Wednesday, October 20, 2021

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दुर्दशाः चार किलो धान देने पर मिल रहा है एक किलो नया आलू

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धान का कटोरा कहे जाने वाले चंदौली जनपद में किसानों का हाल बेहाल है। सरकार और जिला प्रशासन का दावा भले चाहे जो हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और कहती है। धान क्रय केंद्र पर बेचने के लिए किसान दर-दर भटक रहे हैं। वहीं गांव में चार किलो धान देने पर एक किलो नया आलू मिल रहा है।

सरकार ने किसानों के धान क्रय करने के लिए जिले में 112 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इसके लिए आठ एजेंसियों को नामित किया गया है। विपणन शाखा, यूपी एग्रो, पीसीएफ, एनसीसीएफ, पीसीयू, नैफेड सहित पंजीकृत एजेंसियों को जिम्मेदारी मिली है। तीन एजेंसियों ने संसाधनों की कमी बताते हुए धान खरीद करने से मना कर दिया है। जिन एजेंसियों ने क्रय केंद्र खोलने की मंजूरी दी है, उस क्रय केंद्र पर बैनर टंग गया है, लेकिन बोरे और तौल की मशीन बहुत से क्रय केंद्रों से नदारद है। वहीं सात केंद्र चंदौली नवीन मंडी में खुलेंगे, जहां कहीं के किसान भी आकर अपना धान बेच सकते हैं।

इस बार धान खरीद का लक्ष्य 1.83 लाख एमटी हैं। धान खरीद का समय एक  नवंबर से है, लेकिन पिछले कुछ दिन पहले सरकारी आकंड़ों में मात्र 273 किसानों की धान की खरीद कुछ ही क्विंटल हुई है, जबकि आम किसान ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराकर इस केंद्र से उस क्रय केंद्र का चक्कर लगा रहा है। कभी किसी क्रय केंद्र पर क्रय अधिकारी न रहते हैं तो कहीं बोरे का अभाव बता कर किसानों को अगले दिन आने को कहकर टरका दिया जा रहा है।

बोरे के अभाव का क्रय केंद्र पर अधिकरियों से शिकायत करने पर यह जवाब मिलता था कि लॉकडाउन में बोरा नहीं बन रहा था, इसलिए किल्लत है। वहीं धान खरीद की कई निजी एजेंसियों ने धान की खरीद करने से भी मना कर दिया है। धान खरीद के लिए तीन एजेंसी ने मना कर दिया है, बीस क्रय केंद्र बंद हो गए हैं। नतीजे में किसानों के धान की खरीद क्रय केंद्रों पर नहीं हो रही है। क्रय केंद्र केवल शोपीस बन गए हैं।

अब इन क्रय केंद्रों पर पंजीकरण कराने वाले किसानों के समक्ष धान बेचने की समस्या आ गई है। वहीं लागत के हिसाब से आढ़तियों और व्यापारियों से धान का सही मूल्य भी नहीं मिल रहा है। उत्तर प्रदेश में अच्छे धान (ए ग्रेड) का अधिकतम सरकारी रेट 1888 रुपये प्रति कुंतल है, लेकिन ज्यादातर जिलों में किसान 1000 रुपये से लेकर 1200 रुपये प्रति कुंतल बेचने को मजबूर हैं, जिन जिलों में सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है, वहां भी किसान 1000-1200 रुपये में धान बेच रहे हैं, क्योंकि बहुत से किसान क्रय केंद्र पर धान नहीं बेच पा रहे हैं।

ऐसे तो चंदौली जनपद में कई बेहतरीन धान गोपाल भोग, काला नमक, गंगा कावेरी, संपूर्णा, मोती गोल्ड, श्री वाला, वौनी मंसूरी, सहित तमाम धान पैदा होते हैं, लेकिन क्रय केंद्र पर वौनी मंसूरी ही किसान बेचना चाहते हैं, लेकिन वहां भी नमी दिखाकर किसानों का शोषण होता है। अभी पिछले साल या अभी भी अमेरिका के हाइब्रिड धान, जिसका बीज हर साल नया इस्तेमाल करना होता है, उसकी क्रय केंद्र पर खरीद ही नहीं होती है। हाइब्रिड धान, संकर प्रजाति के धान 6444 का हाल बेहाल है।

अभी कुछ दिन पहले धान के कटोरा के किसानों को यह सब्जबाग दिखाया गया कि काला चावल प्रजाति के धान पैदा करने वाले किसानों की पूरी दुनिया में धूम  मचेगी और यहां का किसान मालामाल हो जाएगा, लेकिन निर्यात करने की बात अभी  हटा दें, सरकारी खरीद का उचित मूल्य की कोई व्यवस्था भी सरकार की तरफ से नहीं हैं। काला चावल पैदा करने वाले किसान अपने अनुभव के अनुसार कहते हैं कि इस चावल की खरीद के लिए मार्केट का अभाव है और सरकार और जिला प्रशासन केवल जुमला उछाल रहे हैं, इसलिए हम इस चावल को पैदा करने से पीछे हट रहे हैं।

जब किसानों की तरफ से खेती व किसानी  को बचाने के लिए सहकारी खेती की तरफ बढ़ने, सरकार द्वारा शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण देने, पंचायत स्तर क्रय केंद्र खोलकर, तुरंत भुगतान करने पर जोर देने की जरूरत है, तब यह सरकार खेती किसानी में मुनाफा कमाने वाले कॉरपोरेट घरानों के लिए काम कर रही है। उनको घुसपैठ कराने के लिए किसान विरोधी काले कानून बना रही है। यह सरकार तो आई थी स्वामीनाथन आयोग को लागू करने के लिए, लेकिन अब लागू कर रही है, अंबानीनाथन की रिपोर्ट यानि अडानी-अंबानी के हित के लिए काम कर रही है।

  • अजय राय

(लेखक आईपीएफ राज्य कार्य समिति के सदस्य और मजदूर किसान मंच के प्रभारी हैं।)

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