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Saturday, September 25, 2021

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छत्तीसगढ़:आदिवासियों ने शुरू की प्रदेश स्तरीय आर्थिक नाकेबंदी

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कांकेर (बस्तर)। आदिवासी समाज ने सोमवार को जिले के नेशनल हाइवे 30 कुलगाँव और चारामा के पास बैठ कर अपने प्रदेश स्तरीय आर्थिक नाकेबंदी की शुरुआत की। चारामा में आदिवासियों के जमा होने की वजह से मालगाड़ियों के साथ सड़क की आवाजाही थम गई है। जिले के सभी ब्लाक मुख्यालयों में आदिवासियों ने प्रदर्शन किया।

सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष सोहन पोटाई आर्थिक नाकेबंदी के दौरान मौजूद रहे। जिले में चारामा में तो कुछ घण्टे तक आदिवासियों ने सड़क तक जाम कर दिया था। प्रदेश के अन्य क्षेत्र मानपुर मोहला,  दल्लीराजहरा में आदिवासी ट्रेन की पटरी पर बैठ कर प्रदर्शन कर रहे हैं।

कोई अप्रिय स्थिति निर्मित न हो इसके लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद है। समाज ने आंदोलन के दौरान यात्री वाहन और आवश्यक सेवाएं चालू रहने की बात कही है।

पिछले कई दिनों से आंदोलन करने और ज्ञापन सौंपने के बावजूद मांगें पूरी नहीं होने से नाराज सर्व आदिवासी समाज ने यह कदम उठाया है। 13 सूत्रीय मांगों को लेकर सर्व आदिवासी समाज के लोगों ने अनिश्चितकालीन आर्थिक नाका बन्दी कर दिया है।

बता दें कि सुकमा के सिलगेर के मृतकों के परिजन को 50 लाख और घायलों को 5 लाख और परिवार के एक सदस्य को योग्यतानुसार शासकीय नौकरी दी जाए। इसे आदिवासियों ने अपनी मांग में शामिल कर रखा है।

इसके साथ ही बस्तर संभाग की नक्सल समस्या के स्थायी समाधान के लिए सभी पक्षों से समन्वय स्थापित कर स्थाई समाधान की दिशा में राज्य सरकार से शीघ्र पहल की मांग की गयी है।

पदोन्नति में आरक्षण के संबंध में जब तक माननीय उच्च न्यायालय के स्थगन समाप्त नहीं हो जाता। तब तक किसी भी हालत में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित पदोन्नत रिक्त पदों को नहीं भरे जाने की मांग भी इस आंदोलन का हिस्सा है। इसके अलावा शासकीय नौकरी में बैकलॉग और नई भर्तियों पर आरक्षण रोस्टर लागू करने की बात शामिल है।

-पांचवी अनुसूची क्षेत्र में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती में मूलनिवासियों का शत-प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए।

-संभाग एवं जिलास्तर पर भर्ती कराया जाए। प्रदेश में खनिज उत्खनन के लिए जमीन अधिग्रहण की जगह लीज में लेकर जमीन मालिक को शेयर होल्डर बनाए जाए।

-गांव की सामुदायिक गौण खनिज का उत्खनन एवं निकासी का पूरा अधिकार ग्राम सभा को दिया जाए।

-ग्राम सभा के द्वारा स्थानीय आदिवासी समिति के माध्यम से बेरोजगार युवाओं को खनिज पट्टा दिया जाए। फर्जी जाति मामले में दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

-छत्तीसगढ़ राज्य की 18 जनजातियों की मात्रात्मक त्रुटि में सुधार कर उन्हें जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाए।

-अनुसूची में उल्लेखित जनजातियों का जाति प्रमाण-पत्र जारी नहीं करने वाले संबंधित अधिकारी पर दंडात्मक कार्रवाई किया जाए।

-छात्रवृत्ति योजना में आदिवासी विद्यार्थियों के लिए आय की 2.50 लाख की पात्रता सीमा समाप्त किया जाए।

-आदिवासी समाज की लड़कियों से अन्य गैर आदिवासी व्यक्ति से शादी होने पर उक्त महिला को जनजाति समुदाय के नाम से जारी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर जनप्रतिधिनित्व, शासकीय सेवा तथा जनजाति समुदाय की जमीन खरीदी पर रोक लगाने के लिए संबंधित अधिनियमों में आवश्यक संशोधन किया जाए।

-वन अधिकार कानून 2006 का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करवाया जाए। पेसा कानून के क्रियान्वयन नियम तत्काल बनाकर अनुपालन सुनिश्चित करवाया जाए। अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों को नियम विरुद्ध नगर पंचायत बनाया गया है। इन नगर पंचायतों को विखण्डित कर दोबारा से ग्राम पंचायत में परिवर्तित किया जाए।

(बस्तर से जनचौक संवाददाता तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट।)

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