Sunday, October 17, 2021

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शरद पवार ने पलट दी महाराष्ट्र में बाजी

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80 साल की उम्र में शरद पवार ने जो जज्बा दिखाया है वह दूसरे राजनीतिज्ञों के लिए सीख है। एक उलट चुकी बाजी को फिर से पलट देने वाला बाजीगर साबित हुए हैं शरद पवार। हाथ से निकल चुकी पार्टी को पहले सम्भाला, फिर गठबंधन को एकजुट कर दिखाया। फ्लोर टेस्ट से पहले होटल हयात में बहुमत का परीक्षण देश की जनता के सामने कर दिखाया। संवैधानिक नजरिए से इस घटना का महत्व भले ही नहीं हो, मगर देश की जनता को दिखा दिया गया है कि जिसे खिचड़ी कहकर दुत्कारा जा रहा था, वह स्वादिष्ट होकर उस शनि ग्रह की काट बनकर सामने दिखा जिसने एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस हर किसी को अमंगल की साया से जकड़ रखा था।

जब पवार के पैरों तले खिसक गयी थी ज़मीन

शरद पवार के पैरों तले जमीन खिसक गयी थी जब सुबह-सवेरे ख़बर आयी कि उनकी पूरी पार्टी एनसीपी देवेंद्र फडनवीस की सरकार बनाने में जुट गयी। एनसीपी विधायक दल के नेता और शरद के सगे भतीजे अजित पवार डिप्टी सीएम बन बैठे। ख़बर मीडिया में कुछ इस तरह फैली कि शरद पवार ने ‘गेम’ कर दिया। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने तो उनके लिए बुरे अर्थ में ट्वीट कर दिया था, तूस्सी ग्रेट हो। एक दिन पहले ही उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री घोषित कर चुके शरद पवार के लिए शिवसेना से भी आंखें मिलाना मुश्किल हो रहा था। कांग्रेस तो ऐसी बिदकी कि शिवसेना और एनसीपी के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेन्स करने से भी पीछे हट गयी।

हर तरफ शरद पवार के लिए अविश्वास ही अविश्वास दिखने लगा। शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने जब कहा कि उनकी पार्टी और परिवार दोनों टूट गये हैं तब भी अविश्वास कम नहीं हुआ। मगर, शाम होते-होते शरद पवार ने बाजी पलट दी। विधायकों की बैठक बुलायी। कहा जब तक पूरे विधायक नहीं आ जाते, मीटिंग शुरू नहीं करेंगे। 54 में से 48 विधायक बैठक में पहुंच गये। सुबह होते-होते यह संख्या 50 पार कर गयी।

अजित पवार को भी ‘सुधरने’ का मौका दिया

एनसीपी विधायकों के साथ-साथ शरद पवार ने अजित पवार को भी मनाने के लिए दूत भेजे। एक अवसर दिया कि वे अपनी गलती स्वीकार कर लें। शरद पवार ने जब सार्वजनिक रूप से कहा कि एक नेता का काम खुद फैसले लेना नहीं होता, सबकी सहमति से फैसले लिए जाते हैं तो उन्होंने नवसिखिए राजनीतिज्ञों को एक तरह से राजनीति का पाठ पढ़ाया। शरद पवार ने एनसीपी के विधायकों को एकजुट कर विधायक दल के नेता अजित पवार को अकेला कर दिखाया। जयंत पाटिल के रूप में नये विधायक दल के नेता सामने आ गये।

होटल हयात में हुआ ‘फ्लोर टेस्ट’

शरद पवार ने उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के नेताओं से सीधा सम्पर्क बनाए रखा। उद्धव के साथ प्रेस कॉन्फ्रेस की। जैसे ही एनसीपी सम्भली तीनों दलों के विधायकों का फ्लोर टेस्ट होटल हयात में कर दिखाया। यह टेस्ट मीडिया के सामने था। देश देख रहा था कि 162 विधायक एकजुट थे। अब सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई हो या सदन के भीतर की लड़ाई, इस एकजुटता के साथ दंगल खुल चुका था।

सुप्रीम कोर्ट के भीतर भी 156 विधायकों का हलफ़नामा पहुंचा दिया गया था। हालांकि व्यक्तिगत रूप से परीक्षण की ज़रूरत को देखते हुए इसे वापस भी ले लिया गया। मगर, यह शपथपत्र यह साबित करने को काफी था कि जो समर्थन पत्र राज्यपाल को अजित पवार ने एनसीपी की ओर से दिया था, वह सही नहीं था। हस्ताक्षर विधायकों के थे, मगर वे हस्ताक्षर बीजेपी की सरकार बनाने के लिए नहीं किए गये थे। बल्कि, वे हस्ताक्षर अजित पवार को नेता मानने वाले थे। उस पत्र के ऊपर कवरिंग लेटर लगाकर अजित पवार ने अपने पद का दुरुपयोग किया था।

पवार ने केंद्र, राज्य, राज्यपाल सबको आईना दिखाया

शरद पवार ने एक साथ सबको जवाब दे दिया। अजित पवार डिप्टी सीएम रह गये जिनके साथ एनसीपी का कोई विधायक नहीं था। यह साबित कर दिखाया कि राज्यपाल से भी गलती हुई कि उन्होंने प्रतिकूल राजनीतिक परिस्थिति में अजित पवार पर सौ फीसदी भरोसा किया। राजनीतिक आकलन करने में राज्यपाल से भूल हुई। उन्होंने राष्ट्रपति शासन हटाने की जो पहल की, उसका आधार गलत साबित हुआ। राष्ट्रपति शासन हटाने के लिए जिस तरह से प्रधानमंत्री ने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर कैबिनेट की बैठक नहीं बुलायी और सरकार बनाने के अवसर को इमर्जेंसी की तरह इस्तेमाल किया, वह भी गलत साबित हो गया। सरकार बनाने में इतनी हड़बड़ी कि रात के वक्त राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल तक जागते रहे। वहीं, बहुमत साबित करने को लेकर इतना इत्मिनान कि देश को सुप्रीम कोर्ट में पता चला कि दो हफ्ते का समय इस बाबत राज्यपाल ने दिया था।

शरद पवार अब महाराष्ट्र चुनाव के बाद असली हीरो बनकर उभरे हैं। उन्होंने उद्धव ठाकरे की प्रतिष्ठा को अपनी प्रतिष्ठा माना। एक नयी राजनीति की शुरुआत हुई लगती है। कांग्रेस में उन्होंने जान फूंक दी। एक ऐसी खिचड़ी तैयार हुई है जो राजनीति में सुखद स्वाद लाने की सम्भावना पैदा करती है। संक्षेप में कहें तो पवार ने महाराष्ट्र की सियासत को पलट दिया है। अब वास्तविक फ्लोर टेस्ट में बीजेपी को हराकर नया अध्याय लिखा जाएगा, इस पर सबकी नज़र रहेगी।

(प्रेम कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल विभिन्न चैनलों के पैनल में उन्हें बहस करते देखा जा सकता है।)

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