Wednesday, April 17, 2024

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद तमिलनाडु के राज्यपाल ने दिलाई मंत्री को शपथ

सुप्रीम कोर्ट की खिंचाई के एक दिन बाद तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने डीएमके विधायक के. पोनमुडी को मंत्रिमंडल में शामिल करने पर मुहर लगा दी। इसके साथ ही पोनमुडी को मंत्री पद पर शपथ भी दिला दी। गवर्नर ने पोनमुडी को शुक्रवार दोपहर साढ़े तीन बजे मंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया था।

पोनमुडी को शपथ दिलाए जाने के बारे में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी थी। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने गुरुवार को कहा था, ‘अगर हम कल आपकी ओर से नहीं सुनते हैं तो हम राज्यपाल को संविधान के अनुसार कार्य करने का निर्देश देने वाला एक आदेश पारित करेंगे। हम तमिलनाडु के राज्यपाल और उनके व्यवहार के बारे में गंभीर रूप से चिंतित हैं। उनके पास ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। वह सुप्रीम कोर्ट को चुनौती दे रहे हैं। …हम आंखें खुली रख रहे हैं और कल (शुक्रवार को) हम फैसला करेंगे।’

सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को आय से अधिक संपत्ति के मामले में पोनमुडी की दोषसिद्धि पर रोक लगा दी थी और तीन साल की जेल की सजा को निलंबित कर दिया था। इसके बावजूद आरएन रवि द्वारा पोनमुडी को राज्य मंत्रिमंडल में फिर से शामिल करने से इनकार करने के बाद एमके स्टालिन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

उन्होंने कहा था कि यह संवैधानिक नैतिकता के खिलाफ होगा। मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में संपत्ति मामले में उनको बरी किए जाने के फैसले को पलटने के बाद पोनमुडी को विधायक के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि और दो साल की जेल की सजा पर रोक लगा दी। राज्य सरकार ने तब उन्हें मंत्री पद पर बहाल करने की मांग की थी, लेकिन राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि उनकी सजा को केवल निलंबित किया गया है, रद्द नहीं किया गया है।

अदालत में मामला पहुंचने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल नाममात्र प्रमुख ही हैं जिनसे निर्वाचित सरकार के निर्णयों को लागू करने की उम्मीद की जाती है।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि की कड़ी आलोचना की और यहां तक टिप्पणी कर दी थी कि वह सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना कर रहे हैं।

एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने पर शीर्ष अदालत द्वारा रोक लगाए जाने के बाद भी डीएमके नेता के पोनमुडी को राज्यपाल ने राज्य मंत्रिमंडल में फिर से शामिल करने से इनकार कर दिया था।

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने राज्यपाल की खिंचाई करते हुए कहा था, ‘हम इस मामले में राज्यपाल के आचरण को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं। वह भारत के सर्वोच्च न्यायालय की अवहेलना कर रहे हैं।’

सीजेआई ने कहा था, ‘हम राज्यपाल को संविधान के अनुसार कार्य करने का निर्देश देने वाले आदेश को पारित करने से नहीं हिचकेंगे, उस स्थिति से बचने के लिए हम समय दे रहे हैं।’

इसके पहले आज दिन में तमिलनाडु गवर्नर आरएन रवि ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि उन्होंने विधायक के. पोनमुडी को दोपहर 3:30 बजे राज्य कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए विधिवत आमंत्रित किया है। अटॉर्नी जनरल (एजी) आर वेंकांतरामनी ने सीजेआई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ को बताया कि गवर्नर ने बता दिया कि उनका “न्यायालय की अवहेलना करने का कोई इरादा नहीं था।”

एजी ने प्रस्तुत किया कि गवर्नर के अनुसार, उन्होंने इस मुद्दे पर केवल सुप्रीम कोर्ट के कुछ निर्णयों के आधार पर निर्णय लिया। उन्होंने कहा, “राज्यपाल यह बताना चाहते हैं कि माननीय न्यायालय के किसी भी आदेश की अवहेलना करने का उनका इरादा बिल्कुल भी नहीं था। न्यायालय के कुछ निर्णयों और कुछ समझ के आधार पर उन्होंने एक विचार रखा।”

तमिलनाडु राज्य के सीनियर एडवोकेट पी विल्सन ने कहा कि संवैधानिक नैतिकता की आवश्यकता वाले मामलों में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से ‘संसदीय लोकतंत्र’ को बचाए रखने में मदद मिलती है।

गुरुवार को कोर्ट ने विधायक के पोनमुडी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद भी मंत्री के रूप में फिर से शामिल करने से इनकार करने पर तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि पर नाराजगी व्यक्त की थी। सीजेआई ने एजी से पूछा, “गवर्नर यह कैसे कह सकते हैं कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी सजा पर रोक लगाने के बाद मंत्री के रूप में उनका दोबारा शामिल होना संवैधानिक नैतिकता के खिलाफ होगा?”

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं)

जनचौक से जुड़े

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

Latest Updates

Latest

Related Articles