छत्तीसगढ़: कांकेर संसदीय क्षेत्र में ग्रामीण कर रहे हैं चुनाव बहिष्कार की तैयारी

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chhattisgarh kanker election boycott

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रायपुर/कांकेर। छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की कमान संभालने के बाद विक्रम उसेंडी अपने गृह जिला कांकेर पहुंचे थे। जिला मुख्यालय पहुंचने पर उनका  एक ओर जहां स्वागत हो रहा था और वह खुली जीप में लोगों का अभिवादन कर रहे थे वहीं दूसरी ओर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विक्रम उसेंडी के संसदीय क्षेत्र और उनके ब्लॉक मुख्यालय कोयलीबेड़ा के 17 गांव के सरपंच और ग्रामीण लोक सभा चुनाव का बहिष्कार करने के संकल्प के साथ एक दिवसीय धरना दे रहे थे। 

11 मार्च को कोयलीबेड़ा ब्लॉक के 17 गांव के ग्राम सरपंच और ग्रामीणों ने एक दिवसीय धरना दिया और ज्ञापन सौंपा। ग्रमीणों ने बताया कि 19 वर्ष पहले कोयलीबेड़ा में ब्लॉक मुख्यालय का नींव रखा गया था। बाकायदा ब्लॉक मुख्यालय में दफ्तर भी स्थित है लेकिन ब्लॉक मुख्यालय के सारे दफ्तरों को अघोषित तरीके से 120 किमी दूर पखांजुर में संचालित किया जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि हमें छोटे से प्रशासनिक काम के लिए 120 किमी दूर पखांजुर जाना पड़ता है। वहीं ग्रामीणों की दूसरी मांग बैंक शाखा को लेकर है। कोयलीबेड़ा में बैंक का शाखा नहीं है औऱ 27 किमी दूर अंतागढ़ ब्लॉक में स्थापित कर दिया गया है। ग्रामीणों ने जल्द इस समस्या का निदान न होने पर लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने की बात कह रहे हैं। 

वहीं नव नियुक्त प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विक्रम उसेंडी भाजपा की कमान संभालने के बाद पहली दफा जिला मुख्यालय पहुंचे थे जो उनका संसदीय क्षेत्र भी है। कांकेर पहुंचने पर विक्रम उसेंडी ने दावा किया कि भाजपा छत्तीसगढ़ में सभी 11 संसदीय सीट जीतेगी। लेकिन उन्हीं के पैतृक ब्लॉक मुख्यालय के ग्रामवासी अपनी समस्याओं को लेकर धरने पर बैठे हुए थे और ये समस्या 19 वर्ष पुरानी है। अब ऐसे में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विक्रम उसेंडी का 11 सीट जीतने का दावा कितना सही है ग्रामीणों के धरने से स्पष्ट होता है।  

बता दें कि विक्रम उसेंडी का पैतृक गांव कोयलीबेड़ा ब्लाक के बोदानार में स्थित है। विक्रम उसेंडी का राजनीतिक सफरनामा ही कोयलीबेड़ा क्षेत्र से शुरू हुआ था, लेकिन आज स्थिति यह है कि विधायक, सांसद,बस्तर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष और पार्टीं में विभिन्न उच्च पदों पर रहने के बाद हाल ही में प्रदेशअध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। लेकिन अब उन्हीं के क्षेत्र में ग्रामीण लोकसभा चुनाव के बहिष्कार की बात कर रहे है।

कोयलीबेड़ा निवासी सहदेव उसेंडी ने बताया कि हमने विधानसभा चुनाव 2018 में भी सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को इस समस्या से रुबरु कराया था लेकिन सभी ने आश्वासन दिया और भूल गए। विक्रम उसेंडी इसी क्षेत्र से हैं उनका राजनीतिक ग्राउंड भी इसी क्षेत्र में है लेकिन वर्षों पुरानी मांग को अब तक पूरा नहीं किया गया है। हमने कई बार रैली, धरना, ज्ञापन दे डाला है लेकिन समस्या जस की तस है। 

गोंडवाना समाज ब्लॉक अध्यक्ष सिरधर उयके ने कहा सप्ताह में दो दिन अधिकारी को आना है, लेकिन वे भी ठीक से नहीं आते। इससे छोटे-छोटे काम के लिए भी 120 किलोमीटर दूर पखांजुर जाना पड़ता है, जबकि कोयलीबेड़ा ब्लॉक मुख्यालय होने के बाद भी अधिकारी लिंक कार्यालय पखांजुर में डेरा जमाए बैठे हैं। क्षेत्र में कोई बैंक नहीं होने से लोगों को परेशानी हो रही है। अंदरूनी क्षेत्र के ग्रामीण चिलपरस, पनीडोबीर, बोगन कडमे, कंदाड़ी, अलपसर, गट्टाकल जैसे गांव के लोग 30-40 किमी से कोयलीबेड़ा पहुंचते हैं और इसके बाद फिर उन्हें भुगतान लेने अंतागढ़ जाना पड़ता है। यहां भी कई बार लिंक व अन्य समस्या होती है।

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