Monday, January 24, 2022

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लखनऊ: ऐपवा ने प्रदर्शन कर कहा- ‘धर्म संसद’ में भड़काऊ भाषण देने वालों को गिरफ्तार करो

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लखनऊ। अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) ने महंगाई व धर्म संसद के खिलाफ आज लखनऊ के BKT तहसील में विरोध मार्च और सभा की तथा मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन SDM को सौंपा।

सभा को संबोधित करते हुए ऐपवा की राज्य सहसचिव मीना सिंह ने कहा कि सत्ता-संरक्षण में धर्मसंसद के नाम पर दंगा भड़काने और देश को गृहयुद्ध की ओर धकेलने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने मांग किया कि ऐसे तत्वों को अविलंब गिरफ्तार किया जाए।

उन्होंने कहा कि दिल्ली, हरिद्वार से लेकर रायपुर तक खुलेआम अल्पसंख्यकों के जनसंहार का आह्वान करते हुए जहर उगला जा रहा है, राष्ट्रपिता गांधी को गालियां दी जा रही हैं, देश के पूर्व प्रधानमंत्री को गोली मारने की बात की जा रही है, देश को गृह-युद्ध की ओर धकेला जा रहा है और खुले आम कानून, संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सबसे चिंताजनक यह है कि दंगाइयों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है क्योंकि उन्हें सत्ता संरक्षण प्राप्त है।

उन्होंने कहा कि आसमान छूती महंगाई ने आज आम आदमी का जीवन दूभर कर दिया है। वैसे तो इसका दंश पूरा समाज भोग रहा है, पर असंगठित क्षेत्र के मेहनतकशों के लिये यह असह्य हो गयी है, क्योंकि, महंगाई की यह मार ऐसे समय पड़ रही है जब सरकार की गलत नीतियों और कदमों के चलते लोगों का रोजी-रोजगार भी संकट में है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के ज्वलंत सवालों का समाधान तो नहीं ही किया जा रहा है, उल्टे सत्ता-संरक्षण में धर्मसंसद के नाम पर दंगा भड़काने और देश को गृहयुद्ध की ओर धकेलने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने मांग किया कि ऐसे तत्वों को अविलंब गिरफ्तार किया जाए।

ऐपवा नेत्री राधा श्रीवास्तव ने कहा कि पहले नोटबन्दी, फिर GST और अंततः कोरोना-लॉक डाउन की बदइंतजामी के चलते पूरी अर्थव्यवस्था, कारोबार, नौकरी-धंधा सब चौपट हो गया। इस समय जरूरत इस बात की थी कि सरकार आम जनता के लिए बड़े पैमाने पर राहत पैकेज का एलान करती, लोगों के खाते में जीवन निर्वाह के लिए पैसा डालकर उनकी क्रयशक्ति बढ़ाती। इससे लोगों का जीवन भी आसान होता और ठप पड़ी अर्थव्यवस्था का पुनर्जीवन होता। कारोबार, रोजी-रोजगार के अवसर बढ़ते।

परन्तु सरकार ने बड़े बड़े पूँजीपतियों को तो राहत पैकेज के लिए खजाना खोल दिया लेकिन आम जनता, गरीबों-मेहनतकशों को कुछ नहीं दिया। उल्टे इसी बेकारी के दौर में महंगाई अंधाधुंध बढ़ाकर गरीबों के मुंह का निवाला भी छीन लिया। आम परिवारों के बच्चों की पढ़ाई, परिवार का स्वास्थ्य-दवा-इलाज सब कुछ भगवान भरोसे है।

सभा को सम्बोधित करते हुए भाकपा (माले) व निर्माण मजदूर यूनियन के अध्यक्ष नौमीलाल ने कहा कि आज इस बात की जरूरत है कि महंगाई को आंदोलन का बड़ा मुद्दा बनाकर सरकार को इसे नियंत्रित करने और सस्ते दर की दुकानों के माध्यम से सभी जीवनोपयोगी वस्तुएं उपलब्ध कराने के लिए बाध्य किया जाए। चुनाव के इस दौर में इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर सभी पार्टियों को ऐसी नीति बनाने और उसे अपने घोषणापत्र में शामिल करने के लिए मजबूर किया जाए जिससे महंगाई पर स्थायी तौर पर लगाम लगे और सबके लिए योग्यतानुसार नौकरियों तथा रोजी-रोजगार की गारण्टी हो, सस्ती शिक्षा और चिकित्सा की व्यवस्था हो। सभा का संचालन राधा श्रीवास्तव ने किया ।

ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि :

1- रसोई गैस का दाम रुपये 500/- फिक्स किया जाय।

2-सरसों तेल का दाम आधा किया जाय।

3- सभी खाद्य पदार्थों को सस्ते दर पर आम जनता-गरीबों को उपलब्ध कराया जाय।

4 -डीजल-पेट्रोल का दाम घटाया जाय।

5- गरीबों को मुफ्त राशन-तेल-नमक-चीनी-दाल के वितरण को मार्च, महज चुनाव तक नहीं, बल्कि स्थायी किया जाय।

6- मनरेगा की तर्ज़ पर शहरी गरीबों-महिलाओं के लिए भी काम की गारंटी की जाय और काम का वाजिब दाम दिया जाय।

प्रदर्शन व सभा में उपस्थित प्रमुख लोग थे – प्रेमा, सबिता, उर्मिला, मालती गौतम, लज्जावती, सिवानी, माया देवी, केतकी आदि।

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