Fri. Jun 5th, 2020

एक फोन आया और पथराव करने वालों को चाय पिलाकर थाने से छोड़ दिया गयाः शुएब

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लखनऊ। महीने भर बाद लखनऊ जेल से रिहा होने पर रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुएब और रिटायर आईपीएस एसआर दारापुरी लखनऊ घंटाघर पहुंचे। घंटाघर पर सीएए और एनआरसी के खिलाफ हजारों महिलाएं धरना प्रदर्शन कर रही हैं।

76 वर्षीय मोहम्मद शुएब एडवोकेट ने कहा कि यह सरकार अगर समझती है कि जेलों में डालकर या ज़्यादतियां करके जन आंदोलनों को कुचल देगी तो यह उसकी भूल है। हम जेलों से डरने वाले लोग नहीं हैं। जब मुझे गिरफ्तार किया गया तो सबसे पहले रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव के बारे में पूछा गया कि वह कहां है।

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राजीव यादव का नाम लेकर कई अन्य लोगों से भी पूछताछ की गई। सीओ पुलिस ने मुझे और मेरे घर वालों को भी फर्जी मुकदमों में जेल में डालकर ज़िंदगी खराब करने की धमकी दी। जिस तरह से गालियों के साथ राजीव यादव के बारे में पुलिस अधिकारी लगातार पूछताछ करते रहे उससे प्रतीत होता है कि यह सरकार जनता के हित की बात करने वालों को साज़िश के तहत टार्गेट करने पर आमादा है।

उन्होंने कहा कि अगर संविधान के खिलाफ कुछ भी होता है तो हम सबका कर्तव्य है कि उसका विरोध करें और ऐसा करने का संविधान हमें अधिकार देता है। रिहाई मंच का हर सिपाही संविधान बचाने की यह लड़ाई जारी रखेगा। हम जेल की दीवारों से डरने वाले लोग नहीं हैं और न ही दमन के आगे झुकने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि वहां थाने में पथराव करने वाले कई व्यक्तियों को पकड़कर ले जाया गया था। इस बीच भाजपा कार्यालय से फोन आता है कि वे उनके लोग हैं। पुलिस का रवैया तुरंत बदल जाता है। उन्हें थाने में चाय पिलाई जाती है और फिर सम्मान के साथ भाजपा दफ्तर भेज दिया जाता है, जबकि बेकसूरों को फर्जी मुकदमों में जेल भेजा जाता है।

उन्होंने कहा कि इसलिए मैं कह सकता हूं कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और जानबूझकर उसे हिंसक दिखाने के लिए पथराव साजिश के तौर पर करवाया गया था। विरोध के स्वर का दमन पहले भी किया गया है और आगे भी ऐसी साज़िशें की जाती रहेंगी, लेकिन हमारी बहनों-बेटियों ने जो हिम्मत दिखाई है उसको हम सलाम करते हैं। यह विरोध उस समय तक जारी रहेगा जब तक कि यह गैर संवैधानिक अधिनियम वापस नहीं हो जाता है।

उधर, रिटायर आईपीएस एसआर दारापुरी भी घंटाघर पहुंचे। दारापुरी ने वहां कहा कि आरएसएस-भाजपा सरकार द्वारा लाया गया कानून संविधान विरोधी और मुस्लिम विरोधी तो है ही लेकिन इससे सबसे ज्यादा नुकसान हिंदू धर्म की कमजोर जातियों को होगा। असम का उदाहरण सामने है। वहां 10 साल चले एनआरसी के बाद आए परिणाम से स्पष्ट है। वहां 19 लाख में से 14 लाख लोग हिंदू निकले।

उन्होंने कहा कि यह सावरकर की सनकभरी सोच को लागू करने के लिए जनता का धन और सरकारी खजाने की बर्बादी है। आरएसएस के लोग जिस विवेकानंद जी की माला जपते हैं, उन्होंने कहा था कि धर्म के आधार पर शर्णाथियों में मतभेद नहीं करना चाहिए। गांधी जी जिन्हें मोदी-शाह इस कानून के पक्ष में गलत ढंग से पेश कर रहे है, उन्होंने कहा था कि भारत में पाकिस्तान से आने वाले हर मुसलमान को समान अधिकार मिलने चाहिए।

दारापुरी ने कहा कि प्रदेश में सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। मुख्यमंत्री खुद बदला लेने का आह्वान कर रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है। सरकार को लखनऊ में 19 दिसंबर को हुई हिंसक घटना के सीसीटीवी फुटेज जारी करना चाहिए। ताकि सच सामने आ सके।

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