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विनोद दुआ मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, जांच पर रोक से इंकार लेकिन गिरफ्तारी से मिली राहत

नई दिल्ली। पत्रकार विनोद दुआ का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। आज रविवार होने के बावजूद मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने शिमला पुलिस के उस निर्देश पर स्टे लगाने से मना कर दिया जिसमें उसने सीआरपीसी के सेक्शन 160 के तहत विनोद दुआ को जांच के लिए अपने सामने पेश होने के लिए कहा था।

जांच पर रोक लगाने से इंकार करते हुए बेंच ने कहा कि जांच करने वाली एजेंसियों (हिमाचल पुलिस) को पूछताछ करने से 24 घंटे पहले दुआ को नोटिस देनी होगी। हालांकि कोर्ट ने इस बात के निर्देश दिए कि दुआ को अगली सुनवाई की तारीख 6 जुलाई तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। पुलिस उनके घर पर उनसे पूछताछ कर सकती है।

इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार से मामले की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस मोहन शांतागौदर और विनीत सरन की एक बेंच ने केंद्र, हिमाचल प्रदेश और पुलिस को एक नोटिस भेजी है। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी।

आपको बता दें कि पत्रकार दुआ को बीजेपी नेता अजय श्याम की ओर से दर्ज कराए गए देशद्रोह के एक मुकदमे में शिमला पुलिस ने समन किया था। दुआ के वकील विकास सिंह द्वारा दबाव डालने के बाद भी बेंच ने जांच पर रोक लगाने से इंकार कर दिया।

विकास सिंह ने कहा कि “अगर दुआ ने जो कहा है वह राजद्रोह है तब इस देश में केवल दो चैनल काम कर सकते हैं।”

जब विकास सिंह ने कहा कि बीजेपी नेता जिसने मामले में शिकायत की है वह केवल सत्तारूढ़ दल के हाथ की केवल कठपुतली है इस पर बेंच ने उनसे कहा कि कृपया इस तरह के विशेषण का इस्तेमाल न करें। इसकी कोई जरूरत नहीं है।

विनोद दुआ के पास शिमला पुलिस का समन दो दिन पहले आया था। इमसें दिल्ली दंगों पर यूट्यूब शो में अपनी खबरों के जरिये फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगाया गया है।

11 जून को दिल्ली हाईकोर्ट ने अस्थाई रूप से दुआ के खिलाफ जांच पर रोक लगायी थी।

इसी तरह का एक एफआईआर बीजेपी नेता नवीन कुमार द्वारा दुआ के खिलाफ दिल्ली में भी दर्ज करायी गयी थी। जिसमें दुआ पर दंगों के दौरान अपने यूट्यूब शो के जरिये अफवाह और झूठ फैलाने का आरोप लगाया गया था।

(लाइव लॉ से कुछ इनपुट लिए गए हैं।)

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