30.1 C
Delhi
Friday, September 17, 2021

Add News

ग्राउंड रिपोर्रटः आजादी के बाद से सिर्फ तीन लोगों ने ही की इंटरमीडियट तक पढ़ाई

ज़रूर पढ़े

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की कमी की वजह से शिक्षा का बुरा हाल है। 75 प्रतिशत से अधिक स्कूलों शिक्षकों की कमी सामने आई है। आलम यह है कि उत्तर बस्तर कांकेर जिला के कोयलीबेड़ा ब्लॉक अन्तर्गरत आने वाला कामतेड़ा पंचयात और आश्रित पांच गांवों में आजादी के सात दशक बाद मात्र तीन छात्र ही 12वीं पास हो पाए हैं। बस्तर में ऐसे सैकड़ों मामले हैं।

नक्सलियों का हवाला देकर सरकार इन बच्चों को शिक्षा से वंचित रख रही है। कहीं पाठशाला भवन नहीं हैं तो कहीं शिक्षक ही मौजूद नहीं हैं, जबकि इस क्षेत्र में दर्जनों सुरक्षा बल नागरिक सुरक्षा के नाम पर खनन कंपनियों को सुरक्षा दे रहे हैं।

हमने बस्तर के एक गांव पंचायत कामतेड़ा का नजारा देखा। उत्तर बस्तर के कोयलीबेड़ा ब्लॉक के कामतेड़ा पंचायत जिसके पांच आश्रित गांव काटाबांस, कटगांव, जामडी, गुंटाज और मिंडी आते हैं। पांच आश्रित ग्रामों में पूर्व माध्यमिक पाठशाला में दो शिक्षक पर्याप्त हैं। वहीं माध्यमिक स्कूल कामतेड़ा पंचायत मुख्यालय में स्थित है। यहां सिर्फ दो शिक्षक हैं। गणित, विज्ञान, अंग्रेजी के शिक्षक आज तक पदस्थ नहीं हुए हैं। स्थिति यह है कि आजादी के बाद आज तक छह गांवों से सिर्फ तीन लोगों ने 12वीं कक्षा पास की है। सिर्फ दो लोग  सरकारी नौकरी करते हैं। 

शिक्षक सहदेव उसेंडी बताते हैं, “माध्यमिक शिक्षा में 18 विषय के दो शिक्षक पढ़ाते हैं। 90 प्रतिशत छात्र आठवीं पढ़ने के बाद छोड़ देते हैं। जो छात्र हाईस्कूल की शिक्षा के लिए एडमिशन लेते हैं वो भी बीच में पढ़ाई छोड़ कर चले जाते हैं।” सहदेव बताते हैं कि जब स्कूली शिक्षा की नींव ही लचर अवस्था में है तो आगे का स्तर खराब रहेगा ही। बच्चे हाईस्कूल की शिक्षा के लिए मानसिक तौर पर तैयार ही नहीं रहते। वापस घर आ जाते हैं। 

मिन्डी के ग्रामीण सारधुराम तेता कहते हैं कि 2012 से 2018 के बीच तीन छात्र मिन्डी निवासी श्याम सिंह सलाम, बलि  राम नुरेटि निवासी मिन्डी और बारू राम कोमरा निवासी कामतेडा ने 12वीं पास किया है। इन्होंने भी हाई स्कूल दूसरी जगह से किया है। ब्लॉक मुख्यालय के स्कूलों या आश्रमों में रह कर इन्होंने 12 पास किया और छोड़ फिर पढ़ाई छोड़ दी। सारधु तेता बताते हैं कि इन्ही में से दो लोग सरकारी नौकरी करते है। 

कामतेड़ा ग्राम पंचायत के ही काटाबांस के प्राथमिक पाठशाला में तीन छात्र हैं और दो शिक्षक हैं। ऐसे ही प्राथमिक स्कूल भी हैं। बगल के गांव का माध्यमिक शिक्षा का स्तर भी ऐसा ही है। यहां भी गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के शिक्षक नहीं हैं।

25 सालों से बीहड़ संवेदनशील क्षेत्र कामतेडा प्राथमिक स्कूल में ग्राम वाला के पदस्थ शिक्षक धन्नू राम नेगी शिक्षा की स्थिति को देखकर काफी नाराज हैं। वह बताते हैं कि इस क्षेत्र में शिक्षा की स्थिति दयनीय है। पहले तो बच्चे स्कूल नहीं आते थे। झोपड़ी में स्कूल लग रहा था, लेकिन पढ़ाने वाले शिक्षक आज तक नहीं आ पाए। नेगी कहते हैं कि आज भी कामतेडा में पढ़ाने आने के लिए उफनाई नदी पार करता हूं। इसके बाद भी बच्चे शिक्षा से परिपक्व नहीं हो पा रहे हैं। 

“यूडीआईएसआई के आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में 2017-2018 की तुलना में 2018-2019 में प्राथमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने वालों की शिक्षा दर में वृद्धि आई है। नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है कि छत्तीसगढ़ में प्राइमरी के सिर्फ 51.67 बच्चों में भाषा, गणित और पर्यावरण को जानने-समझने की क्षमता है।

सेकेंडरी में 45 बच्चे ही हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान में बेहतर कर पाते हैं। कुछ महीनों पहले छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक सवाल के जवाब में सरकार ने बताया था कि राज्य में स्कूलों में प्रिंसिपलों के कुल 47562 पदों में से 24936 पद रिक्त हैं। पंचायत शिक्षकों के 53000 पद रिक्त हैं। नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में 75 प्रतिशत से अधिक स्कूल, शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं.

लोकसभा में मानव संसाधन और विकास मंत्री की ओर से स्कूलों की संख्या को लेकर आंकड़े पेश किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि सत्र 2014-15 में प्रदेश में 35 हजार 149 प्राथमिक स्कूल थे। इसके बाद सत्र 2015-16 में इनकी संख्या 32 हजार 826 हो गई। इसके बाद सत्र 2016-17 में संख्या थोड़ी बढ़ी और 2551 हो गई। फिर 2017-18 में संख्या और बढ़ी और 33 हजार 208 हो गई, लेकिन इसके बाद 2018-19 में स्कूलों की संख्या में फिर कमी हुई और संख्या घटकर 32 हजार 811 रह गई।

प्रदेश में माध्यमिक स्कूलों की संख्या को लेकर भी लोकसभा में आंकड़े पेश किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि सत्र 2014-15 में प्रदेश में दो हजार 521 प्राथमिक स्कूल थे। इसके बाद सत्र 2015-16 में इनकी संख्या दो हजार 465 हो गई। फिर सत्र 2016-17 में संख्या थोड़ी बढ़ी और दो हजार 551 हो गई। इसके बाद 2017-18 में संख्या चार हजार 136 और 2018-19 में माध्यमिक स्कूलों की संख्या घटकर दो हजार 702 रह गई।

उत्तर बस्तर क्षेत्र के कांकेर विधानसभा क्षेत्र के विधायक शिशुपाल शोरी पूरे मामले को लेकर कहते हैं, “मैं आंकड़ों में नहीं जाऊंगा। ये जमीनी हकीकत है कि गणित, विज्ञान, अंग्रेजी के शिक्षकों की भारी कमी है। पूरे छत्तीसगढ़ में स्कूल बंद करने का सिलसिला बीजेपी ने शुरू किया था। उन्होंने हजारों की तादात में स्कूल बंद कर दिए थे। उन्हें पुर्नजीवित करने का कार्य हमारी सरकार के द्वारा किया जा रहा है। लगभग 300 बंद स्कूल चालू किए गए हैं। शिशु पाल सोरी ने बताया कि शिक्षकों की पूर्ति के लिए 15 हजार शिक्षकों की भर्ती हमारी सरकार करेगी।

हालांकि कांग्रेसी विधायक सरकार बनने के एक साल का हवाला दे रहे हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि आजादी के सात दशक बाद भी तमात शिक्षा योजनाओं के बावजूद आदिवासी अंचलों में आज भी बच्चे शिक्षा पाने से महरूम हैं। जिस क्षेत्र में दर्जनों सुरक्षा बलों के कैंप तन सकते हैं। खनन के लिए बड़ी-बड़ी गाड़ियां दौड़ सकती हैं, वहां शिक्षक और शिक्षा क्यों नहीं दिए जा रहे हैं? बता दें कि इन क्षेत्रों से उचित शिक्षा और शिक्षकों की पूर्ति के लिए आवाज बुलंद होती रहती है, लेकिन सरकार नक्सल का बहाना कर आज भी सिर्फ कैंप और खदान ही बढ़ रहे हैं। 

(रायपुर से जनचौक संवाददाता तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट।)

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

यूपी में बीजेपी ने शुरू कर दिया सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का खेल

जैसे जैसे चुनावी दिन नज़दीक आ रहे हैं भाजपा अपने असली रंग में आती जा रही है। विकास के...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -

Log In

Or with username:

Forgot password?

Forgot password?

Enter your account data and we will send you a link to reset your password.

Your password reset link appears to be invalid or expired.

Log in

Privacy Policy

Add to Collection

No Collections

Here you'll find all collections you've created before.