Sun. Aug 18th, 2019

जयपुर जेल में कैदियों ने मांगी सुरक्षा पुलिस ने किया हमला: रिहाई मंच

1 min read
Jaipur Jail Prisoner

Jaipur Jail Prisoner

लखनऊ। जयपुर सेंट्रल जेल में विचाराधीन कैदियों पर जेल प्रशासन द्वारा बर्बर हमले को पूर्वनियोजित करार देते हुए रिहाई मंच ने आरोपियों की सुरक्षा को लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से जवाब मांगा है। जयपुर सेन्ट्रल जेल में इससे पहले भी सितम्बर 2009 में मोहम्मद सरवर और अन्य को जेल प्रशासन द्वारा लाठियों से पीटा गया जब वे ईद की नमाज अदा करना चाहते थे।

रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने जयपुर के मानवाधिकार और सामाजिक संगठनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिस तरह इस गंभीर मामले पर सवाल उठाया गया वो जेल में कैद इन युवाओं के जीवन के लिए बहुत जरुरी कदम है। कैदियों की सुरक्षा की मांग जिस पर मामला न्यायालय में था उस दौरान कैदियों के साथ हिंसा राजस्थान सरकार में खुली पुलिसिया गुंडई है। उन्होंने कहा कि देश की विभिन्न जेलों में इससे पहले भी आतंकवाद के आरोपियों पर हमले और उनकी हत्याएं तक हो चुकी हैं। सवाल यह है की इतनी हाई सिक्योरिटी में जेल प्रशासन की मिलीभगत के बगैर ये हमले कैसे हो सकते हैं। जिस तरह से जयपुर जेल मामले में कहा जा रहा है कि कैदी ने खुद अपना हाथ चीर लिया और एक ने सिर दीवार पर दे मारा और जेल डीजी की अंगुली तोड़ दी ऐसे ही तर्क इससे पहले भी कतील सिद्दीकी की यरवदा जेल में हत्या, वारंगल फर्जी मुठभेड़ हो या फिर भोपाल जेल ब्रेक की फर्जी कहानी के बाद पुलिस ने दिए थे।

देश दुनिया की अहम खबरें अब सीधे आप के स्मार्टफोन पर Janchowk Android App

मुहम्मद शुऐब ने कहा कि जयपुर सेंट्रल जेल में जयपुर धमाकों के आरोप में कैद विचाराधीन कैदियों ने हाई सेक्योरिटी कक्ष में शिकायत पेटिका लगाए जाने और जेल मैनुअल में दर्ज विज़िटर्स कमेटी और एक जज को भेजने की मांग करते हुए 28-29 मार्च को भूख हड़ताल की। 29 मार्च को विचाराधीन कैदियों ने इन्हीं मांगों और जेल कर्मचारियों द्वारा मारपीट की धमकी देने को लेकर विशेष अदालत में आवेदन भी किया जिसको संज्ञान में लेते हुए ज़िला जज ने जेल प्रशासन को नोटिस भेजा। 30 मार्च को विधाराधीन कैदियों ने पुनः विशेष अदालत में आवेदन किया और आरोप लगाया कि मुख्य कारापाल कमलेश शर्मा और गार्ड रमेशचंद्र मीणा ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी है इस पर जज महोदय ने जेल प्रशासन को फिर नोटिस जारी किया।

उन्होंने कहा कि जब विचाराधीन कैदी शहबाज़, सैफुर्रहमान, मो० सैफ, सलमान और सरवर जेल पहुंचे तो उक्त मांग करने वाले अन्य कैदियों के साथ इन लोगों की बर्बर तरीके से पिटाई की गई और प्राप्त जानकारी के अनुसार भदोही निवासी शहबाज़ के सिर में गंभीर चोट आई है जबकि आज़मगढ़ निवासी सलमान के हाथ में फ्रैक्चर है। इससे पहले भी दिल्ली में सलमान पर देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली तिहाड़ जेल में 2010 में धारदार हथियार से जानलेवा हमला हो चुका है।

रिहाई मंच प्रभारी मसीहुद्दीन संजरी ने बताया कि 20 फरवरी को आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे पाकिस्तानी कैदी शकीरुल्लाह की हत्या के बाद से ही जेलकर्मी लगातार इन आरोपियों को प्रतिदिन दिन में 23-23 घंटे तक उनकी सेलों में बंद रखते थे और मानसिक यातना देते थे। उन्होंने यह बताया कि जयपुर सेंट्रल जेल में कैद चांदपट्टी आज़मगढ़ निवासी मो. सरवर के चचा रविवार 31 मार्च की सुबह अपने भतीजे से मिलने जेल पहुंचे तो उन्हें घटना की कोई जानकारी नहीं थी। वह आवेदन करने के बाद मुलाकात की बारी का इंतज़ार करते रहे। शाम तक जब उनका नम्बर नहीं आया तब उन्होंने गेट पर जेलकर्मी से पूछा तो उनको कह दिया गया कि आप यहां से चले जाइए मुलाकात नहीं कराई जाएगी। इस घटना के बाद परिजनों को कैदियों से मिलने पर अघोषित रोक लगा दी गई है।

कैदियों की मांग और उनकी सुरक्षा को लेकर न्यायलय में चल रहे मामले के इतर जेल सूत्रों के हवाले से खबर छपवाकर पूरे मामले के लिए कैदियों को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। सूत्रों के हवाले से प्रकाशित समाचार में कहा गया है कि पाकिस्तानी कैदी शुकरुल्लाह की मौत के बाद उसके पास से मोबाइल बरामद हुआ था जिसके चलते जेल डीजी एनआरके रेड्डी ने सप्ताह में एक या दो बार वार्डों में सर्च करने के निर्देश दिए थे। हाई सेक्युरिटी वार्ड दस में कभी-कभी दिन में दो बार तलाशी ली जाती थी। यह भी दावा किया गया कि डीजी ने वीडियो कैमरा चालू कर तलाशी के निर्देश दिए थे। जब शनिवार को जेल डीजी प्रहरियों के साथ हाईसेक्युरिटी वार्ड दस में वीडियो लेकर तलाशी लेने पहुंचे तो कैदियों ने विरोध किया और जेल डीजी की अंगुली तोड़ दी। प्रहरियों को डराने धमकाने के लिए एक कैदी ने नुकीली वस्तु से अपने हाथ पर चीरा लगाया तो दूसरे ने सिर दीवार पर दे मारा। रिपोर्ट के मुताबिक विचाराधीन कैदियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

आजमगढ़ से रिहाई मंच प्रभारी मसिहुद्दीन संजरी और तारिक शफीक ने देश की विभिन्न जेलों में बंद आजमगढ़ समेत सभी जगह के लड़कों की सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस घटना के लिए गढ़ा गया तर्क उतना ही हास्यास्पद लगता है जितना कि भोपाल जेल में लकड़ी की चाभी से ताला खोलना, अहमदाबाद जेल में दातून और चम्मच से सुरंग खोदना या वारंगल में हाथों में हथकड़ी और जंजीर से जीप में बंधे होने के बावजूद आरोपियों का भागने का प्रयास करना। जयपुर धमाकों के मुकदमे की सुनवाई अपने अंतिम चरण में है और बहुत जल्द ही फैसला आने का अनुमान है। ऐसे में जेल में कैदियों द्वारा जेल अमले पर हमले की घटना के माध्यम से फैसले से पहले आरोपियों के खिलाफ माहौल बनाकर अदालत को प्रभावित करने और नया मुकदमा कायम कर आरोपियों को जेल में सड़ाते रहने की साजिश प्रतीत होती है।

Donate to Janchowk
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people start contributing towards the same. Please consider donating towards this endeavour to fight fake news and misinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

Leave a Reply