Sat. Jan 25th, 2020

चीन्ह-चीन्ह के कार्रवाई क्यों कर रही न्यायपालिका!

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सुप्रीम कोर्ट।

मेडिकल प्रवेश घोटाले में जिस तरह निवर्तमान चीफ जस्टिस की पूर्ववर्ती मंजूरी के आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक सिटिंग जज जस्टिस श्रीनारायण शुक्ला एवं अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि अब समय आ गया है, जब न्यायपालिका में विद्यमान सभी सड़ी मछलियों को निकाल बाहर कर दिया जाए, लेकिन इसकी इक्षाशक्ति न तो न्यायपालिका में दिखाई पड़ रही है न ही कार्यपालिका और न ही विधायिका में।

आखिर क्या कारण है कि आयकर विभाग के दिल्ली स्थित तत्कालीन प्रधान आयकर आयुक्त सुरेश कुमार मित्तल के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में दर्ज सीबीआई की एफआईआर के बावजूद न केवल उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की जा रही है, बल्कि वे दिन प्रतिदिन विभाग में तरक्की पाते जा रहे हैं।

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यही नहीं कुख्यात हथियार डीलर और सीए संजय भंडारी के सौजन्य से मंहगे होटलों में रुकने आदि में सुरेश कुमार मित्तल के साथ उनकी पत्नी जस्टिस रेखा मित्तल के शामिल होने के बावजूद जस्टिस रेखा मित्तल के खिलाफ आज तक उच्चतम न्यायालय ने कोई कार्रवाई नहीं की। जस्टिस रेखा मित्तल उसी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में तैनात हैं जहां की एक तत्कालीन जज जस्टिस निर्मल यादव पर एक बिचौलिए से घूस लेने का मुकदमा चंडीगढ़ की सत्र अदालत में चल रहा है। याद दिला दें यह वही संजय भंडारी हैं, जिसके तार राबर्ट वाड्रा से जुड़े बताए जाते हैं।   

सुरेश कुमार मित्तल ने अपने विरुद्ध दर्ज एफआईआर को निरस्त करने के लिए मद्रास हाईकोर्ट में धारा 482 के तहत दाखिल वाद में स्वीकार किया है कि उन्होंने अपनी पत्नी के साथ वर्ष 2013 में कोडाइकनाल जाने की योजना बनाई, तो उन्होंने सरकारी गेस्ट हाउस के बजाय अपनी सुविधा के लिए एक होटल में रहने का विकल्प चुना। सीबीआई जांच में पता चला कि यह होटल और आगे भी इस तरह के होटल में रुकने की व्यवस्था संजय भंडारी करता था। संजय भंडारी वही है, जिनका नाम आज रोबर्ट वाड्रा से जोड़ा जा रहा है।

गौरतलब है कि जून 2015 के आखिरी हफ्ते में अख़बारों में खबरें आईं कि जस्टिस रेखा मित्तल के पति और प्रधान आयकर आयुक्त सुरेश कुमार मित्तल के साथ नौ वरिष्ठ आयकर अधिकारियों पर बीते दिनों भ्रष्टाचार के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। वहीं इससे पहले सीबीआई ने दिल्ली, मुंबई, बैंगलौर, चेन्नई, हैदराबाद और खम्माम में 17 जगहों पर छापेमारी की थी। इन शहरों में अधिकारियों और चार्टड अकाउंटेंट संजय भंडारी के आवासीय और कार्यालय पर भी छापेमारी की गई।

छापों में सीबीआई ने 2.6 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, 16 लाख रुपये की नकदी, 4.25 किलोग्राम सोने के आभूषण, 13 किलोग्राम चांदी के सामान के अलावा 68 लाख रुपये की सावधि जमा रसीद भी बरामद की गई। ये सारा सामान अलग-अलग अधिकारियों के घर से मिला है।

सीबीआई ने सुरेश कुमार मित्तल के अलावा, बैंगलोर के अतिरिक्त आयुक्त टीएन प्रकाश, चेन्नई के उपायुक्त आरवी हारन प्रसाद के उपायुक्त एस मुरली मोहन, चेन्नई के आयुक्त विजयलक्ष्मी, मुंबई के अतिरिक्त आयुक्त एस पांडियन, मुंबई के आयुक्त आईटीएटी जी लक्ष्मी बराप्रसाद, गाजियाबाद के अतिरिक्त निदेशक विक्रम गौर और मुंबई के अतिरिक्त निदेशक राजेंद्र कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

इसके अलावा चार्टर्ड एकाउंटेंट संजय भंडारी और उनके बेटे श्रेयांश और दिव्यांग के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया था। इन लोगों पर आरोप है कि इन अधिकारियों ने चार्टड अकाउंट और उनके बेटों से तमाम सुविधाएं ली और इसके बदले में उनके ग्राहकों को सहायता पहुंचाई। सीबीआई के मुताबिक इन आयकर विभाग के इन अधिकारियों ने चार्टड अकाउंटेंट संजय भंडारी और उनके बेटों से अनुचित लाभ उठाया था। दरअसल ये अधिकारी हथियार दलाल और चार्टड अकाउंटेंट संजय भंडारी के पे रोल पर रहे हैं।

सुरेश कुमार मित्तल ने मद्रास हाईकोर्ट में क्रिओ पी संख्या 17806 तथा 18058/2017 दाखिल करके अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त करने की मांग की थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान मित्तल के वकील ने तर्क दिया था कि एफआईआर दर्ज करने में आयकर मैन्युअल के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया था, इसलिए इसे निरस्त कर दिया जाए।  

इसके जवाब में सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि सूत्रों से  जानकारी प्राप्त होने पर सीबीआई ने 19 फरवरी 2015 को बीइ संख्या एमए1/ 2015 ए/0002 में प्रारंभिक जांच कार्रवाई दर्ज की गई थी और इस मामले की जांच उप पुलिस अधीक्षक रैंक के अधिकारियों द्वारा की गई, जो सीबीआई मैनुअल के प्रोटोकॉल के अनुरूप है। 

विस्तृत जांच पड़ताल के बाद, साक्ष्य एकत्र करने और संजोने में 19 फरवरी 2015 से एक वर्ष से अधिक का समय लगा। जब यह सुनिश्चित हो गया कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है, तब प्राथमिकी दर्ज की गई।

मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस डॉ. जी जयचंद्रन ने अपने फैसले में कहा था कि एफआईआर में प्रारंभिक जांच के बारे में उल्लेख न करने की चूक, एफआईआर को रद्द करने का एक कारण नहीं हो सकती है। इसलिए, विशेष लोक अभियोजक ने याचिकाओं को खारिज करने की मांग की।

फैसले में कहा गया था कि कि सुरेश कुमार मित्तल ने अपनी याचिका में स्वीकार किया कि उन्हें पहली बार अक्टूबर 2012 में आयकर आयुक्त के पद पर नियुक्त किया गया था और अपनी पोस्टिंग के कारण, उन्हें चेन्नई में रहना जरूरी था। जब उन्होंने अपनी पत्नी के साथ वर्ष 2013 में कोडाइकनाल घूमने जाने की योजना बनाई, तो उन्होंने सरकारी गेस्ट हाउस के बजाये अपनी सुविधा के लिए एक होटल में रहने का विकल्प चुना और इसलिए उन्होंने रामाराव नामक एक व्यक्ति की मदद मांगी, जो आयकर कॉलोनी में रह रहे थे। वे पिछले 15 वर्षों और आयकर विभाग के अधिकारियों के लिए यात्रा और रहने के लिए बुकिंग करवाते थे और एक ट्रैवल एजेंट के रूप में कार्य करते थे।

फैसले में कहा गया था कि इस तरह मित्तल स्वीकार करते हैं कि उन्होंने 26 सितंबर 2013 से 29 दिसंबर 2013 के बीच ऊटी और कोयम्बटूर का दौरा किया और उनके ठहरने और यात्रा की व्यवस्था रामाराव के माध्यम से की गई।

मित्तल तीन फरवरी 2014 और 16 मार्च 2014 के बीच महाबलीपुरम में जीआरटी रेडिसन होटल में अपने ठहरने  के बारे में भी स्वीकार करते हैं और होटल की बुकिंग रामाराव द्वारा की गई थी। उन्होंने एक कैविएट याचिका भी दायर की है कि उन्हें इस तथ्य के बारे में जानकारी नहीं थी कि उक्त रामाराव मेसर्स संजय भंडारी एंड कंपनी के कर्मचारी हैं और उन्होंने यह भी कहा है कि उनके द्वारा भुगतान रामाराव के माध्यम से किया गया था।

फैसले में कहा गया था कि इसे देखते हुए यदि एफआईआर को पढ़ा जाता है, तो कोई भी आसानी से देख सकता है कि अभियोजन पक्ष द्वारा मामला दर्ज करने और इस तथ्य की रोशनी में जांच करने के लिए कि एक प्रथम दृष्टया मामला बनता है। एफआईआर से स्पष्ट है कि सुरेश कुमार मित्तल होटलों में रुके थे और उन्होंने रु 1,38,388/- का लाभ संजय भंडारी से प्राप्त किया था, जो चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं।

12 सितंबर 17 के फैसले में कहा गया था कि उक्त कारणों से यह न्यायालय पाता है कि एफआईआर संख्या आरसीएमए1 2016 ए0019 की जांच में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है। इसलिए, इन आपराधिक मूल याचिकाओं को खारिज कर दिया जाता है।

भ्रष्टाचार को लेकर मोदी सरकार जीरो टालरेंस का दावा करती है और सरकारी अफसरों के खिलाफ केंद्र सरकार की कार्रवाई जारी है। 26 नवंबर 2019 को केंद्र ने आयकर विभाग के 21 अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया। सभी अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। इस साल अब तक 85 अधिकारियों को जबरन रिटायर किया गया है, इसमें से 64 टैक्स अधिकारी हैं, लेकिन सुरेश कुमार मित्तल और उनकी पत्नी जस्टिस रेखा मित्तल पर अब तक कोई कार्रवाई न होने से सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार चीन्ह चीन्ह के तो कार्रवाई नहीं कर रही?

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