Sunday, October 24, 2021

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भड़काऊ भाषण देने वाले करणी सेना के सूरजपाल अम्मू पर अब तक कार्रवाई नहीं

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नूंह (मेवात)। हरियाणा के मुस्लिम बहुत इलाके मेवात में तनाव कायम है। अभी शांति कायम है। आसिफ हत्याकांड में आरोपियों को छोड़ने की मांग को लेकर हिन्दुओं की महापंचायत के जवाब में मुसलमानों ने महापंचायत करने से साफ मना कर दिया है। इस सिलसिले में  खुद भाजपा से जुड़े मेवात के नेता कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनकी कोशिशों को यहां की जनता ने एकजुट होकर नाकाम कर दिया है। अगर मेव महापंचायत होती तो इससे माहौल और खराब हो सकता था। लॉकडाउन के दौरान धारा-144 तोड़कर इंडरी गांव में की गयी महापंचायत के आयोजकों के खिलाफ पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। हालांकि पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि महापंचायत में भड़काऊ भाषण देने की हमने पहचान कर ली है। लेकिन एक्शन गायब है।

चार आरोपियों को बताया निर्दोष

16 मई को रोजका मेव थाने के तहत पड़ने वाले गांव खेड़ा खलीलपुर में जिम ट्रेनर आसिफ की दो दर्जन लोगों ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। आसिफ अपनी मां की दवाई लेकर घर लौट रहा था। इस घटना में आसिफ के दो भाई भी घायल हो गए थे, जो इस घटना के चश्मदीद भी हैं। उनकी शिकायत पर पुलिस ने 14 लोगों के खिलाफ नामजद और 20 अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। पुलिस ने 13 मुलजिमों को गिरफ्तार किया। लेकिन महापंचायत के बाद पुलिस ने चार आरोपियों महेन्द्र, अनूप, संदीप और राजकुमार को निर्दोष बताया है। पुलिस ने मंगलवार यानी 8 जून को नूंह जिला कोर्ट में इनकी डिस्चार्ज रिपोर्ट पेश कर दी है। ये वे चार मुलजिम हैं, जिन्हें पुलिस ने शुरुआत में गिरफ्तार किया था। इनके अलावा मुख्य आरोपी प्रदीप उर्फ पटवारी, अडवाणी, भीम, ऋषि, सोनू, कोंटा, बल्ला, नत्थू, कुलदीप, को बाद में गिरफ्तार किया था।  

महापंचायत के बाद आसिफ का परिवार गांव खेड़ा खलीलपुर छोड़कर किसी अन्य जगह रहने चला गया है। परिवार का कहना है कि महापंचायत में जिस तरह हमें जान से मारने और पुलिस थाना फूंकने की धमकियां दी गईं, उससे हम डरे हुए हैं। परिवार का आरोप है कि महापंचायत के बाद कुछ युवकों ने उनके घर के आसपास भी उन धमकियों को दोहराया। इनमें गांव के एक-दो ही युवक शामिल थे। अधिकांश लोग बाहर से बुलाए गए थे। आसिफ का परिवार पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट नजर आ रहा है। उसका कहना है कि पुलिस की तरफ से कार्रवाई में कमी नहीं है लेकिन बाहर के लोग यहां आकर जो माहौल बिगाड़ रहे हैं, वो तनाव को कम नहीं होने दे रहे हैं।

पुलिस की मौजूदगी में थाना फूंकने की धमकी

गुड़गांव में एक कोविड सेंटर शुरू होने के मौके पर अम्मू (सफेद शर्ट और जीन्स में) हरियाणा भाजपा ओमप्रकाश धनखड़ के साथ। साथ में भाजपा विधायक रेखा शर्मा।

इंडरी महापंचायत के जो फोटो और वीडियो सामने आए हैं, वे भयावह हैं। 30 मई को हुई यह महापंचायत पहली नहीं थी। इससे पहले ऐसी छह पंचायतें हो चुकी थीं, जिनमें समुदाय विशेष के खिलाफ माहौल बिगाड़ने की पूरी कोशिश की गई। इंडरी की महापंचायत बाकायदा पहले से ऐलान करके की गई। हिन्दुओं की भावनाओं को उकसाते हुए इस महापंचायत के पोस्टर सोशल मीडिया पर डाले गए। इसके बावजूद लोकल पुलिस और हरियाणा सरकार होश में नहीं आई। धारा 144 टूटती रही और पंचायतें होती रहीं। लेकिन इंडरी महापंचायत में जब करणी सेना का अध्यक्ष सूरजपाल अम्मू, बिट्टू बजरंगी और आरएसएस से जुड़े लोग पहुंचे तो मामला तूल पकड़ गया। इंडरी गांव के संगम स्कूल में यह महापंचायत अरुण जैलदार नामक शख्स की अध्यक्षता में हुई थी।

इस भड़काऊ महापंचायत में गिरफ्तार हिन्दू युवकों को न छोड़े जाने पर थाना फूंकने तक की धमकी मंच से दी गई। लगभग हर नेता ने भड़काऊ भाषण दिया। महापंचायत स्थल पर पुलिस मौजूद थी लेकिन उसने न तो किसी को रोकने की कोशिश की और न ही बाद में कार्रवाई की। लॉकडाउन की वजह से पूरे हरियाणा में धारा 144 लगी हुई है और चार से ज्यादा लोगों के एक जगह जमा होने पर मनाही है। लेकिन इंडरी महापंचायत में सारे नियम टूट गए। महापंचायत में यूपी से भी लोगों को बुलाया गया था।

महापंचायत में दी गई धमकी के विरोध में रोजकामेव थाने में  पार्षद ताहिर, अंजुम, हसन प्रधान, दिलशाद और मुश्ताक हाशमी आदि ने लिखित शिकायत की लेकिन पुलिस ने इस प्रार्थना पत्र पर भी कोई कार्रवाई नहीं की। आमतौर पर पुलिस को ऐसे आयोजनों को लेकर यह शिकायत रहती है कि ऐसे आयोजकों के खिलाफ कोई लिखित शिकायत नहीं देता लेकिन मेवात में तो लोगों ने लिखित शिकायत भी दे दी लेकिन पुलिस अपनी जगह से हिली तक नहीं। इसी मामले में हाई कोर्ट के वकील फारुख अब्दुल्लाह ने महापंचायत में भड़काऊ भाषण और उसके आयोजन को लेकर एसपी मेवात और डीजीपी हरियाणा को लीगल नोटिस भेजा है।

मेवात की अजीबोगरीब राजनीति

मेवात में दो घराने चौधरी खुर्शीद अहमद और चौधरी तैयब हुसैन पुराने प्रतिद्वंदी हैं और इन्हीं दोनों परिवारों के इर्द-गिर्द राजनीति घूमती रही है। इनमें से जो घराना कांग्रेस में होता है तो दूसरा घराना विपक्षी दल में होता है। दोनों ही दिग्गज मेवाती नेता अब मरहूम हो चुके हैं लेकिन उनके बेटे उसी लीक पर चल रहे हैं। खुर्शीद अहमद के बेटे आफताब अहमद इस वक्त नूंह से कांग्रेस विधायक हैं। तैयब हुसैन के बेटे पूर्व विधायक जाकिर हुसैन कई दलों से होते हुए अब भाजपा में हैं और हाल ही में उन्हें भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनते ही जाकिर को इंडरी महापंचायत के जवाब में मेव महापंचायत करने के जरिए खुद को मेवात में लॉन्च करने का मौका मिला। सूत्रों ने बताया कि उन्होंने मेव बिरादरी के सभी पाल में अपने दूतों के जरिए मेव महापंचायत करने और इसका जवाब देने के संदेश भेजे गए। लेकिन हर जगह से जाकिर खेमे को नाकामी मिली। लोगों ने ऐसी किसी मेव महापंचायत में हिस्सा लेने से मना कर दिया। लोगों का कहना था कि जवाबी महापंचायत करके हम लोगों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। क्योंकि जो गलती इंडरी महापंचायत में हिन्दू संगठन कर चुके हैं, वही गलती हम नहीं दोहराना चाहते हैं। पुलिस अभी जो कार्रवाई आसिफ की हत्या के सिलसिले में कर रही है, वह फौरन पीछे हट जाएगी। मेव महापंचायत करके हालात सुधरने के बजाय बिगड़ेंगे। लोगों का कहना है कि गोसेवा आयोग का पूर्व चेयरमैन भानीराम मंगला राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जाकिर हुसैन के आगे-पीछे चल रहा है, जबकि उसके गोरक्षक दल मेवात के हालात को बिगाड़ने में लगे रहते हैं। ऐसे में हम लोग किस पर भरोसा करें।   

भड़काऊ भाषण देने वालों पर चुप्पी क्यों

महापंचायत में करणी सेना के अध्यक्ष सूरज पाल अम्मू का भाषण सबसे ज्यादा उकसाने वाला था। लेकिन सत्ता से करीबी की वजह से पुलिस उस पर हाथ नहीं डाल रही है। करीब तीन महीने पहले सूरज पाल अम्मू के बेटे की रहस्यमय हालात में मौत हो गई थी। अम्मू गुड़गांव में रहता है। उसके घर पर शोक जताने के लिए हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज, कई बड़े पुलिस अधिकारी और संघ-भाजपा के नेता पहुंचे थे। नीचे के स्तर पर काम करने वाले पुलिस अधिकारी ये सब जानते हैं। इसलिए वे अम्मू जैसे तत्वों पर हाथ नहीं लगाते। विदित हो कि जब पद्मावत फिल्म के विरोध में करणी सेना सक्रिय हुई थी तो आरोप है कि इसी सूरजपाल अम्मू के निर्देश पर गुड़गांव में एक प्राइवेट स्कूल की बस को असामाजिक तत्वों ने निशाना बनाया था। बस में स्कूल के बच्चे और महिला टीचर भी थीं।

वे इस घटना से बहुत भयभीत हुईं। पुलिस ने आजतक इस मामले में सूरजपाल अम्मू के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। अम्मू की कुल राजनीति यह है कि फिल्म, पेंटिंग या अन्य सांस्कृतिक मुद्दों पर पहले आरएसएस ऐतराज जताता है, उसके बाद करणी सेना अचानक ही सक्रिय हो जाती है। खुफिया एजेंसियों के पास इस बात की पुख्ता जानकारी तो नहीं है कि आरएसएस ने ही करणी सेना को खड़ा किया है, लेकिन उनके अधिकारी मानते हैं कि संघ और करणी सेना का कुछ रिश्ता जरूर है।

इस बीच मेवात में रहने वाले चौधरी आमिर खान का कहना है कि अगर सूरजपाल अम्मू का इलाज नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में मेवात का अमन-चैन, हिन्दू-मुस्लिम भाईचारा बर्बाद हो जाएगा। जो शख्स थाना फूंकने की खुलेआम धमकियां दे रहा हो, सोशल मीडिया पर तमाम वीडियो वायरल हैं। मेवात पुलिस की खामोशी समझ से बाहर है। अज्जी नामक युवक ने कहा कि महापंचायत में एक विशेष समुदाय के खिलाफ भड़काऊ शब्दों का प्रयोग करना, गलियां देना मेवात के हिंदू मुस्लिम भाईचारे के लिए खतरा है। दंगाइयों के भड़काऊ भाषणबाजी के खिलाफ पुलिस प्रशासन को संज्ञान लेना चाहिए और इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। हालांकि मेवात के एसपी ने एक टीवी चैनल को बताया कि उन्होंने वीडियो के जरिए सूरजपाल अम्मू के भाषणों की तस्दीक कर ली है। हम जल्द ही कार्रवाई करेंगे।

(यूसुफ किरमानी वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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