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नॉर्थ ईस्ट: त्रिपुरा थप्पड़ विवाद, डीएम ने कहा कि कर्तव्य पालन कर रहे थे

पश्चिम त्रिपुरा के जिला मजिस्ट्रेट शैलेश कुमार यादव की तीखी आलोचना इस बात को लेकर हो रही है कि ने अगरतला में कर्फ्यू के दौरान आयोजित विवाह समारोह को रोकने के लिए उन्होंने जरूरत से अधिक सख्त बर्ताव किया। यादव ने शुक्रवार को कहा कि वह सिर्फ कानून और व्यवस्था को लागू कर रहे थे और कर्तव्य पालन को लेकर उनके मन में कोई दुविधा नहीं है।

26 अप्रैल को अपनी कार्रवाई के लिए आलोचना का सामना करने वाले डीएम ने पहले माफी मांगते हुए कहा था कि किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना उनका उद्देश्य नहीं था।

घटना के तुरंत बाद त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने मुख्य सचिव मनोज कुमार से एक रिपोर्ट तलब की थी, जिन्होंने दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों- किरण दिनकर राव गीते और तनुश्री देबबर्मा सहित एक जांच समिति गठित की थी।

एसके यादव शुक्रवार को जांच समिति के सामने पेश हुए।

“समिति ने मुझे सबूत देने के लिए बुलाया। मैं दोपहर 3 बजे आया और अपने बयान और अन्य प्रासंगिक दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनमें मेरे द्वारा जारी किए गए आदेश, सीआरपीसी की धारा 144 के तहत जारी किए गए आदेश भी शामिल थे। उन्होंने मुझसे कुछ सवाल पूछे। मैंने उन्हें जवाब दे दिया है,” डीएम ने कहा।

यादव ने यह भी कहा कि वह समिति की जांच प्रक्रिया में पूरी तरह से सहयोग करेंगे और संबंधित दस्तावेज और अन्य विवरण प्रदान करेंगे।

“कानून और व्यवस्था लागू करना और कोरोना के प्रसार को रोकना मेरा कर्तव्य है। यही मैंने उस रात किया। मैंने जो कुछ भी किया, मैं उसे कर्तव्य पालन मानता हूं।”

इस बीच वैदिक ब्राह्मण समाज ने शुक्रवार को अगरतला में एक बैठक की और मांग की कि शादी समारोह को रोकने के दौरान जिस पुजारी को डीएम ने थप्पड़ मारा, उससे डीएम को माफी मांगनी चाहिए।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में जिला मजिस्ट्रेट 26 अप्रैल को अगरतला में माणिक्य कोर्ट में रात 10 बजे के बाद एक शादी समारोह को रोकते हुए दिखाई देते हैं, जब रात में कर्फ्यू की शुरुआत अगरतला नगर परिषद (एएमसी) क्षेत्रों में हुई थी।

उनको दूल्हे की गरदन पकड़ते हुए, दूल्हे और दुल्हन के परिवार सहित मौजूद सभी लोगों को गिरफ्तार करते हुए, एक पुजारी को थप्पड़ मारते हुए और उस शादी के लिए लिखित अनुमति को फाड़ते हुए देखा गया जिसे उन्होंने खुद साइन किया था। 30 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और बाद में रिहा कर दिया गया।

जिलाधिकारी शैलेश यादव के दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। ये वीडियो डीएम द्वारा मैरिज हॉल पर की गई छापामार कार्रवाई के दौरान के हैं। डीएम कोरोना महामारी के इस समय में आयोजित शादी समारोह में शामिल लोगों द्वारा कोविड गाइडलाइन का पालन नहीं किए जाने पर भड़क गए।

जिलाधिकारी ने पहले वहां से बैंड वालों को भगाया, इसके बाद शादी में शामिल लोगों को वहां से दौड़ा दिया। इतना ही नहीं डीएम ने दुल्हन को स्टेज से उतरने के लिए भी कहा, वहीं बाकी अधिकारी शादी में आए मेहमानों को मैरिज हॉल से बाहर निकालने में लगे रहे।  

घटना की वीडियो क्लिप ने सोशल मीडिया पर एक तूफान खड़ा कर दिया, जिसमें नेटिज़न्स ने पूछा कि एक सरकारी अधिकारी अपने आदेश को कैसे फाड़ सकता है और कैसे मुहूर्त के दौरान एक शादी समारोह को बाधित कर सकता है। कई लोगों ने अधिकारी के खिलाफ तत्काल जांच के लिए कहा। उन्होंने कहा कि “अपने स्वयं के हस्ताक्षर के तहत दी गई अनुमति के बावजूद एक शादी समारोह को डीएम ने बर्बाद कर दिया और सबसे खुश लम्हों में दूल्हे और दुल्हन को तकलीफ पहुंचाई”।

इस घटना का विरोध गायक सोनू निगम, भाजपा चंडीगढ़ शाखा और त्रिपुरा के विपक्षी नेता माणिक सरकार जैसी हस्तियों ने किया। सभी ने घटना को ‘अवांछित’ कहा। पश्चिम त्रिपुरा के सांसद और बीजेपी नेता प्रतिमा भौमिक ने दुल्हन के रिश्तेदारों से मुलाकात की और जिस पुजारी को डीएम ने थप्पड़ मारा उससे दिल नहीं दुखाने की अपील की।

सुदीप रॉय बर्मन, आशीष कुमार साहा और सुशांत चौधरी सहित त्रिपुरा के सत्तारूढ़ भाजपा विधायकों ने मुख्य सचिव कुमार को पत्र लिखकर डीएम को हटाने की मांग की और अगरतला सर्किट हाउस के पास इसके लिए धरना शुरू किया।

This post was last modified on May 1, 2021 1:00 pm