सुनील जाखड़ को पंजाब भाजपा प्रधान बनाने की तैयारी

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दो बार पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के रंग में रंग गए सुनील कुमार जाखड़ का पंजाब भाजपा का अगला प्रधान बनना तकरीबन तय हो चुका है। किसी भी वक्त घोषणा हो सकती है। मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष अश्विन शर्मा ने चंडीगढ़ स्थित राज्य भाजपा कार्यालय से अपना समान मंगवा लिया है। तीन दिन से अश्विनी शर्मा और सुनील कुमार जाखड़ दिल्ली में पड़ाव डाले हुए थे। सोमवार को सारा दिन मीडिया में चर्चा रही कि अश्विनी शर्मा ने आलाकमान के कहने पर इस्तीफा दे दिया है। लेकिन उन्होंने कहा कि, “यह अफवाह है। भाजपा में पद से त्यागपत्र देने की कोई परंपरा नहीं है। बाकी आलाकमान का हर फैसला मंजूर होगा। यह कहते हुए उनकी आवाज की मायूसी बहुत कुछ कह रही थी।”

उधर, पूछने पर सुनील कुमार जाखड़ ने इतना ही कहा कि, “एक-दो दिन में सब साफ हो जाएगा। मुझे जो भी जिम्मेवारी दी जाएगी उसे तन-मन से पूरी मेहनत के साथ निभाऊंगा।” शर्मा और जाखड़ से जुड़े भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि अश्विनी शर्मा जा रहे हैं और सुनील कुमार जाखड़ आ रहे हैं। सन् 2024 के आम लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यह फैसला किया जा रहा है।

सन् 2022 में पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार थी। अचानक उन्हें हटाने का फैसला कर लिया गया। तब माना जा रहा था कि प्रयोग के तौर पर सुनील कुमार जाखड़ अगले मुख्यमंत्री होंगे। कैप्टन अमरिंदर सिंह सहित आधे से ज्यादा विधायकों का समर्थन उन्हें हासिल था। राज्य की अफसरशाही भी उन्हें अगला मुख्यमंत्री मान कर चलने लगी थी और उनके चंडीगढ़ तथा अबोहर आवास के बाहर सुरक्षा अति कड़ी कर दी गई थी। लेकिन अचानक परिदृश्य बदल गया। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कांग्रेस के कई दिग्गज नेता सुनील कुमार जाखड़ को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे कि अंबिका सोनी ने यह कहकर सारा खेल बदल दिया कि पंजाब की जनता किसी गैर सिख को बतौर मुख्यमंत्री स्वीकार नहीं करेगी और अगला चुनाव हम हार जाएंगे।

अंबिका सोनी की पूरी लॉबी ने भी जाखड़ की खुलकर मुखालफत की। अंतिम समय में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार में मंत्री रहे दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी के नाम पर मुहर लगी। उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठा दिया गया। सुनील कुमार जाखड़ और उनके विधायक साथियों ने इसे अपना अपमान माना। जाखड़ ने यह कहकर कांग्रेस को अलविदा कह दी कि यह फैसला सांप्रदायिक आधार पर लिया गया है। वह हिंदू हैं; इसलिए विधायकों से हासिल स्पष्ट बहुमत के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया। जेपी नड्डा की उपस्थिति में वह भाजपा में शामिल हो गए। बताया जाता है कि भाजपा ने उनसे वादा किया था कि उन्हें कुछ महीनों के बाद प्रदेशाध्यक्ष बना दिया जाएगा। शायद वही वादा अब वफा हो रहा है।

सुनील कुमार जाखड़ के साथ-साथ तरुण चुघ का नाम भी नए प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर लिया जा रहा है लेकिन वह सुनील कुमार जाखड़ के मुकाबले हर लिहाज से बेहद कमजोर हैं। उनका कोई जनाधार भी नहीं है। जबकि जाखड़ का जनप्रभाव हिंदुओं और सिखों, दोनों में है। वह खांटी कांग्रेसी रहे तथा पूर्व लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ के पुत्र हैं। ग्रामीण स्तर से उन्होंने राजनीति शुरू की थी और कुछ अरसा पूर्व भाजपा में जाने से पहले कांग्रेस में बने रहे।

अश्वनी शर्मा, पंजाब भाजपा अध्यक्ष

शिरोमणि अकाली दल के दिग्गज नेता प्रकाश सिंह बादल उन्हें पुत्रतुल्य मानते थे। जाखड़ भी तमाम राजनीतिक तल्खी को दरकिनार करके प्रकाश सिंह बादल के पांव छुआ करते थे और सुखबीर बादल से भाइयों की तरह गले मिला करते थे। नेता प्रतिपक्ष होने के बावजूद यह सिलसिला यथावत कायम रहा। बड़े बादल की मौत के बाद वह कई बार सहानुभूतिवश सुखबीर से मिलने उनके पास गए। अभी से माना जाता है कि अगर भविष्य में कभी अकाली-भाजपा गठजोड़ हुआ तो सुनील कुमार जाखड़ की भूमिका बेहद खास होगी। (अकाली-भाजपा समझौते में समान नागरिक संहिता आढ़े आएगी। जिसमें न जाखड़ कुछ कर सकते हैं और न अकाली)। 

दरअसल, सुनील कुमार जाखड़ को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का बहुत करीबी माना जाता है। कुछ हफ्ते पहले अमित शाह गुरदासपुर के दौरे पर आए थे और तभी से सरगोशियां थीं कि अश्विनी शर्मा की प्रधान पद से छुट्टी होने वाली है और जाखड़ यकीनन अगले प्रधान होंगे। जाखड़ गुरदासपुर से भाजपा के लोकसभा उम्मीदवार भी हो सकते हैं। उनकी परवानगी हिंदू और सिखों दोनों में है। छवि एकदम धर्मनिरपेक्ष! वैसे भी इन दिनों सुनील कुमार जाखड़ गुरदासपुर के खूब दौरे करते हैं। वह सत्ता पक्ष में रहे या विरोधी पक्ष में-उन्होंने किसी को किसी भी काम के लिए कभी इंकार नहीं किया। काम करवाने वाला बेशक किसी भी पार्टी का हो। इस पक्ष ने भी जाखड़ को लोकप्रिय चेहरा बनाया। तमाम सियासी दलों में उनके अच्छे दोस्त हैं।

18 जनवरी 2020 को अश्विनी शर्मा को दूसरी बार पंजाब भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद पंजाब विधानसभा चुनाव, संगरूर व जालंधर उपचुनाव में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। बल्कि कहिए कि शर्मनाक हार का! जालंधर में तो पार्टी उम्मीदवार की जमानत तक जब्त हो गई। भाजपा से जुड़े कई लोगों का कहना है कि इसके बाद पार्टी आलाकमान ने पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन का मन बनाया। इस बात का भी बुरा मनाया गया कि भाजपा ने आलीशान होटलों में बैठकर चुनाव हैंडल किया, करोड़ों के खर्च के बाद भी नतीजा शून्य रहा। जबकि अश्वनी शर्मा लगातार कहते रहे कि भाजपा जालंधर उपचुनाव जीतेगी और अगर हार जाती है तो दूसरे नंबर पर रहेगी लेकिन उसके प्रत्याशी की तो जमानत भी जब्त हो गई।

करारी हार के बाद भाजपा ने धन्यवादी दौरा तक नहीं किया। लुट-पिट कर भाजपा उन लोगों के बीच भी नहीं जाना चाहती थी जिन्होंने उसके उम्मीदवार को वोट दिए। यानी 18 जनवरी 2020 के बाद अश्विनी शर्मा व कोई जलवा नहीं दिखा पाए। उनका सारा जोर गुटबंदी को तरजीह देने में रहा। विजय कुमार सांपला को वह सदैव अपना प्रतिद्वंदी मानते रहे और नतीजतन प्रधान बनते ही उनके लोगों को एक-एक करके किनारे किया गया तथा उनका अपमान तक किया गया। भाजपा से दशकों से जुड़े बहुत सारे नेता और कार्यकर्ता चुप चाप घर बैठ गए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुछ लोग भी। इसके नागवार नतीजे लगातार हुए चुनावों में सामने आए।                       

तरुण चुघ, भाजपा नेता

तय माना जा रहा है कि सुनील कुमार जाखड़ अगले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष होंगे। लेकिन उन्हें भी कई दिक्कतों का सामना पार्टी के भीतर से करना पड़ेगा। अश्विनी शर्मा खेमा उनसे पहले ही दिन से खांसी खुन्नस रखता है। पार्टी का एक और खेमा जाखड़ को प्रदेश की कमान सौंपने के खिलाफ है। नाम नहीं दिए जाने की शर्त पर इस खेमे के एक वरिष्ठ नेता ने ‘जनचौक’ से कहा कि, “सुनील कुमार जाखड़ अभी नए-नए भाजपा में आए हैं और ऐसे नेता को इतनी जल्दी बड़ी जिम्मेवारी सौंपना सही नहीं है।”

बातचीत में इस नेता ने यह पुष्टि भी की कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और पंजाब मामलों के प्रभारी गजेंद्र सिंह शेखावत उनके खेमे को हर स्तर पर मना तथा संतुष्ट कर रहे हैं। गौरतलब है कि गजेंद्र सिंह शेखावत पंजाब भाजपा से वाबस्ता हर छोटे-बड़े नेता और कार्यकर्ता की नब्ज टटोल रहे हैं। पलड़ा सुनील जाखड़ का भारी है। इसलिए भी कि सुनील कुमार जाखड़ हिंदू हैं लेकिन सिखों में भी सर्वमान्य हैं। उनका पारिवारिक अतीत भी ऐसा रहा है कि हर मजहब और जाति के लोग उनको पूरा मान-सम्मान देते आए हैं। भाजपाई होने के बाद जब जाखड़ अपने गृहनगर अबोहर गए तो बेशुमार लोगों ने कहा कि उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह कांग्रेसी हैं या भाजपाई! यह उनके लिए डॉ. बलराम जाखड़ के काबिल फरजंद हैं। उनके सच्चे वारिस।                       

इस बीच महत्वपूर्ण सूचना यह भी है कि 2024 के चुनाव के मद्देनजर भाजपा कम से कम छह राज्यों के प्रदेशाध्यक्ष बदलने की कवायद में है। भरोसेमंद सूत्रों ने यह खबर भी दी है कि आने वाले दिनों में भाजपा में शामिल हुए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को किसी राज्य का राज्यपाल बनाकर भेजा जाएगा। उनकी पत्नी परनीत कौर को पटियाला से लोकसभा टिकट दी जाएगी। बेटी और बेटे को भी ‘एडजस्ट’ किया जाएगा। यानी भाजपा ने कांग्रेस से परिवारवाद की राजनीति भी अच्छी तरह सीखी है।

(अमरीक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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