Subscribe for notification
Categories: राज्य

बाबा राम रहीम को भाजपा नेताओं का साथ, हनी प्रीत लगाने लगीं सत्संग

करीब दो दशक तक खासे विवादों में रहने के बाद डेरा सच्चा सौदा की गतिविधियां अगस्त, 2017 में इसके मुखिया राम-रहीम गुरमीत सिंह को मिली कड़ी सजा के बाद स्थगित सी हो गई थी। लंबी खामोशी के बाद ‘विवादों का यह डेरा’ एकबारगी फिर अपना वजूद बहाल करने के लिए सक्रिय हो गया है। डेरा सच्चा सौदा की इन दिनों पंजाब और हरियाणा में चल रही सरगर्मियां इसके साफ संकेत देती हैं। बीते दिनों दोषी बाबा की सबसे करीबी और ‘राजदार’ मानी जाने वाली हनी प्रीत की जमानत और अब रोहतक की सुनारिया जेल में बंद राम रहीम गुरमीत सिंह से मुलाकात के बाद आलम सिरे से बदला है।

बीते हफ्ते डेरे के सिरसा स्थित मुख्यालय में बड़ा सत्संग (जिसे डेराप्रेमी नाम चर्चा भी कहते हैं) हुआ। इसमें बाबा के परिजनों के साथ बैठकर हनी प्रीत ने भी शिरकत की थी। कुछ दिन पहले सच्चा सौदा के पंजाब के सबसे बड़े केंद्र माने जाने वाले, बठिंडा जिले में स्थित सलाबतपुरा में बाकायदा बड़े समागम की शक्ल में नाम चर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें पुख्ता अनुमान के अनुसार पचास हजार से ज्यादा अनुयायियों ने हिस्सा लिया। दोनों समागम डेरे के पुराने और ‘गुलजार’ दिनों की याद दिलाते हैं।

हरियाणा में फिर भाजपा की सरकार आने के बाद डेरा सच्चा सौदा का इस मानिंद सक्रिय और मुखर होना आकस्मिक नहीं माना जा रहा। राज्य में भाजपा के कतिपय नेताओं को अंदरखाने बाबा पर रहम आने लगा है। इनमें से कई वरिष्ठ भाजपाई अगस्त, 2017 से पहले लगातार डेरे की दहलीज पर लंबे इंतजार के बाद मत्था टेका करते थे। इनमें चुनाव हार चुके पूर्व शिक्षा मंत्री रामविलास शर्मा प्रमुख हैं।

ऐसे कई नेता हत्या और बलात्कार के आरोपी डेरा मुखी को भगवान का दर्जा भी दे चुके हैं। गुरमीत राम रहीम सिंह के दबदबे के वक्त से डेरे की ओर से राजनीतिक सौदे-समझौते करने वाली विशेष टीम भी अब खुलकर नजर आने लगी है। हरियाणा में हुई नाम चर्चा में जमानत पर बाहर आई हनी प्रीत बड़ा चेहरा थीं तो पंजाब में हुए समागम में, डेरे की 50 सदस्यीय कमेटी के प्रमुख (जो डेरे की ओर से गठित राजनीतिक विंग के मुखिया भी हैं) राम सिंह ने अगुवाई की।

जानकारी के मुताबिक नाम चर्चा के दोनों बड़े आयोजनों में यह बात उपस्थित हर शख्स के कान में डालने की कोशिश की गई कि बाबा राम रहीम गुरमीत सिंह जल्दी सलाखों से बाहर होंगे और डेरा पहले की तरह चलेगा। जमानत पर रिहाई और देश द्रोह की धारा हटने के बाद हनी प्रीत की मिसाल बकायदा एक रणनीति के तहत दी जा रही है। अब हनी प्रीत की बाबा के साथ जेल-मुलाकात के बाद, डेरा सच्चा सौदा का गुप्त ‘प्रचार तंत्र’ अपने पक्ष में नई कहानियां गढ़ कर पेश करने में लगा है, जबकि जबरदस्त चर्चा में आई और बड़े पैमाने पर सुर्खियां बटोर रही इस मुलाकात को अभी चंद घंटे ही बीते हैं। 

हनी प्रीत फिलहाल बाबा के परिवार के साथ रह रही है और उसकी बार-बार की यह कोशिश आखिरकार कामयाब हो गई है कि है गुरमीत राम रहीम से किसी तरह तत्काल मुलाकात हो जाए। हरियाणा के एक आला अधिकारी ने इस संवाददाता को बताया कि सरकार के कुछ अति असरदार लोग भी बाबा और हनी प्रीत की जेल में मुलाकात संभव बनाने में जुटे हुए थे। इसके मायने साफ हैं। हनी प्रीत को पहले भी राम रहीम गुरमीत सिंह के बाद (बाबा के करीबियों में) सबसे ज्यादा ‘पावरफुल’ माना जाता था। डेरा मुखी का सबसे करीबी राजदार भी।

रिहाई के बाद हनी प्रीत को बाबा की सर्वोच्च प्रतिनिधि के तौर पर सक्रिय करने की कोशिशें तेज हैं। बाबा के कुछ परिजन और कार्यकारी समीति के सदस्य हनी प्रीत के समर्थन में हैं तो कुछ विरोध में। डेरे की अचानक तेजी से सक्रिय हुई कार्यकारी समिति के एक वरिष्ठ सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर  कहा कि बहुत संभव है कि आने वाले दिनों में डेरा सच्चा सौदा औपचारिक अगुवाई, बाबा के खुले इशारे से हनी प्रीत करें। इसलिए भी कि वह डेरे और डेरेदार के एक-एक पैंतरे से बखूबी वाकिफ हैं और बाबा के आर्थिक साम्राज्य के तमाम भेद उसके पास महफूज हैं।

वैसे, उम्र कैद की सजा पाए राम रहीम सिंह ने फिलहाल तक किसी को इस आस में औपचारिक तौर पर अपनी गद्दी नहीं सौंपी है कि कोई बड़ा दांव-पेंच अथवा चमत्कार उसे सलाखों से बाहर कर देगा। बाबा की फितरत से वाकिफ उनके करीबी रहे डेरे के कई रसूखदार लोग कहते मिल जाते हैं कि हनी प्रीत की जमानती रिहाई और जेल में मुलाकात ने राम रहीम गुरमीत सिंह को यकीनन गहरा सुकून दिया होगा।

खुद बाबा ने कई बार पेरोल पर रिहाई मांगी है और राज्य सरकार ने भी इन अपीलों का खास विरोध नहीं किया। पेरोल के लिए कुछ हास्यास्पद कारण भी बताए गए। अदालती सख्ती उनकी मंशा पूरी नहीं होने दे रही। अपरोक्ष सरकारी आदेशों के चलते जेल प्रशासन की बाबा के प्रति अतिरिक्त नरमी जरूर इन दिनों चर्चा में है।

बदले हालात में डेरा सच्चा सौदा जाने वाले सियासतदानों की आवाजाही वहां फिर से शुरू हो गई है। बेशक वोट के जुगाड़ में अक्सर डेरे और डेरेदार के आगे नतमस्तक होने वाली बड़ी राजनीतिक शख्सियतें अभी सरेआम वहां जाने से परहेज कर रही हैं, लेकिन उनके प्रतिनिधि हाजिरी भरने लगे हैं। सिरसा से भाजपा प्रत्याशी प्रदीप रातुसरिया और अब भाजपा का दामन थाम चुके विधायक गोपाल कांडा ने विधानसभा चुनाव से पहले डेरे की हाजिरी भरी। इसी तरह भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने अपने प्रतिनिधियों को डेरा सच्चा सौदा भेजा था।

इस पत्रकार की जानकारी बताती है कि 24 नवंबर को डेरा सलाबतपुरा वाले समागम में भी कई अकाली और भाजपा समर्थक तथा कार्यकर्ता वहां देखे गए। पंजाब में अब शिरोमणि अकाली दल की डेरा विरोधी किसी भी किस्म की बयानबाजी पूरी तरह से बंद है। पहले पंथक संगठन सलाबतपुरा में होने वाले कार्यक्रमों का पुरजोर विरोध करते थे, लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। यह नए समीकरणों का एक इशारा है!

डेरा सच्चा सौदा सिरसा का बाकायदा एक प्रचार विभाग भी है जो गुपचुप अपना काम करता है। बाबा के सजायाफ्ता होने और डेरे में व्याप्त हो चुके सूनेपन के बाद उक्त विभाग लगभग निष्क्रिय था। उसने भी मोर्चा संभाल लिया है। फिर से इस प्रचार को हवा मिलने लगी है कि पंजाब, हरियाणा में डेरे के पचास लाख अनुयायी कई सीटों पर जीत-हार का निर्णायक फैसला करते हैं। कहा जाने लगा है कि जो डेरे के प्रति नरमी दिखाएगा और उसका इकबाल फिर से बहाल करने में सहयोग करेगा, डेरा प्रेमी उसका साथ देंगे।

हरियाणा में भाजपा तो पंजाब में शिरोमणि अकाली दल शायद ‘नरमी’ दिखाने को तैयार और तत्पर हैं। इस सच को दरकिनार करके कि डेरा सच्चा सौदा के कुछ वोट भले ही हों, लेकिन उसका मुखिया राम रहीम गुरमीत सिंह कत्ल, बलात्कार और देशद्रोही सरीखी संगीन धाराओं के तहत उम्र भर के लिए जेल में बंद है।

हां, यह हकीकत जरूर जग जाहिर है कि राम रहीम गुरमीत सिंह जेल से अपनी सत्ता बरकरार रखना चाहता है और इसीलिए डेरे की गतिविधियों ने हरियाणा और पंजाब में एकाएक रफ्तार पकड़ी है। साथ ही, बाहर आई हनी प्रीत के जरिए भी कई खेल खेले जाने तय हैं। फिलहाल तो डेरे के वकील बाबा और हनी प्रीत की जेल में मुलाकात कराने के रास्ते तलाशने में सफल रहे। माना जा रहा है कि इस बहुचर्चित मुलाकात के बाद सच्चा सौदा के रंग-ढंग अथवा तौर तरीके नया आकार लेंगे। भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि सरकार के कुछ लोग भी इस कवायद में किसी न किसी स्तर पर डेरे की सहायता कर रहे हैं।

हनी प्रीत की राम रहीम गुरमीत सिंह से सुनारिया जेल में मुलाकात के लिए हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने अहम भूमिका अदा की है। इस दलील के साथ कि कानून इस मुलाकात की इजाजत देता है। माना जाता है कि अनिल विज डेरा सच्चा सौदा के प्रति अतिरिक्त उदार रवैया शुरू से ही रखते हैं। हरियाणा भाजपा के कुछ अन्य मंत्री, विधायक और वरिष्ठ नेता भी। यह सारा परिदृश्य क्या गुल खिलाएगा, इसे देखने के लिए ज्यादा दिन इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

(अमरीक सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल पंजाब लुधियाना में रहते हैं।)

This post was last modified on December 10, 2019 1:54 pm

Leave a Comment
Disqus Comments Loading...
Share
Published by

Recent Posts

उमर ख़ालिद ने अंडरग्राउंड होने से क्यों किया इनकार

दिल्ली जनसंहार 2020 में उमर खालिद की गिरफ्तारी इतनी देर से क्यों की गई, इस रहस्य…

2 hours ago

हवाओं में तैर रही हैं एम्स ऋषिकेश के भ्रष्टाचार की कहानियां, पेंटिंग संबंधी घूस के दो ऑडियो क्लिप वायरल

एम्स ऋषिकेश में किस तरह से भ्रष्टाचार परवान चढ़ता है। इसको लेकर दो ऑडियो क्लिप…

4 hours ago

प्रियंका गांधी का योगी को खत: हताश निराश युवा कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने के लिए मजबूर

नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक और…

5 hours ago

क्या कोसी महासेतु बन पाएगा जनता और एनडीए के बीच वोट का पुल?

बिहार के लिए अभिशाप कही जाने वाली कोसी नदी पर तैयार सेतु कल देश के…

6 hours ago

भोजपुरी जो हिंदी नहीं है!

उदयनारायण तिवारी की पुस्तक है ‘भोजपुरी भाषा और साहित्य’। यह पुस्तक 1953 में छपकर आई…

6 hours ago

मेदिनीनगर सेन्ट्रल जेल के कैदियों की भूख हड़ताल के समर्थन में झारखंड में जगह-जगह विरोध-प्रदर्शन

महान क्रांतिकारी यतीन्द्र नाथ दास के शहादत दिवस यानि कि 13 सितम्बर से झारखंड के…

18 hours ago