Saturday, October 16, 2021

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उन्नाव गैंगरेप पीड़िता की दास्तान: “रेप के बाद उसने मेरे आंसू पोछे और कहा मेरे लिए नौकरी की व्यवस्था करेगा”

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नई दिल्ली/ उन्नाव। उसने बताया कि 11 साल की उम्र में उसको पहली बार किया गया टच मासूमी भरा नहीं था। वह इस बात को जानती थी। उन्नाव गैंगरेप पीड़िता के मुताबिक उसको इस भ्रम और भय से बाहर निकल कर बोलने में बहुत ज्यादा समय लग गया। गौरतलब है कि उस नाबालिग बच्ची ने बीजेपी के विधायक कुलदीप सिंह पर बलात्कार का आरोप लगाया है।

वह यह नहीं जानती थी कि किससे शिकायत की जाए और एक ऐसे शख्स के बारे में क्या कहना है जिसने उसे इन असहज स्थितियों में लाकर खड़ा कर दिया है। ऊपर से वह कोई और नहीं बल्कि उसके गांव में भीषण प्रभाव रखने वाला कुलदीप सिंह सेंगर था। वह आदमी जिसे वह दद्दू कहकर बुलाती है और उसके पिता जिसके लिए काम करते हैं। वह इंसान जो लगातार 15 सालों से विधायक है और जिसे इलाके में सर्वशक्तिमान माना जाता है।

उसने बुरे लोगों के प्रभाव से बचाने की बात कहकर उसके स्कूल जाने पर रोक लगा दी थी। और अक्सर उसे अपने कमरे में घंटों बंद रखता था। जब भी वह उसके घर से बाहर निकलती उसके आदमी उसे घूरा करते थे। इन सब प्रताड़नाओं से परेशान होकर उसने आखिर में कक्षा 8 में स्कूल ड्राप करने का फैसला ले लिया। जब उसने इस बात को अपनी मां से बताने की कोशिश की तो उन्होंने उसे सीधे खारिज कर दिया। उससे कहा गया कि वह शांत रहे और उसको सहती रहे।

4 जून, 2017 को सेंगर ने उसे अपने घर बुलाया और उसे अपने रूम में ले गया और फिर उसके साथ बलात्कार किया। इस बीच सेंगर की एक सहयोगी बाहर तैनात रही। उस समय वह 16 साल की थी। बच्ची का कहना था कि इस तरह की एक मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले शख्स के खिलाफ बोलने के लिए उसे बहुत साहस जुटाना पड़ा।

सेंगर की पृष्ठभूमि

माखी में सेंगर का शानदार बंग्ला है। सेंगर लगातार 16 सालों से विधायक है और चौथी बार वह बीजेपी के टिकट से बांगरमऊ से जीता है। इस बीच वह तीन अलग-अलग दलों में रहा। 2002 में वह नौ सदर से बीएसपी के टिकट पर जीता था। और फिर 2007 और 2012 में बांगरमऊ और भगवंतनगर सीट से एसपी के टिकट पर विजय हासिल की थी।

सेंगर के लिए राजनीति मूलत: एक पारिवारिक व्यवसाय है। विधायक की मां चिन्नी देवी लगातार 50 सालों तक ग्राम प्रधान रहीं। उसकी पत्नी संगीता उन्नाव जिला परिषद की अध्यक्ष हैं। और उसके भाई अतुल की पत्नी माखी गांव की प्रधान हैं।

एक स्थानीय शख्स ने उसके बारे में बात करते हुए बताया कि “वह बहुत प्रभावशाली है। पीढ़ियों से सत्ता उसके पास रही है और यहां कोई भी उस पर सवाल नहीं खड़ा कर सकता है।”

उसने आगे कहा कि “वह एक बालू के खनन का भी व्यवसाय करता है और उसके पास दो घाट हैं। हालांकि वह हर बार जीत जाता है क्योंकि लोगों की मांगों को सुनता है और उनके लिए काम करता है।”  

हालांकि उसके भाई लोगों के सामने परेशानियां खड़ी करने के लिए कुख्यात हैं। खासकर स्थानीय महिलाओं का यौन उत्पीड़न करने के मामले में जिसके चलते उनके खिलाफ अपराध के ढेर सारे मामले दर्ज हैं।

बलात्कार की घटना

किशोरी का कहना था कि 4 जून, 2017 को सेंगर ने नौकरी का भरोसा देकर उसे अपने घर बुलाया। जब वह पहुंची तो वह उसे अपने कमरे में ले गया और वहां उसका बलात्कार किया। इस बीच निगरानी रखने के लिए उसकी एक सहयोगी बाहर बैठी हुई थी।

उसका कहना था कि “मैं चिल्लायी। मैं जानती थी कि लोग बरामदे में बैठे हुए हैं लेकिन कोई भी सहायता के लिए आगे नहीं आया। बलात्कार करने के बाद उसने सीधे मुझे अपने घर जाने के लिए कहा।”

“मैं रो रही थी। उसने मेरे आंसू पोछे और मुझे बताया कि वह मेरे लिए एक अच्छी नौकरी की व्यवस्था करेगा। जब मैंने उससे बताया कि मैं शिकायत दर्ज कराऊंगी तो उसने मेरे पिता और चार साल के छोटे भाई की हत्या की धमकी दे डाली।”

उसने बताया कि “वह घर लौट गयी और बिल्कुल शांत रही।” “मुझे दर्द हो रहा था। मेरी मां लगातार पूछ रही थी कि क्या मैं ठीक हूं। मेरी बहनें पूछ रहीं थीं कि मैं क्यों मुस्करा नहीं रही हूं। लेकिन मैं शांत रही।”

अपहरण, बेहोशी और गैंगरेप

उसने बताया कि इस प्रकरण के सात दिन बाद जब वह एक प्लंबर को बुलाने के लिए अपने घर से बाहर निकल रही थी उसी समय तीन आदमियों द्वारा एक एसयूवी में उसका अपहरण कर लिया गया। अगले 9 दिनों तक उसे कथित तौर पर नशीला पदार्थ देने के बाद बेहोश करके उसका गैंग रेप किया जाता रहा। इस दौरान लगातार अलग-अलग स्थानों पर उसे ले जाया गया।

उसने बताया कि “अपहर्ता लगातार हमें बेहोश करके रखे रहे….एक बार मैं भागने की भी कोशिश की लेकिन मुझे पकड़ लिया गया और फिर नशीला पदार्थ देकर बेहोश कर दिया गया। उसके बाद उन सबों ने बारी-बारी से मेरे साथ बलात्कार किया।” “मैंने उनमें से दो को सेंगर के आदमियों के रूप में पहचान लिया। क्योंकि मैं उनको उसके घर के आस-पास देखी थी।”

उसने बताया कि तीनों ने उसे बेचने की भी कोशिश की। उनमें से एक ने एक आदमी के साथ 60 हजार में सौदा भी तय कर दिया था। लेकिन वे उसको अंजाम नहीं दे सके क्योंकि इस बीच पुलिस ने उनको ढूंढना शुरू कर दिया था।

उसकी मां द्वारा उसके गायब होने की शिकायत पर पुलिस ने उसको खोजने का अभियान शुरू कर दिया था। जब अपहर्ताओं को पता चला कि पुलिस उनका पीछा कर रही है तो उन लोगों ने उसे छोड़ दिया। उसी के साथ 20 जून को एक केस दर्ज किया गया और फिर तीन संदिग्ध अपहर्ताओं- शुभम सिंह, ब्रिजेश यादव और अवध नारायन- को गिरफ्तार कर लिया गया।

बच्ची की मां का कहना था कि वह पहले से ही पुलिस को कह रही थी कि उसका अपहरण हुआ है लेकिन पुलिस ने केस नहीं दर्ज किया वह उसे महज लापता होने का केस बता रही थी। मां का कहना था कि “वे कहते थे कि वह निश्चित तौर पर किसी के साथ भाग गयी होगी और मुझसे घर लौट जाने के लिए कहते थे। नौ दिनों तक मैं लगातार पुलिस स्टेशन जाती रही। लेकिन उन्होंने केस नहीं दर्ज किया।”

हालांकि पुलिस ने इस आरोप को खारिज कर दिया था। जैसा कि आम तौर पर होता है।

उसका कहना था कि उसने किसी भी तरह की शिकायत नहीं मिली थी। उन्नाव पुलिस स्टेशन की सुपरिंटेंडेट पुष्पांजलि देवी का कहना  है कि 20 जून को शिकायत दर्ज होने के दिन आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 363 (अपहरण), 366 (महिला का अपहरण कर उसे शादी के लिए मजबूर करना) के तहत मामला दर्ज किया गया।

उनका कहना था कि जांच के बाद सेक्शन 376 डी (गैंगरेप) और पाक्सो एक्ट के सेक्शन 3 और 4 के तहत भी मामला दर्ज किया गया। मामले की चार्जशीट भी कोर्ट में पेश कर दी गयी है।

आश्चर्य की बात यह है कि अपहर्ताओं के चंगुल से छूटने के पांच दिन बाद बच्ची का मेडिकल परीक्षण हुआ। हालांकि पुलिस का कहना है कि पीड़िता तत्काल इसके लिए तैयार नहीं थी। क्योंकि उसकी स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। जबकि बच्ची का कहना है कि उससे ऐसा करने के लिए कभी पूछा ही नहीं गया।

एक बार फिर घर लौटने के बाद वह रहने के लिए अपने चाचा और चाची के पास दिल्ली चली गयी।

केस वापस लेने की धमकी

दिल्ली में उसने अपनी चाची से रेप के बारे में बताया। जब उन्होंने इसको अपने पति के साथ साझा किया तो वह बिल्कुल गुस्से में आ गए और तुरंत अपने भाई यानि बच्ची के पिता को फोन किए।

पीड़िता की बहन ने बताया कि “पापा भी बहुत नाराज हो गए। पहले वह इस बात पर भरोसा ही नहीं कर सके कि सेंगर…..इस तरह से कुछ कर सकता है। वह सीधे उसके घर गए लेकिन उसे वहां नहीं पाए।”

उसने बताया कि “उन्होंने मेरी बहन से उन्नाव लौट कर पुलिस में शिकायत दर्ज करने के लिए कहा। उसके बाद से उन्होंने सेंगर के घर जाना बंद कर दिया।”

बच्ची अगस्त में उन्नाव लौटी। लेकिन जब वह शिकायत दर्ज कराने गयी तो पुलिस ने उसको स्वीकार नहीं किया। उसके बाद उसने कोर्ट का शरण लिया जहां से वह सेंगर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस केलिए निर्देश हासिल कर सके।

उसके बाद उसे शिकायत वापस लेने की धमकियां मिलनी शुरू हो गयीं। लिखित रूप से शिकायत दर्ज न होने से परेशान होकर एक दिन उसने मिट्टी का तेल छिड़ककर खुद को आग लगाने की कोशिश की। 6 अप्रैल को उसके पिता की सेंगर के भाई अतुल सिंह और उसके आदमियों ने बेरहमी से पिटाई की। वे सब उसके पिता पर शिकायत वापस लेने का दबाव डाल रहे थे। और फिर इसी पिटाई के बाद थाने में कस्टडी के दौरान उसके पिता की मौत हो गयी।

इस बीच सेंगर ने कथित तौर पर बच्ची के चाचा से संपर्क किया था। चाचा ने दि प्रिंट के साथ उस बातचीत को साझा भी किया था। जिसमें सेंगर को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि “उनको रोक लो जो लोग मेरे खिलाफ शिकायतें कर रहे हैं। क्या तुम मेरे भाई नहीं हो? तुमने मेरे लिए सालों काम किया है। तुम ऐसा कैसे कर सकते हो? बच्ची को यह समझाओ कि मैं उसकी शादी की व्यवस्था करवा दूंगा। बच्ची की मां को मेरे घर भेजो, मैं उसे चाय पिलाऊंगा। आओ इस मामले को सौहार्दपूर्वक से निपटा लेते हैं।”

(यह लेख दि प्रिंट में 11 अप्रैल, 2018 को अग्रेंजी में प्रकाशित हुआ था। वहां से साभार लेकर इसका यहां हिंदी अनुवाद दिया जा रहा है।)    

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