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तृणमूल ने दिया भाजपा को ‘शुभेंदु ऑपरेशन’ का जवाब

सौमित्र और सुजाता का फसाना अब बंगाल में एक अफसाना बन गया है। सौमित्र खान विष्णुपुर से भाजपा के सांसद हैं और सुजाता मंडल खान उनकी पत्नी हैं। बंगाल में पुराना राजनीतिक चोला उतारने और नया चोला पहनने की नजीर तो बहुत है पर यह पहला मौका है जब पूरे फिल्मी अंदाज में इसे अंजाम दिया गया। इसमें सियासत का शातिर खेल है तो साथ ही रोमांस और विरह का मिश्रण भी है।

शुभेंदु अधिकारी के जाने के बाद की खामोशी एक बड़े राजनीतिक धमाके के साथ टूटती है जब सुजाता मंडल तृणमूल कांग्रेस के कार्यालय में जाकर सौगत राय के हाथों से इसका झंडा थाम लेती हैं। शह और मात के इस खेल से सौमित्र भौचक रह जाते हैं और इसके बाद फिल्मी अंदाज में उनकी विरह गाथा शुरू होती है। आंसुओं के सैलाब और रुंधे गले से तृणमूल पर निशाना साधते हुए एक बांग्ला कविता का पाठ करते हैं,
मेरी प्रियतमा को तुम लोगों ने छीना है
हमारे सुख भरे संसार को दिया उजाड़
जीवन के अंतिम पल तक नहीं भूलूंगा इसे

एंग्री मैन की भूमिका में आते हुए कहते हैं, सुजाता मैं तुम्हें तलाक देता हूं, अपने नाम से खान की उपाधि हटा दो, अब तुम सिर्फ सुजाता मंडल हो। उधर से भी इसका जवाब फिल्मी अंदाज में ही आता है। सुजाता फूट-फूट कर रोते हुए कहती हैं, पदवी तो हटा दूंगी पर दिल में जो खान लिखा है उसका क्या करें। बहरहाल कुछ घंटों तक चलने के बाद 2006 में शुरू हुई प्रेम कहानी समाप्त हो जाती है। इस तरह के कुछ किस्से और भी हैं, लेकिन सौमित्र और सुजाता जैसा हिट कोई नहीं रहा है।

कोलकाता नगर निगम के तत्कालीन मेयर शुभम चटर्जी अपनी मित्र बैसाखी बनर्जी के साथ तृणमूल छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए तो उनकी पत्नी रत्ना चटर्जी ने तृणमूल का मोर्चा संभाल लिया। हां, एक बात जरूर है कि बैसाखी को इस बात का गिला है कि भाजपा में उनकी कदर नहीं है और यही शिकवा सुजाता को भी है।

सुमन का भी तलाक का मामला अभी अदालत में है। कुछ ऐसा ही मामला फिल्मी सितारा जय बंधोपाध्याय और अनन्या का रहा है। इधर जय भाजपा में शामिल हुए और उधर तलाक का मुकद्दमा दायर हो गया। अलबत्ता सुजाता को भरोसा है कि ‘कच्चे धागे से बंधे आएंगे सरकार मेरे’ की तर्ज पर एक दिन सौमित्र वापस लौट आएंगे उसके पास।

बहरहाल इस नाटकीय कहानी का एक दूसरा पहलू भी है और वह है सियासत में शह और मात देने का खेल। भाजपा के शुभेंदु ऑपरेशन का जवाब तृणमूल ने सुजाता ऑपरेशन से दिया है। यह सर्जरी इतनी खामोशी से की गई कि इसकी भनक तक किसी को नहीं लगी। सौमित्र खान बीरभूम जिले के विष्णुपुर से सांसद हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने भी बीरभूम जिले में भाजपा की पकड़ को मजबूत करने के लिए शांति निकेतन का दौरा किया था। लोकसभा चुनाव के दौरान कोर्ट की पाबंदी के कारण वे अपने चुनाव क्षेत्र में 1 दिन भी नहीं जा पाए थे। सुजाता ने ही मोर्चा संभाला था और अणुव्रत मंडल जैसे बाहुबली होने के बावजूद तृणमूल को हार का सामना करना पड़ा था।

अब सुजाता के तृणमूल में आने से अणुव्रत को और ताकत मिलेगी और बीरभूम जिले में तृणमूल की जमीन और मजबूत हो जाएगी। सुजाता ने भी शुभेंदु अधिकारी पर हमला करके जता दिया है कि पूर्व और पश्चिम मिदनापुर में सुभेंदू अधिकारी को चुनौती देंगी। आज तक इधर भाजपा और तृणमूल में जुबानी जंग दिन-ब-दिन तेज होती जा रही है।

दोनों ही विधानसभा चुनाव में एक दूसरे को मिलने वाली सीटों का आंकड़ा बता रहे हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एलान करती रही हैं कि बंगाल की संस्कृति से अनजान होने के बावजूद केंद्र में सत्ता में होने के नशे में भाजपा सारी लोकतांत्रिक सीमाओं को लांघती जा रही है। शायद वे भाजपा से कहना चाहती हैं,
कागज का है लिबास
चिरागों का शहर है
चलना जरा संभल के
क्योंकि तुम नशे में हो

(जेके सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कोलकाता में रहते हैं।)

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This post was last modified on December 23, 2020 5:48 pm

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