Friday, December 2, 2022

केरल हाईकोर्ट से नौ विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को राहत:अंतिम आदेश तक पद पर बने रहेंगे  

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केरल हाईकोर्ट ने नौ कुलपतियों को राहत देते हुए आदेश दिया है कि राज्यपाल के फाइनल आदेश तक कोई वाइस चांसलर नहीं हटेगा। राज्यपाल के आदेश के खिलाफ इन कुलपतियों ने हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया है। सोमवार की शाम को याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि चूंकि, राज्यपाल ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है इसलिए अभी अंतिम निर्णय आने तक कुलपति अपना इस्तीफा नहीं देंगे और पद पर बनें रहेंगे। राज्य के सभी नौ कुलपतियों ने इस्तीफा देने से इनकार किया है।

जस्टिस देवन रामचंद्रन की एकल पीठ ने कहा कि ये सभी अपने पद पर तब तक बने रह सकते हैं जब तक कि चांसलर/राज्यपाल द्वारा उनके खिलाफ चांसलर द्वारा आज जारी कारण बताओ नोटिस के आधार पर अंतिम आदेश पारित नहीं कर दिया जाता। एकल पीठ ने 23 अक्टूबर को जारी राज्यपाल के पत्र पर आपत्ति व्यक्त की जिसमें कुलपतियों को आज सुबह 11 बजे तक इस्तीफा देने के लिए कहा गया था। एकल पीठ ने कहा कि किसी को इस्तीफा देने के लिए नहीं कहा जा सकता। एकल पीठ ने आदेश में कहा कि यह कहने के लिए ज्यादा फैसलों की जरूरत नहीं है कि किसी को इस्तीफा देने के लिए नहीं कहा जा सकता है।

एकल पीठ ने इस तथ्य का संज्ञान लिया कि कुलाधिपति ने आज याचिकाकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया। इसका अर्थ है कि राज्यपाल द्वारा कल जारी किए गए निर्देशों की प्रासंगिकता खत्म हो गई है और कुलपति अभी भी सेवा में हैं। एकल पीठ ने कहा कि एक उचित जांच किया जाना चाहिए था, खासकर जब याचिकाकर्ताओं के पास उनके तथ्यात्मक परिदृश्य के विशिष्ट मामले थे।

एकल पीठ ने पक्षकारों के सभी तर्कों को खुला छोड़ दिया है, जिसमें यह तर्क भी शामिल है कि राज्यपाल के पास कार्रवाई शुरू करने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है। 23 अक्टूबर को राज्यपाल, विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति ने नौ कुलपतियों को कल सुबह 11.30 बजे तक इस्तीफा देने का निर्देश जारी किया, इस आधार पर कि उनकी नियुक्तियां अवैध थीं। राज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला दिया, जिसमें एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के वीसी के रूप में डॉ एमएस राजश्री की नियुक्ति को इस आधार पर रद्द कर दिया गया था कि सर्च कमेटी ने तीन से पांच नाम के पैनल के बजाय कुलाधिपति को केवल एक नाम भेजा था। उपरोक्त निर्णय का हवाला देते हुए राज्यपाल ने कहा कि अगर गैर-कानूनी तरीके से पैनल का गठन किया गया तो कुलपति की नियुक्ति शून्य होगी।

उच्च न्यायालय के समक्ष कुलपतियों ने एक तर्क दिया कि कुलपतियों के इस्तीफे का निर्देश देने के लिए कुलाधिपति के पास कोई वैधानिक शक्ति नहीं है। कुलाधिपति संबंधित विश्वविद्यालय अधिनियमों द्वारा उन्हें प्रदत्त शक्तियों से परे कार्य नहीं कर सकते हैं। याचिका में कहा गया है कि कुलाधिपति के पास कोई सलाहकार क्षेत्राधिकार या निहित सामान्य शक्ति नहीं है कि वे कुलपतियों से पद से इस्तीफा देने का अनुरोध करें।

आज सुनवाई के दौरान एक वीसी की ओर से सीनियर एडवोकेट पी. रवींद्रन द्वारा यह प्रस्तुत किया गया कि विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, “कुलाधिपति किसी कुलपति को केवल दुर्विनियोजन, या कुप्रबंधन के आधार पर हटा सकते हैं और कहा कि इन शक्तियों का प्रयोग भी उचित प्रतिबंधों के अधीन है। वरिष्ठ वकील ने प्रस्तुत किया कि इस मामले में ध्यान देने योग्य बात यह थी कि कुलाधिपति ने कुलपतियों की नियुक्तियों को शून्य घोषित करने के बाद कारण बताओ नोटिस जारी किया था”।

वकील ने कहा कि एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के वीसी से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को व्यक्तिगत तथ्यों और परिस्थितियों का पता लगाए बिना अन्य वीसी के खिलाफ आंख बंद करके लागू नहीं किया जा सकता है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि कुलाधिपति ने कुलपतियों को सुनवाई का अवसर दिए बिना निर्देश जारी करके नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। न्यायालय के इस सवाल पर कि क्या कुलाधिपति को मूकदर्शक बने रहना है, जब उन्हें पता चलता है कि नियुक्ति ही गलत थी, वरिष्ठ वकील रवींद्रन द्वारा यह दलील दी गयी कि कुलाधिपति नियुक्ति प्राधिकारी हैं वो केवल उन्हीं शक्तियों का उपयोग कर सकता है जो उन्हें क़ानून द्वारा प्रदान की गई हैं; यदि ऐसा है, तो यह नोटिस पूरी तरह से अधिकार के बिना है।याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गयी कि जब तक इस तरह की नियुक्ति को चुनौती नहीं दी जाती, तब तक कुलाधिपति स्वत: संज्ञान से कार्य नहीं कर सकते।

सीनियर एडवोकेट रंजीत थम्पन द्वारा इस दलील पर कि राज्यपाल राजनीति में उथल-पुथल पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं, एकल पीठ ने जोर देकर कहा कि यह पूरी तरह से कानून के पहलू पर ध्यान केंद्रित रहेगा, और सभी वकीलों से अनुरोध किया कि राजनीति का जिक्र करने से बचें।

दरअसल, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने राज्य के सभी नौ कुलपतियों से सोमवार तक इस्तीफा मांगा था। लेकिन समय सीमा बीतने के बाद भी कुलपतियों ने जब इस्तीफा नहीं दिया तो उनको कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उधर, कुलपतियों ने हाईकोर्ट में राज्यपाल के आदेश को चैलेंज किया था। राज्य के सभी नौ कुलपतियों ने इस्तीफा देने से इनकार किया है।

हाईकोर्ट में सुनवाई के पहले राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने प्रेस वार्ता में बताया कि कुलपतियों ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है इसलिए उनके खिलाफ शो कॉज नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि कुलपतियों से इस्तीफा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मांगा गया था, क्योंकि सर्च कमेटी में नियुक्ति में अनियमितता और यूजीसी के नियमों की अनदेखी की पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सबको कारण बताओ नोटिस जारी कर यह पूछा गया है कि इस्तीफा नहीं देने के बाद क्यों नहीं आपकी नियुक्ति को शून्य कर दिया जाए। इस्तीफा के सवाल पर आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि उन्होंने केवल कुलपतियों से एक सम्मानजनक रास्ता सुझाया था क्योंकि मैंने किसी को बर्खास्त नहीं किया है।

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है। वामपंथी सरकार का नेतृत्व कर रहे पिनराई विजयन ने राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के इस्तीफे को लेकर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के पास ऐसी कोई शक्ति नहीं जिससे वह किसी का इस्तीफा मांग सकें। वह संविधान और लोकतंत्र के विरूद्ध काम कर रहे हैं।

सीएम विजयन ने कहा है कि गवर्नर, संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ काम कर रहे हैं। राज्यपाल का यह कदम लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार और अकादमिक रूप से स्वतंत्र माने जाने वाले विश्वविद्यालयों की शक्तियों का अतिक्रमण है। वह विश्वविद्यालयों को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कुलपतियों की नियुक्ति अवैध है तो इसके लिए राज्यपाल को जिम्मेदारी लेनी चाहिए क्योंकि कुलपतियों की नियुक्ति तो उनके द्वारा ही की जाती है।

दरसअल, सुप्रीमकोर्ट ने एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वाइस-चांसलर डॉ राजश्री एमएस की नियुक्ति को यूजीसी के नियमों के विपरीत होने के कारण रद्द कर दिया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार, सर्च कमेटी को वीसी के पद के लिए कम से कम तीन योग्य व्यक्तियों के एक पैनल की सिफारिश करनी चाहिए थी लेकिन राजश्री के मामले में केवल उनके नाम की सिफारिश की गई थी।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने रविवार को केरल के सभी नौ यूनिवर्सिटीज के वाइस-चांसलर्स को इस्तीफा देने को कहा था।राज्यपाल ने नौ विश्वविद्यालय केरल विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, कोचीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, केरल मत्स्य पालन और महासागर अध्ययन विश्वविद्यालय, कन्नूर विश्वविद्यालय, एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, कालीकट विश्वविद्यालय और थुंचथ एज़ुथाचन मलयालम विश्वविद्यालय के कुलपतियों से इस्तीफे की मांग की थी।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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