Sat. Jan 25th, 2020

नंदराज पर्वत के खनन विरोधी आंदोलनकारियों के “एनकाउंटर” की न्यायिक जांच हो: पीयूसीएल

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पीयूसीएल छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष, डिग्री प्रसाद चौहान और सचिव, शालिनी गेरा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि बेला भाटिया, सोनी सोरी, मड़कम हिडमे और लिंगराम कोड़ोपी के द्वारा किए गए फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट, मीडिया में आए समाचार और विभिन्न सामाजिक वा राजनैतिक संगठनों के कथनों के आधार पर पीयूसीएल छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार से मांग करती है कि 13 सितमबर 2019 की रात को तथाकथित मुठभेड़ में मारे गए पोडिया सोरी और लच्छू मंडावी के मामले में उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा जांच के आदेश तुरंत जारी किये जाए।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि पीयूसीएल दंतेवाड़ा पुलिस की कार्यवाही से चकित है जिसने सामाजिक कार्यकर्ताओं, दंतेवाड़ा के सरपंचों, साथ ही 150-200 अज्ञात आदिवासी ग्रामीणों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जो केवल एक गैर कानूनी हत्या की शिकायत दर्ज कर रहे थे और अन्याय के खिलाफ एक शांतिपूर्ण विरोध में लगे हुए थे। पीयूसीएल पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा करती है, जो आदिवासी अधिकारों के लिए लड़ने वालों को डराने की मंशा से की गई है।
यह तो सभी जानते हैं कि पोडिया सोरी और लच्छू मंडावी दंतेवाड़ा जिले के ग्राम गुमियापाल के सम्मानित युवा नेता थे, जो किरंदुल के नंदराज पर्वत में लौह अयस्क खनन कार्य शुरू करने के लिए खनन दिग्गज अडानी समूह की योजनाओं के खिलाफ जन आंदोलन में सक्रिय थे। नंदराज पर्वत को आदिवासी समुदाय पवित्र देवस्थल मानते हैं, जिसका काफी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। हाल ही में, प्रभावित गांव की ग्राम सभा से प्राप्त फ़र्ज़ी अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) के खिलाफ व्यापक जन विरोध व प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद मामले की जांच के लिए एक मजिस्ट्रेटी जांच शुरू हुई है। लेकिन 13 सितंबर 2019 को,पोदिया सोरी और लच्छू मंडावी, दोनों को उनके अपने ही गांव में सुरक्षा बलों ने मार डाला और 5 लाख के इनामी नक्सली कमांडरों के रूप में घोषित किया।
ग्रामीणों का दावा है कि पोदिया और लच्छू किसी भूमिगत माओवादी आंदोलन में शामिल नहीं थे और वे सुरक्षा बलों के साथ गोलीबारी में नहीं मारे गए थे। फैक्ट-फाइंडिंग टीम के बेला भाटिया, सोनी सोरी, लिंगा कोडोपी और हिडमे मदकम को ग्रामीणों ने बताया कि 13 सितंबर 2019 की रात दोनों युवक तीन अन्य युवाओं के साथ कुछ मनोरंजन के लिए स्कूल के परिसर में इकट्ठे हुए थे। रात लगभग 9 बजे, जब पोदिया स्कूल परिसर छोड़कर अपने किसी दोस्त के घर सोने चला गया था, तभी वहां सुरक्षा बल वाले अचानक आये और स्कूल प्रांगण में युवकों को घेर कर पोदिया को उसके दोस्त के घर से घसीटकर निकाला। सुरक्षा बलों ने पांचों ग्रामीणों को, जिसमें पोडिया और लच्छू शामिल थे, थप्पड़ मारे, पिटाई की और वहां से बलपूर्वक उन्हें ले गए। रास्ते में, दो युवक चकमा देकर भागने में सफल रहे और वे वापस अपने घर को आ गए। अगली सुबह, ग्रामीणों को पता चला कि पोदिया और लच्छू मारे गए हैं और उन्हें खूंखार नक्सली के रूप में दिखाया गया है। पांचवां युवक अजय तेलम पुलिस की हिरासत में ही था।
उपरोक्त जानकारी के साथ 16 सितंबर की शाम अधिवक्ता और शोधकर्ता बेला भाटिया, आप नेता सोनी सोरी, दो आदिवासी महिला कार्यकर्ता हिडमे मडकाम और पांडे कुंजामी किरंदुल पुलिस थाना पहुंचे। इस अन्याय के विरोध में सैकड़ों ग्रामीण अपने-अपने गांव से रैली निकालकर थाना आए और वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन के साथ बैठ गए। पुलिस थाने में शिकायत और आदिवासी ग्रामीणों द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन का उद्देश्य दो युवकों की फर्जी मुठभेड़ में हत्या के खिलाफ आवाज उठाना और तीसरे युवा के बारे में जानकारी प्राप्त करना था। लेकिन उनमें से किसी को भी पुलिस ने थाने में प्रवेश नहीं होने दिया और शिकायतपत्र को थाने के बंद गेट की सलाखों से ही लिया गया। अगले दिन जब टीम शिकायत की फॉलो अप के लिए लौटी तो एसडीओपी किरंदुल ने ऊंचे स्वर में उन पर आरोप लगाए कि वे ग्रामीणों को घेर कर लाये हैं और सारा विरोध इन्हीं के द्वारा रचाया गया है। यह विडंबना है कि सामाजिक कार्यकर्ताओं की पुलिस के खिलाफ शिकायत को एफआईआर के रूप में भी दर्ज नहीं किया गया, उल्टा उनके ऊपर आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाकर बेला भाटिया, सोनी सोरी, सरपंच नंदा, सरपंच पति भीमा और 150-200 अन्य ग्रामीणों के ऊपर भा.द.वि. की धारा 188 के तहत क्रमांक 62/2019 किरंदुल थाना में एफआईआर दर्ज हुआ।
पीयूसीएल छत्तीसगढ़, दंतेवाड़ा पुलिस के इस शत्रुतापूर्ण व्यवहार से हैरान है। छत्तीसगढ़ के बघेल सरकार के कई वादों के बावजूद धरातल पर बहुत कम बदलाव हुआ है। फर्जी मुठभेड़ जारी हैं और निर्दोष आदिवासी जो अपने अधिकारों के लिए खड़ होता है, उसे अभी भी नक्सली के रूप में सुरक्षा बलों द्वारा जानबूझकर निशाना बनाकर मारा जा रहा है। जब भी मानवाधिकार कार्यकर्ता शांतिपूर्ण ढंग से पुलिस की जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग करते हैं तो शासन-प्रशासन उन्हें जन विरोधी, कठोर और न्याय-विरोधी उपायों से परेशान करते हैं।
पीयूसीएल छत्तीसगढ़ सरकार और स्थानीय पुलिस की इन कार्रवाइयों का पुरजोर विरोध करता है। पीयूसीएल यह मांग करता है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा स्वतंत्र जांच तुरंत करवाई जाए, जिसमें  गुमियापाल गांव के पोदिया सोरी और लच्छू मंडावी की हत्या, अजय तेलम का गैर कानूनी हिरासत शामिल हो। किरंदुल थाना में बेला भाटिया, सोनी सोरी, और अन्य ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज एफआईआर क्रमांक 62/2019 के संबंध में खात्मा रिपोर्ट संबंधित मजिस्ट्रेट को तुरंत भेजी जाए और पुलिस द्वारा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न को बंद किया जाए।

(विशद कुमार सामाजिक कार्यकर्ता हैं और रांची में रहते हैं।)

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