Friday, March 1, 2024

बिहार: बेमौसम वर्षा की मार, गेहूं की फसल बर्बाद

बे-मौसम वर्षा ने बिहार समेत समूचे उत्तर भारत में खेती को बर्बाद किया है। इस वर्षा, तेज हवा और ओला गिरने से रबी की फसल खासकर गेहूं पर काफी खराब असर पड़ा है। गेहूं की फसल कटनी के लिए तैयार है, इसलिए वर्षा व ओला से पौधे टूटकर गिर गए और वर्षा में भींग गए। फसल बर्बाद हो गई।

बिहार के विभिन्न जिलों में वर्षा, ओलावृष्टि, आंधी-तूफान व वज्रपात हुई। इससे व्यापक क्षति हुई है। कृषि विभाग के आंकलन के अनुसार मुजफ्फरपुर, गया, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर एवं रोहतास जिलों में खड़ी फसल को 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है। नुकसान कुल 54 हजार 22 हेक्टेयर में लगी फसल को हुआ है। इसकी क्षतिपूर्ति देने का फैसला सरकार ने किया है। मुख्यमंत्री क्षतिपूर्ति का भुगतान करने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग को निर्देश दिया है कि कृषि भुगतान के जरूरी रकम उपलब्ध कराए। पहले चरण में 92 करोड़ रुपए देने का निर्देश दिया गया है। नुकसान का पूरा आकलन किया जा रहा है। अन्य जिलों से भी रिपोर्ट मांगी गई है। राज्य में 17 मार्च से 21 मार्च के बीच वर्षा व ओलावृष्टि हुई थी। 

गेहूं के अलावा सरसों को की फसल को नुकसान हुआ है। आम और लीची को भी आंधी-तुफान व ओला गिरने से नुकसान हुआ है, लेकिन आम-लीची की जितनी फसल बच गई है, उसे वर्षा से लाभ भी हुआ है। गेहूं की फसल को गर्मी बढ़ने से भी नुकसान हुआ है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि इस सप्ताह भी हल्की वर्षा, वज्रपात हो सकती है और ओला गिर सकते हैं। गेहूं की फसल के लिए अभी का मौसम बहुत ही महत्वपूर्ण है।  

इस साल की शुरुआत से ही तापमान रिकार्ड तोड़ रहा है। फरवरी में ही देश के कई हिस्सों में लू चलने जैसी हालत बन गई। मार्च में वर्षा और आंधी-तूफान आने लगे। अप्रैल अभी बाकी है जिसे गर्मी के मौसम का पहला महीना माना जाता है। फरवरी में इस साल जितनी गर्मी रही, वह 1901 की गर्मी का रिकार्ड तोडने वाली रही।

मार्च की वर्षा व आंधी-तूफान से कुछ इलाकों में काफी नुकसान हुआ है। जैसे उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के आसपास के इलाके में जहां गेहूं और आम दोनों फसलों को काफी नुकसान हुआ है। कुछ किसानों को कहना है कि 80 प्रतिशत से अधिक फसल बर्बाद हो गई है। वर्षा और तेज हवा में खेतों में खड़ी गेहूं के पौधे गिर गए और फसल बर्बाद हो गई। फरवरी की गर्मी का भी गेहूं पर खराब असर पड़ा है। गर्मी व फिर वर्षा से गेहूं की मात्रा व गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ा है। गेहूं के दाने पतले, छोटे होने के अलावा उनका रंग भी खराब हो सकता है।

बिहार के रोहतास जिले के एक किसान सत्यम पांडे कहते हैं कि इस तरह की बेमौसम की वर्षा पिछले कुछ वर्षों से हो रही है। गेहूं और सरसों की फसल पर काफी खराब असर पड़ा है। पौधों के जमीन पर गिर जाने से कटनी करना आसान नहीं होगा। मशीन तो काम ही नहीं करेगा, हाथ से काटने में भी काफी कठिनाई होगी। पहले तो खेत सूखने का इंतजार करना होगा क्योंकि भीगे व नम पौधों को काटना संभव नहीं होता। अगर फिर वर्षा हो गई तो बची फसल भी नष्ट हो जाएगी।

फसल को हुई क्षति को सरकारी सहायता से ज्यादा फायदा नहीं हो पाता। कारण है कि सरकारी सहायता के मिलने में विलंब होता है। छोटे किसान तबतक अपनी उपज को औने-पौने दाम में बेच चुके होते हैं क्योंकि उन्हें अगली फसल के लिए खेत खाली करना होता है।

मार्च के दूसरे पखवाडें में हुई वर्षा का पूरे उत्तर भारत में असर पड़ा है। पंजाब और हरियाणा में भी फसल नष्ट हुई है। देश में गेहूं लगभग 340 लाख हेक्टेयर में उपजाई जाती है। इसमें से कितने इलाके में असमय वर्षा का असर पड़ा है, इसका आंकड़ा अभी नहीं आया है। पर आरंभिक आकलन के अनुसार दस से 15 प्रतिशत का नुकसान हो चुका है। पंजाब के बाद उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश हरियाणा, राजस्थान, बिहार में गेहूं उपजाया जाता है।  

( अमरनाथ झा वरिष्ठ पत्रकार और पर्यावरण विशेषज्ञ हैं।)

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