Mon. Aug 19th, 2019

हर फरियादी हो गया है अल्पसंख्यकः रवीश

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अहमदाबाद। शनिवार को चंद्रकांत दरू मेमोरियल ट्रस्ट ने एनडीटीवी के पत्रकार रविश कुमार को निडर पत्रकारिता के लिए चन्द्रकांत दरू मेमोरियल अवार्ड से सम्मानित किया। इससे पहले पत्रकारिता के लिए अरुण शौरी, बंधुआ मजदूरों की मुक्ति पर काम करने वाले स्वामी अग्निवेश और नर्मदा विस्थापितों के मामले पर अनिल पटेल को सम्मानित किया जा चुका है। रविश कुमार को ऐसे समय में निडर पत्रकारिता के लिए सम्मानित किया गया है जब मुख्य धारा का मीडिया गोदी मीडिया बन गया है। अब आम लोग भी ये महसूस करने लगे हैं कि मुख्यधारा का मीडिया अमीरों का मीडिया बन गया है और वो गरीबों के मुद्दों और समस्याओं को नहीं उठाता है। चाहे सीवर लाइन में काम करने वालों की मौत का मामला हो या शिक्षा मित्रों के आंदोलन ये मुद्दे उसकी विमर्श से नदारद हैं। मीडिया पर उद्योग घरानों का कब्ज़ा होता जा रहा है। ऐसे में रवीश कुमार नाम का एक चेहरा सामने आया है। जो निडर होकर गरीबों, वंचितों और शोषितों के मुद्दों को सामने लाने का काम कर रहा है।

अल्पसंख्यक का मतलब केवल मुसलमान नहीं

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अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन में आयोजित समारोह में रवीश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि जब अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा था तो बहुत से लोग इसलिए चुप थे क्योंकि ये अत्याचार अल्पसंख्यकों के खिलाफ था। लोग अल्पसंख्यक का मतलब मुसलमान समझ रहे थे। जबकि अल्पसंख्यक कोई भी हो सकता है इसी गुजरात के सूरत में वह कपड़ा व्यपारी जो जीएसटी के खिलाफ पच्चास से साठ हज़ार की संख्या में सड़क पर उतरे यह व्यपारी तरसते रहे हैं कि कोई मुख्यधारा का न्यूज़ चैनल आये उन्हें कवर करे। उनकी बात देश के सामने रखे। लेकिन कोई नहीं आया। क्योंकि वह जो कभी सत्ता पक्ष के साथ थे लेकिन अब सरकार के सामने अल्पसंख्यक हो गए थे।

इसी तरह से उत्तर परदेश के 1लाख 75 हजार शिक्षा मित्र भी सड़कों पर तरसते रहे। कोई टीवी वाला आये उन्हें कवर करे। लेकिन कोई नहीं आया। क्योंकि वह भी सरकार के सामने अल्पसंख्यक थे। हम सब को समझना पड़ेगा कि अल्पसंख्यक का मतलब सिर्फ मुसलमान नहीं होता आंगनवाड़ी महिला, सूरत के कपड़ा व्यपारी, यूपी के शिक्षा मित्र, शिक्षक, गरीब, मजदूर, हम आप में से कोई भी अल्पसंख्यक हो सकता है। इनकी आवाज़ टीवी पर नहीं सुनाई देती। क्योंकि यह मीडिया एंटी पूअर है जो खास एजेंडे से उपनिवेशीकरण कर रहा है। टीवी चैनल गरीब विरोधी, लोकतंत्र विरोधी हैं।

आधार कार्ड गुलामी का नया प्रतीक

इस मौके पर रवीश कुमार ने कहा कि ‘आधार कार्ड के द्वारा पूरे भारत को गुलाम बनाये जाने के खतरे से भी आगाह किया। आधार से हमारे खर्च की प्रवृति, पसंद-नापसंद सबसे सरकार वाकिफ होगी। नंदन ने जब Data colnizatiion शब्द का प्रयोग किया था तब भी हमारी घंटी नहीं बजी थी। हमने डेढ़ सौ साल के गुलामी से आज़ादी के संघर्ष को भुला दिया। हमने उन्हें भुला दिया जो शहीद हुए, जिन्होंने आज़ादी की खातिर यातनाएं झेली। आज हमने अपने अंदर आज़ादी आन्दोलन की चेतना को मार दिया है और हम फिर से गुलाम बनने की ओर बढ़ रहे हैं’।

रवीश ने मुख्य धारा के मीडिया के काम करने के तरीके पर सवाल खड़ा किया। रवीश ने कहा कि “कुछ लोग मुझसे पूछते हैं इतने एंटी क्यों हो। मैं कहता हूं उनसे पूछो जो एंकर इतने प्रो हैं क्यों ये इतने प्रो हैं। कुछ दे दिया है क्या। मैं तो सिर्फ इतना ही पूछता हूं मैनहोल में उतरने वाले के पास 3000 रुपये का मास्क क्यों नहीं है? आक्सीजन की कमी से बच्चे मर गए। ये पूछ रहे हैं। आधार है हमें प्रश्न करना चाहिए। मीडिया को सत्ता पक्ष के खिलाफ विपक्ष की भूमिका में रहना चाहिए तभी लोकतंत्र बचेगा”। गुजरात राज्यसभा क्रॉस वोटिंग पर भी रवीश ने प्रश्न उठाये। उन्होंने कहा कि “मैं नहीं जनता कि क्रॉस वोटिंग भी अंतरात्मा की आवाज़ पर होती है आठ और नौ तारीख की रात जब कांग्रेस भाजपा के बड़े नेता रात को चुनाव आयोग के दफ्तर में थे और अपना अपना पक्ष रख रहे थे तो मीडिया सुस्त विपक्ष-सुस्त विपक्ष चीख रहा था। वह यह सवाल क्यों नहीं खड़ा कर रहा था कि क्रॉस वोटिंग क्यों हुई। यूं ही हो गई अंतरात्मा की आवाज़ पर या फिर कुछ लिया दिया भी गया? क्यों बैलट पेपर दिखाने की ज़रूरत 

गुजरात में गरीबी ने तोड़े रिकार्ड

इस मौके पर ‘सच्चाई गुजरात की’ के लेखक प्रोफेसर हेमंत कुमार ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि 1999–2000 में गुजरात में 26 लाख गरीब परिवार थे। 2014 में तत्कालीन मुख्य मंत्री नरेंद्र मोदी ने मां अमृतम योजना की लांचिंग के मौके पर कहा कि इस योजना का लाभ 40 लाख गरीब परिवारों को मिलेगा। 2015-16 में महात्मा मन्दिर में हुए वाइब्रेंट सम्मिट में प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात में 41 लाख 30 हज़ार लोग गरीब हैं। अन्नपूर्णा में रजिस्टर्ड गरीबों की संख्या 3 करोड़ 52 लाख है। जिसका मतलब यह हुआ गुजरात में 58 प्रतिशत लोग गरीब हैं। शाह ने रिज़र्व बैंक के हवाले से बताया इस वर्ष का क्रेडिट ग्रोथ रेट 5.6 है जो 63 वर्षों का सबसे नीची ग्रोथ दर है।

पर्यावरण मित्र के महेश पंड्या द्वारा चंद्रकांत दरू मेमोरियल अवार्ड रवीश कुमार को देने की घोषणा की गई इस मौके पर जस्टिस सुरेश, वरिष्ठ वकील गिरीश पटेल, प्रकाश शाह, निर्झरी सिन्हा, गौतम ठाकर, मनीषी जानी आदि लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर हेमंत शाह ने किया।

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