Monday, January 24, 2022

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झारखंड: सत्ता परिवर्तन के एक बरस बाद भी नहीं बदला पुलिस का चरित्र, आदिवासियों का जारी है उत्पीड़न

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झारखंड में सत्ता परिवर्तन हुए अब एक साल होने को है। भाजपा के गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री रघुबर दास की जगह झामुमो के आदिवासी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सत्ता पर काबिज हैं, लेकिन झारखंड में आदिवासियों पर पुलिसिया दमन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। कभी अर्द्धसैनिक बल गांव में जाकर ग्रामीण आदिवासियों के साथ मारपीट करता है, तो कभी झारखंड पुलिस के ऑफिसर आदिवासियों को निशाना बनाते हैं।

हालिया मामला बोकारो जिले के पेंक-नारायणपुर थानान्तर्गत धावैया गांव निवासी बंशी मांझी के साथ पुलिस द्वारा निर्दयता के साथ मारपीट का है। पुलिस की पिटाई से बंशी मांझी की नाक की हड्डी और दांत टूट गए हैं और सर में अंदरूनी चोट भी है। फिलहाल इनका चास (बोकारो) के मुस्कान अस्पताल में इनकी कंपनी आईइएल (इंडियन एक्सप्लोसिव लिमिटेड), गोमिया द्वारा इलाज करवाया जा रहा है।

बंशी मांझी के भाई गोविंद हांसदा ने बताया कि भैया आईइएल (इंडियन एक्सप्लोसिव लिमिटेड),  गोमिया के कर्मचारी हैं। प्रति दिन की तरह 12 दिसंबर को भी वे ड्यूटी से शाम को साईकिल से अपने गांव लौट रहे थे। रास्ते में बुडगड्डा मोड़ के पास चेकिंग के नाम पर पेंक थाना की पुलिस ने उन्हें रोका और जातिसूचक शब्दों से गाली-गलौच करते हुए एएसआई सुमन कुमार सिंह ने उन्हें बुरी तरह से बंदूक के बट से पीटा, जिससे उनके मुंह और नाक से खून बहने लगा। फिर भी किसी तरह वे घर पहुंचे।

उन्होंने बताया कि ‘जब घायलावस्था में भैया को लेकर आईइएल, गोमिया अस्पताल जा रहे थे, तो रास्ते में भी एएसआई सुमन कुमार सिंह ने हमें धमकाया कि अगर थाने में शिकायत करोगे तो पूरे परिवार को मार देंगे। पहले भी इसी ऑफिसर ने गांव के ही एक जमीनी विवाद में भैया को जान से मारने की धमकी दी थी।

वहीं पुलिस अधिकारी का कहना है कि बशी नशे में था और साईकिल से गिरकर घायल हो गया है। पुलिस ने उनके साथ मारपीट नहीं की है। पुलिस के उक्त बयान पर गोविंद हांसदा कहते हैं कि अगर मेरे भैया साईकिल से गिरकर घायल हुए हैं, तो फिर एएसआई सुमन कुमार सिंह ने थाना नहीं जाने के लिए धमकी क्यों दी और जब उसे लगा कि हम उसके खिलाफ एक्शन लेंगे, तो फिर अपनी नौकरी बचाने की गुहार क्यों लगाने लगा? यहां तक कि उसने मेरी भाभी को 4000 रुपये भी दिए, ताकि हम उसके खिलाफ थाना में शिकायत नहीं करें। आखिर ये सब एएसआई सुमन कुमार सिंह क्यों कर रहा था?

उपरोक्त घटना से स्पष्ट है कि झारखंड में सत्ता परिवर्तन हुए तो एक साल हो गया है, लेकिन सत्ता का चरित्र बिल्कुल भी नहीं बदला है। अगर झारखंड में आदिवासियों पर पुलिस जुल्म इसी तरह होता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब झारखंड के आदिवासी सरकार की मुखालफत में सड़कों पर होंगे।

उक्त मामले पर झारखंड जनाधिकार महासभा के ट्वीट पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड पुलिस को मामले की गंभीरता से जांच करने और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई कर सूचित करने का आदेश दिया है।

(झारखंड से स्वतंत्र पत्रकार रूपेश कुमार सिंह की रिपोर्ट।)

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