीदाबाद बार्डर पर कुछ घंटे तक दिल्ली को आने वाली सप्लाई को रोका गया। हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत जारी MHA के आदेश के अंतर्गत आने वाली तमाम ऑथॉरिटी इस आदेश पर अमल सुनिश्चित करें, अन्यथा क्रिमिनल कार्रवाई को भुगतान होगा।

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि आप ये सुनिश्चित करें कि बंटवारे के लिहाज से दिल्ली को ऑक्सीजन की पर्याप्त सप्लाई मिल जाए। दिल्ली की ओर आने वाले ऑक्सीजन टैंकर को दूसरे राज्यों में रोका न जाए। उन्हें रास्ते में दिक्कत न हो, इसलिए सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।

वहीं इससे पहले कल बुधवार को दिल्‍ली के मैक्‍स अस्पताल में ऑक्‍सीजन की कमी को लेकर दिल्‍ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई थी। इस दौरान अस्पतालों में ऑक्सीजन की किल्लत पर हाई कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि क्या सरकार के लिए इंसानी जीवन का कोई महत्व नहीं है?

कोर्ट ने केंद्र सरकार से औद्योगिक इस्‍तेमाल के लिए दी जा रही ऑक्‍सीजन की सप्‍लाई को तुरंत रोकने को कहा था। हाई कोर्ट ने कहा था कि हम लोगों को ऑक्‍सीजन की कमी के कारण मरता हुआ नहीं देख सकते। कोर्ट ने कल कहा था कि आप ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाने के लिए सभी संभावनाओं की तलाश नहीं कर रहे। भीख मांगें, उधार लें या चोरी करें।

जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की पीठ ने कल कहा था कि स्थिति विकट है। अस्‍पतालों को तुरंत ऑक्‍सीजन दें। दिल्‍ली हाईकोर्ट ने कहा है, “हमारी चिंता सिर्फ दिल्‍ली ही नहीं बल्कि देश के हर हिस्‍से के लिए है।”

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on April 22, 2021 9:24 pm

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