पीएम विश्वकर्मा योजना मजदूरों के साथ छलावा, ई-श्रम पंजीकृत श्रमिक लाभार्थी घोषित किए जाएं: साझा मंच

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लखनऊ। आज प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटित की गई पीएम विश्वकर्मा योजना मजदूरों की आंख में धूल झोंकना है। इस योजना के तहत पूरे देश में महज 30 लाख श्रमिकों को एक लाख रुपये कर्ज देना ऊंट के मुंह में जीरा है। ऐसी स्थिति में जब देश में बेरोजगारी बेइंतहा बढ़ रही है और छोटे, मध्यम, कुटीर उद्योग बर्बाद हो रहे हैं, तब मोदी सरकार को चाहिए था कि वह इस योजना के तहत मजदूरों को बिना ब्याज के कम से कम 10 लाख रुपये कर्ज देती जिससे वे अपनी आजीविका का इंतजाम कर सकते। यह नहीं हुआ तो इसका भी अंजाम स्टार्टअप, मेक इन इंडिया, कौशल विकास योजना की तरह ही फ्लॉप होगा।

यह बातें आज खदरा में आयोजित सभा में वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर ने कहीं। खदरा में असंगठित मजदूरों के साझा मंच द्वारा चलाए जा रहे मांग पखवाड़ा के अंतिम दिन यह सभा आयोजित की गई थी। जिसमें बड़ी संख्या में निर्माण और घरेलू कामगार मजदूर इकट्ठे हुए थे। इस मौके पर मजदूरों ने ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत मजदूरों को लाभार्थी का दर्जा देने और उनके लिए आयुष्मान कार्ड, आवास, पेंशन, बीमा, पुत्री विवाह अनुदान, कौशल विकास प्रशिक्षण और मुफ्त शिक्षा की मांग को उठाया।

सभा से पहले डॉक्टर अंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण किया गया और पेरियार की जयंती पर उन्हें याद करते हुए वक्ताओं ने जाति विहीन समाज बनाने का संकल्प लिया। सभा की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश निर्माण मजदूर मोर्चा के अध्यक्ष नौमी लाल और संचालन धर्मेंद्र कुमार ने किया।

सभा में मजदूरों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद निर्माण मजदूरों के हितों के लिए चलाई जा रही बहुत सारी योजनाओं को बंद कर दिया गया। यहां तक कि उनके पेंशन के अधिकार को भी छीन लिया गया और जो योजनाएं चल भी रही हैं उनमें मजदूरों के भुगतान लंबित पड़े हुए हुए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने आदेश दे दिया है कि अब बिना जांच के किसी भी बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होगी। परिणाम स्वरूप मजदूरों की बकाया मजदूरी रखने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई होना मुश्किल हो गया है। पहले ही सरकार ने श्रम विभाग से जांच के अधिकार को छीन लिया और अब उत्पीड़न पर पुलिस के अधिकार पर भी रोक लगा दी गई है।

सभा में 12 अक्टूबर को लखनऊ में आयोजित प्रदेश स्तरीय सम्मेलन को सफल बनाने की योजना भी बनाई गई। सभा को संग्राम सिंह, डोरी लाल, धर्मेंद्र कुमार, सूरजपाल, सरवन कुमार, विनोद कुमार, पवन कुमार, गोकर्ण प्रसाद, अजय कुमार, अंकित कुमार रावत, अहमद अंसारी, प्रेम कुमार, नीरज कनौजिया, आशुतोष कुमार आदि ने संबोधित किया

(विज्ञप्ति पर आधारित।)

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